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PM मोदी ने स्लोवाक राष्ट्रपति पेलेग्रिनी से ब्रातिस्लावा में की मुलाकात, मैन्युफैक्चरिंग से अंतरिक्ष तक सहयोग पर चर्चा

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PM मोदी ने स्लोवाक राष्ट्रपति पेलेग्रिनी से ब्रातिस्लावा में की मुलाकात, मैन्युफैक्चरिंग से अंतरिक्ष तक सहयोग पर चर्चा

सारांश

ब्रातिस्लावा में PM मोदी और राष्ट्रपति पेलेग्रिनी की मुलाकात महज़ शिष्टाचार नहीं थी — वाराणसी पर चित्र प्रदर्शनी से लेकर उपनिषदों के स्लोवाक अनुवाद तक, यह यात्रा भारत-स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक और रणनीतिक दोनों धरातलों पर नई ज़मीन तैयार कर रही है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 15-16 जून 2025 को ब्रातिस्लावा में स्लोवाक राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मुलाकात की।
वार्ता में मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति बनी।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री एस.
जयशंकर , विदेश सचिव विक्रम मिस्री और NSA अजीत डोभाल शामिल थे।
रॉबर्ट गैफ्रिक से मुलाकात की, जिन्होंने उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद किया है।
दोनों नेताओं ने वाराणसी पर आधारित चित्र प्रदर्शनी देखी, जो स्लोवाक कलाकारों द्वारा बनाई गई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15-16 जून 2025 को ब्रातिस्लावा में स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और डिजिटल तकनीक जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करने पर सहमति बनी। प्रेसिडेंशियल पैलेस, ब्रातिस्लावा में हुई इस बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक में क्या-क्या हुआ

15 जून को प्रेसिडेंशियल पैलेस में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में भारतीय पक्ष की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मौजूद रहे। मोदी ने एक्स पर लिखा कि बातचीत में मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट, इनोवेशन, इन्वेस्टमेंट, ऊर्जा और बायोफ्यूल जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई और डिजिटल तकनीक में सहयोग की व्यापक संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया।

दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को उपहार भी भेंट किए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेताओं ने डिजिटलाइजेशन, इनोवेशन, रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी का स्वागत किया।

पेलेग्रिनी की सराहना और पुरानी दोस्ती का ज़िक्र

बैठक के बाद मोदी ने एक्स पर लिखा, 'राष्ट्रपति पेलेग्रिनी, आपसे मिलकर खुशी हुई। मुझे खुशी है कि हम अपनी पिछली बैठक के दौरान हुई ज़रूरी बातचीत को जारी रख पाए। आपकी समझ और विचार हमेशा बहुत प्रेरणा देने वाले और कीमती होते हैं।' राष्ट्रपति पेलेग्रिनी ने भी अपनी पोस्ट में कहा कि वे इस फरवरी में नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान शुरू हुई खुली और दोस्ताना बातचीत को आगे बढ़ाकर प्रसन्न हैं।

उपनिषदों के अनुवादक से मुलाकात — सांस्कृतिक सेतु

मोदी ने ब्रातिस्लावा में डॉ. रॉबर्ट गैफ्रिक से भी भेंट की, जिन्होंने उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद करने की पहल का नेतृत्व किया है। मोदी ने तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिकता के प्रति उनका जुनून 'तारीफ के काबिल' है। यह मुलाकात भारत-स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव की गहराई को दर्शाती है।

ब्रातिस्लावा में बनारस का कनेक्शन

दोनों नेताओं ने प्रेसिडेंशियल पैलेस में वाराणसी पर आधारित एक विशेष चित्र प्रदर्शनी भी देखी, जिसमें हाल ही में वाराणसी का दौरा करने वाले स्लोवाक कलाकारों की कृतियाँ प्रदर्शित थीं। मोदी ने इसे 'ब्रातिस्लावा में बनारस का कनेक्शन' बताते हुए कहा कि 'कला और संस्कृति में सच में लोगों को करीब लाने की एक अनोखी काबिलियत होती है।'

आगे क्या

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत यूरोपीय देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारियाँ तेज़ी से विस्तारित कर रहा है। गौरतलब है कि पेलेग्रिनी इसी साल फरवरी में नई दिल्ली की यात्रा कर चुके हैं, और अब मोदी की ब्रातिस्लावा यात्रा इस द्विपक्षीय संवाद को नई गति दे रही है। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में ठोस सहयोग ढाँचा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से इतर मध्य यूरोपीय देशों के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाने पर ज़ोर देती है। उपनिषदों के अनुवाद और वाराणसी प्रदर्शनी जैसे सांस्कृतिक आयाम इस यात्रा को केवल व्यापारिक एजेंडे से ऊपर उठाते हैं, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ये घोषणाएँ ठोस निवेश और रोज़गार में तब्दील होती हैं। स्लोवाकिया यूरोपीय संघ का सदस्य है और ऑटोमोटिव तथा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत का संभावित साझेदार हो सकता है — यह अवसर अभी तक पूरी तरह भुनाया नहीं गया।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी की स्लोवाकिया यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
PM मोदी ने 15-16 जून 2025 को ब्रातिस्लावा में स्लोवाक राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत किया। बैठक में मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और डिजिटल तकनीक में सहयोग पर चर्चा हुई।
भारत और स्लोवाकिया के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति बनी?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने डिजिटलाइजेशन, इनोवेशन, रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, शिक्षा, ट्रांसपोर्ट, बायोफ्यूल और इन्वेस्टमेंट लिंकेज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
डॉ. रॉबर्ट गैफ्रिक कौन हैं और मोदी ने उनसे क्यों मुलाकात की?
डॉ. रॉबर्ट गैफ्रिक ने उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद करने की पहल का नेतृत्व किया है। PM मोदी ने ब्रातिस्लावा में उनसे मुलाकात कर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता के प्रति उनके जुनून की सराहना की।
ब्रातिस्लावा में 'बनारस कनेक्शन' क्या था?
प्रेसिडेंशियल पैलेस, ब्रातिस्लावा में वाराणसी पर आधारित एक विशेष चित्र प्रदर्शनी आयोजित की गई थी, जिसमें हाल ही में वाराणसी का दौरा कर चुके स्लोवाक कलाकारों की कृतियाँ प्रदर्शित थीं। मोदी और पेलेग्रिनी ने साथ मिलकर यह प्रदर्शनी देखी।
क्या पेलेग्रिनी पहले भी भारत आ चुके हैं?
हाँ, राष्ट्रपति पेलेग्रिनी इसी साल फरवरी 2025 में नई दिल्ली की यात्रा कर चुके हैं। मोदी की ब्रातिस्लावा यात्रा उसी बातचीत की अगली कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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