ब्रातिस्लावा में PM मोदी ने राष्ट्रपति पेलेग्रिनी से की मुलाकात, योग शिविर और पेंटिंग प्रदर्शनी में लिया हिस्सा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जून 2026 को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मुलाकात की और राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष योग शिविर में भाग लिया। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
योग शिविर और पेंटिंग प्रदर्शनी
राष्ट्रपति भवन में आयोजित योग शिविर में स्लोवाकिया के युवाओं ने PM मोदी और राष्ट्रपति पेलेग्रिनी की उपस्थिति में योगाभ्यास किया। शिविर के बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें उपहारों का आदान-प्रदान भी हुआ। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक पेंटिंग प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
राष्ट्रपति पेलेग्रिनी का संदेश
राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'आज स्लोवाकिया के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करके सम्मान महसूस हो रहा है। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली आधिकारिक यात्रा है।' उन्होंने मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी और इसे 'जनता के भरोसे, लगातार मेहनत और देश की सेवा का प्रतीक' बताया।
पेलेग्रिनी ने यह भी कहा कि फरवरी 2026 में नई दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद अब दोनों देश अपने सहयोग को नए स्तर पर ले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने व्यापार, नई तकनीक, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। राष्ट्रपति ने 30 से अधिक वर्षों पुराने राजनयिक संबंधों को एक 'व्यावहारिक और मजबूत साझेदारी' में बदलने की प्रतिबद्धता जताई।
स्लोवाकिया के PM फित्सो की सराहना
इससे पहले, स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो ने ब्रातिस्लावा में संयुक्त प्रेस वार्ता में PM मोदी के नेतृत्व की जमकर तारीफ की। उन्होंने मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवारत प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए कहा, 'लगातार 12 वर्षों तक इतने जटिल राजनीतिक माहौल में, जहाँ कई राजनीतिक दल हैं, नेतृत्व बनाए रखना किसी राजनीतिक चमत्कार से कम नहीं है।'
फित्सो ने भारत की आर्थिक प्रगति, डिजिटल बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में उपलब्धियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की प्रगति शानदार है। आप फ्रांस और जर्मनी जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों से भी आगे निकल गए हैं।'
द्विपक्षीय संबंधों का महत्व
गौरतलब है कि भारत और स्लोवाकिया के बीच राजनयिक संबंध 30 से अधिक वर्षों पुराने हैं, लेकिन उच्चतम स्तर की यात्राएँ अपेक्षाकृत कम रही हैं। यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब भारत यूरोपीय देशों के साथ व्यापार, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी साझेदारियाँ व्यापक बना रहा है। परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष सहयोग पर चर्चा इस यात्रा के रणनीतिक आयाम को रेखांकित करती है।
आगे क्या
दोनों देशों के बीच हुई चर्चाओं के आधार पर व्यापार और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में ठोस कदमों की उम्मीद जताई जा रही है। यह यात्रा भारत की व्यापक यूरोप-नीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ संबंधों को नई गति दी जा रही है।