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भारत-स्लोवाकिया ने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' का दर्जा दिया, 11 समझौतों पर हस्ताक्षर

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भारत-स्लोवाकिया ने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' का दर्जा दिया, 11 समझौतों पर हस्ताक्षर

सारांश

1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने ब्रातिस्लावा का दौरा किया — और यह यात्रा खाली हाथ नहीं लौटी। 11 समझौते, 'व्यापक साझेदारी' का दर्जा और स्लोवाकिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान — मोदी की यूरोप कूटनीति ने एक नया अध्याय लिखा।

मुख्य बातें

भारत और स्लोवाकिया ने 16 जून 2026 को द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' का दर्जा दिया।
प्रधानमंत्री मोदी की ब्रातिस्लावा यात्रा 1993 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है।
दोनों देशों के बीच 11 समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए।
स्लोवाक राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने मोदी को ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास) से सम्मानित किया।
स्लोवाकिया ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता और NSG में सदस्यता के लिए अपने समर्थन की पुनः पुष्टि की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रातिस्लावा यात्रा के दौरान 16 जून 2026 को भारत और स्लोवाकिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से 'व्यापक साझेदारी' का दर्जा दिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 11 समझौतों और समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ, जो रक्षा, व्यापार, तकनीक और संसदीय सहयोग सहित कई क्षेत्रों में नई रफ्तार देंगे।

ऐतिहासिक यात्रा का महत्व

1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद से यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक ब्रातिस्लावा कैसल में स्लोवाक प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की व्यापक वार्ता की। यह यात्रा यूरोप के साथ भारत की गहराती कूटनीतिक व्यस्तता की कड़ी में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

मोदी को स्लोवाकिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

स्लोवाक राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने प्रेसिडेंशियल पैलेस में प्रधानमंत्री मोदी को स्लोवाकिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान — ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास) — प्रदान किया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।

व्यापक साझेदारी के मुख्य बिंदु

विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने ब्रातिस्लावा में मीडिया को बताया, "संबंधों को एक व्यापक साझेदारी तक ले जाने से द्विपक्षीय संबंध एक नए स्तर पर पहुँचेंगे, मौजूदा सहयोग सिस्टम मजबूत होंगे और द्विपक्षीय और बहुपक्षीय, दोनों तरह से सहयोग को गहरा करने के नए रास्ते तलाशेंगे।" दोनों देशों ने उच्च-स्तरीय राजनीतिक संवाद को नियमित बनाने और संसदीय आदान-प्रदान बढ़ाने पर भी सहमति जताई।

भू-राजनीतिक और बहुपक्षीय सहयोग

दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बढ़ते भू-राजनीतिक महत्व को स्वीकार करते हुए नेविगेशन की स्वतंत्रता, खुले अंतरराष्ट्रीय व्यापार और नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। गौरतलब है कि दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यता विस्तार की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने UNSC में अपनी स्थायी सदस्यता के लिए स्लोवाकिया के निरंतर समर्थन की सराहना की। इसके अलावा, स्लोवाकिया ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत की सदस्यता के प्रति अपने रचनात्मक रुख की पुनः पुष्टि की।

आगे की राह

यह साझेदारी भारत की यूरोप-केंद्रित कूटनीति को और व्यापक आधार देती है। दोनों देशों ने वैश्विक मंचों पर विचारों के आदान-प्रदान और उम्मीदवारियों पर समन्वय जारी रखने पर सहमति जताई है। आने वाले महीनों में इस साझेदारी के तहत विभिन्न क्षेत्रों में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि 11 समझौते कागज़ से ज़मीन पर कब उतरते हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में बढ़ रहा है — स्लोवाकिया जैसे EU सदस्य देशों का समर्थन उस प्रक्रिया में कूटनीतिक पूंजी जोड़ता है। UNSC सुधार पर स्लोवाकिया का समर्थन नया नहीं है, लेकिन इसे 'व्यापक साझेदारी' दस्तावेज़ में औपचारिक रूप देना भारत की बहुपक्षीय रणनीति को मज़बूती देता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि स्लोवाकिया मध्य-पूर्वी यूरोप में भारत के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार बन सकता है — विशेषकर रक्षा और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के संदर्भ में।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-स्लोवाकिया 'व्यापक साझेदारी' क्या है?
यह 16 जून 2026 को प्रधानमंत्री मोदी की ब्रातिस्लावा यात्रा के दौरान दोनों देशों द्वारा अपने द्विपक्षीय संबंधों को दिया गया नया औपचारिक दर्जा है। इसका उद्देश्य व्यापार, रक्षा, तकनीक और संसदीय सहयोग सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करना है।
मोदी की ब्रातिस्लावा यात्रा ऐतिहासिक क्यों है?
1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद से यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है। इस यात्रा में 11 समझौते हुए और मोदी को स्लोवाकिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान — ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास) — प्रदान किया गया।
दोनों देशों के बीच कौन-से 11 समझौते हुए?
विदेश मंत्रालय ने 11 समझौतों और समझौता ज्ञापनों के आदान-प्रदान की पुष्टि की है, जो विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को रफ्तार देंगे। हालाँकि सभी समझौतों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
UNSC और NSG पर स्लोवाकिया का भारत के प्रति क्या रुख है?
स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपने निरंतर समर्थन की पुनः पुष्टि की है। साथ ही, न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत की सदस्यता के प्रति अपने रचनात्मक रुख को भी दोहराया है।
इस साझेदारी का हिंद-प्रशांत नीति से क्या संबंध है?
दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बढ़ते भू-राजनीतिक महत्व को स्वीकार किया और नेविगेशन की स्वतंत्रता तथा नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता जताई। यह भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति को यूरोपीय समर्थन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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