PM मोदी की स्लोवाकिया यात्रा पर राष्ट्रपति पेलेग्रिनी उत्साहित, भारत-स्लोवाकिया सहयोग के नए द्वार खुलेंगे
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जून 2026 से फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर रवाना हुए हैं। स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने इस ऐतिहासिक दौरे पर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के नए रास्ते खोलेगी। उल्लेखनीय है कि मोदी 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद वहाँ आधिकारिक यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे।
राष्ट्रपति पेलेग्रिनी का स्वागत संदेश
राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मैं सोमवार को ब्रातिस्लावा में आपका स्वागत करने के लिए उत्सुक हूँ। आपकी ऐतिहासिक यात्रा नई दिल्ली से हमारी अच्छी बातचीत को आगे बढ़ाएगी और स्लोवाकिया-भारत सहयोग के लिए नए मौके खोलेगी।' यह संदेश दोनों देशों के बीच बढ़ती राजनयिक निकटता का संकेत है।
यात्रा का कार्यक्रम और उद्देश्य
प्रधानमंत्री मोदी 13 से 18 जून 2026 तक यूरोप प्रवास पर हैं। वह फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर फ्रांस और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के बुलावे पर स्लोवाकिया जा रहे हैं। नीस में 14 जून 2026 को वह राष्ट्रपति मैक्रों के साथ मिलकर 'भारत इनोवेट्स 2026' कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।
भारत-फ्रांस संबंधों की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि फरवरी 2026 में राष्ट्रपति मैक्रों भारत दौरे पर आए थे और एआई शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। उस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ऊँचा उठाने पर सहमति जताई थी। अब नीस में होने वाली बैठक में फरवरी से हुई प्रगति की समीक्षा होगी और आगे की रूपरेखा तय की जाएगी।
स्लोवाकिया दौरे का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में कहा, 'मैं ब्रातिस्लावा में राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ बातचीत करने का इंतजार कर रहा हूँ। मुझे स्लोवाक बिजनेस लीडर्स से बातचीत करने का भी मौका मिलेगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह दौरा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की गति को आगे बढ़ाते हुए यूरोपीय संघ के साथ रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करेगा, जिसका स्लोवाकिया एक महत्वपूर्ण सदस्य है।
आगे की राह
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी यूरोप नीति को नई ऊर्जा देने की कोशिश कर रहा है। ब्रातिस्लावा में होने वाली बैठकें व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग के नए अध्यायों की शुरुआत कर सकती हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह संवाद भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।