PM मोदी को स्लोवाकिया का सर्वोच्च सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस', विदेशी सम्मानों की संख्या हुई 33
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 16 जून 2025 को यूरोप दौरे के दौरान स्लोवाकिया की राष्ट्रपति ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस फर्स्ट क्लास' से नवाज़ा। यह किसी विदेशी देश द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को प्रदान किया गया 33वाँ सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान बताया।
ऐतिहासिक यात्रा का महत्व
स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद यह पहला अवसर है जब भारत का कोई प्रधानमंत्री या राष्ट्राध्यक्ष उस देश की आधिकारिक यात्रा पर पहुँचा है। इस दृष्टि से यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ती है। प्रधानमंत्री मोदी इन दिनों यूरोप दौरे पर हैं और जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के क्रम में स्लोवाकिया भी पहुँचे।
संबित पात्रा की प्रतिक्रिया
BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं हमेशा यह कहते आए हैं कि उन्हें मिलने वाला कोई भी सर्वोच्च नागरिक सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान होता है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों से परे, जब भारत के प्रधानमंत्री को इस प्रकार का अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलता है तो यह समूचे राष्ट्र का गौरव है।
पात्रा ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री मोदी देश के सबसे लंबे समय तक सेवारत निर्वाचित प्रधानमंत्री बन चुके हैं और पिछले 12 वर्षों में उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार ने विकास, विश्वास और जनकल्याण के मंत्र के साथ कार्य किया है।
वैश्विक मान्यता का संदर्भ
उनके अनुसार, विभिन्न देशों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को मिले सम्मान उनके विकास कार्यों, वैश्विक स्तर पर अर्जित विश्वसनीयता और गरीब कल्याण के प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति के प्रतीक हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अनेक चुनौतियाँ और अस्थिरताएँ विद्यमान हैं, और भारत की भूमिका को विश्व समुदाय तेज़ी से स्वीकार कर रहा है।
आगे की दिशा
स्लोवाकिया के इस सर्वोच्च सम्मान के साथ भारत-स्लोवाकिया संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक सहयोग के नए आयाम खोल सकती है। गौरतलब है कि यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में यूरोप के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।