PM मोदी का स्लोवाकिया दौरा संपन्न: 1993 के बाद पहली भारतीय PM यात्रा, रक्षा समझौते और सर्वोच्च नागरिक सम्मान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जून 2026 को स्लोवाकिया का अपना दो दिवसीय राजकीय दौरा सफलतापूर्वक पूरा किया — यह 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। इस दौरे में दोनों देशों ने एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते सहित कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए और भारत-स्लोवाकिया संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया।
एक्स पर PM मोदी का संदेश
दौरे के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "स्लोवाकिया की ऐतिहासिक और सकारात्मक यात्रा पूरी हो रही है। इस यात्रा के नतीजे हमारे देशों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने में बहुत काम आएंगे। मजबूत व्यापारिक संबंधों से हमारे युवाओं को बहुत फायदा होगा। इस गर्मजोशी के लिए स्लोवाकिया सरकार और लोगों का शुक्रिया।"
ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस से सम्मानित
दौरे की विशेष उपलब्धि के रूप में स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने प्रेसिडेंशियल पैलेस में प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस फर्स्ट क्लास' से नवाज़ा। विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि यह सम्मान बहुत कम विदेशी मेहमानों को दिया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह सम्मान भारत के 140 करोड़ नागरिकों और नई दिल्ली व ब्रातिस्लावा के बीच "गहरे होते दोस्ती के संबंधों" को समर्पित किया।
ऐतिहासिक महत्व और द्विपक्षीय समझौते
विदेश सचिव सिबी जॉर्ज ने पुष्टि की कि स्लोवाक प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के निमंत्रण पर आयोजित इस दौरे में प्रधानमंत्री मोदी का पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया गया। गौरतलब है कि यह 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद से किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा है, जो इस दौरे को कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस दौरे से भारत-स्लोवाकिया के संबंध व्यापक साझेदारी के स्तर तक विस्तृत हुए हैं, जिसमें रक्षा क्षेत्र में एक अहम समझौता भी शामिल है।
अगला पड़ाव: फ्रांस और जी7 शिखर सम्मेलन
स्लोवाकिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपने यूरोप दौरे के अंतिम चरण में फ्रांस के एवियन के लिए रवाना हो गए, जहाँ वे जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह यूरोपीय दौरा भारत की बहुआयामी विदेश नीति का हिस्सा है, जो पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में एक सुनियोजित कदम है।