जयशंकर ने सोफिया के नेशनल हिस्टोरिकल म्यूजियम का दौरा किया, बुल्गारिया की 6.5 लाख कलाकृतियों की विरासत को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 10 जून 2026 को बुल्गारिया की राजधानी सोफिया स्थित नेशनल हिस्टोरिकल म्यूजियम का दौरा किया और वहाँ संरक्षित हजारों वर्षों की ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से देखा। उन्होंने संग्रहालय के व्यापक संग्रह को बुल्गारिया के इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं को समझने का अनमोल अवसर बताया।
संग्रहालय भ्रमण का विवरण
बोयाना जिले में स्थित यह संग्रहालय बुल्गारिया का सबसे बड़ा और बाल्कन क्षेत्र के सबसे समृद्ध संग्रहालयों में से एक माना जाता है। 1973 में स्थापित इस संग्रहालय में 6,50,000 से अधिक कलाकृतियाँ संरक्षित हैं, जिनमें थ्रेसियन सोने-चाँदी के खजाने, प्राचीन मोज़ेक, ऐतिहासिक हथियार और सिक्के शामिल हैं। यह मुख्य शहर से 10 किलोमीटर दूर पूर्व कम्युनिस्ट सरकारी निवास की भव्य इमारत में स्थित है।
संग्रहालय के प्रमुख आकर्षणों में विश्व प्रसिद्ध पानाग्युरिश्टे गोल्ड ट्रेजर और विला आर्मिरा के मोज़ेक शामिल हैं, जो प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग तक के मानव इतिहास को समेटते हैं।
जयशंकर की प्रतिक्रिया
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में जयशंकर ने कहा कि संग्रहालय में संरक्षित विरासत को देखकर उन्हें इस बात का और गहरा एहसास हुआ कि बुल्गारिया ने अपने इतिहास और संस्कृति के विभिन्न आयामों को कितनी सावधानी और समर्पण के साथ सहेजा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऐसी संस्थाएँ आने वाली पीढ़ियों को अपने अतीत से जोड़ने और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
भारत-बुल्गारिया संबंधों पर चर्चा
संग्रहालय भ्रमण के अतिरिक्त जयशंकर ने भारत के मित्रों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख बुल्गारियाई व्यक्तित्वों से भी मुलाकात की। उन्होंने बताया कि इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, गतिशीलता (मोबिलिटी) और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के उपायों पर उपयोगी विचार-विमर्श हुआ।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ संबंधों को नई गहराई देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। गौरतलब है कि भारत और बुल्गारिया के संबंध केवल कूटनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं — शिक्षा, संस्कृति, व्यापार, निवेश और युवाओं के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भी नई संभावनाओं पर चर्चा हुई।
आगे क्या
जयशंकर की यह यात्रा भारत-बुल्गारिया द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से दोनों देशों के बीच जन-संपर्क को नई ऊँचाई देने के प्रयास जारी रहने की उम्मीद है।