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पीएम मोदी की ऐतिहासिक स्लोवाकिया यात्रा: 1993 के बाद पहली बार, सीईओ से मुलाकात और व्यापार-निवेश पर फोकस

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पीएम मोदी की ऐतिहासिक स्लोवाकिया यात्रा: 1993 के बाद पहली बार, सीईओ से मुलाकात और व्यापार-निवेश पर फोकस

सारांश

तीन दशक से अधिक के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का स्लोवाकिया दौरा महज़ एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं — यह ऑटोमोबाइल, रेलवे और प्रौद्योगिकी में निवेश के नए द्वार खोलने की कोशिश है। स्लोवाकिया की इंडो-पैसिफिक रणनीति के साथ यह यात्रा भारत-यूरोप संबंधों को नई दिशा दे सकती है।

मुख्य बातें

पीएम नरेंद्र मोदी 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद देश का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।
मोदी ब्रातिस्लावा में प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मुलाकात करेंगे।
ऑटोमोबाइल निर्माण , रेलवे अवसंरचना और निवेश विस्तार पर चर्चा होने की संभावना; स्लोवाकिया के बड़े कंपनियों के सीईओ से भी बैठक।
पिछले तीन वर्षों में पाँच स्लोवाक व्यापारिक समूह भारत का दौरा कर चुके हैं।
स्लोवाकिया ने दिसंबर 2025 में इंडो-पैसिफिक रणनीति लॉन्च की, जिसमें भारत को केंद्रीय भूमिका।
स्लोवाकिया के बाद मोदी 16-17 जून को जी7 शिखर सम्मेलन (एवियन, फ्रांस) और 18 जून को पेरिस जाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार, 15 जून 2025 को स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर रवाना हुए — यह 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है। यह दौरा स्लोवाकियाई प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के निमंत्रण पर हो रहा है और इसे दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक एवं औद्योगिक संबंधों को नई ऊँचाई देने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

ब्रातिस्लावा में प्रधानमंत्री मोदी अपने समकक्ष रॉबर्ट फिको के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे और स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से भी मुलाकात करेंगे। दोनों पक्षों के बीच ऑटोमोबाइल निर्माण, रेलवे अवसंरचना, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।

इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया की कई बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से भी मुलाकात करेंगे, जो भारत में निवेश की संभावनाएँ तलाश रही हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले तीन वर्षों में पाँच बड़े स्लोवाक व्यापारिक समूह भारत का दौरा कर चुके हैं।

राजदूत का बयान

स्लोवाकिया में भारत की राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने इस यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, 'यह एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण यात्रा है। 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। यह यात्रा न केवल हमारे राजनीतिक संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क भी बढ़ाएगी।'

विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि यह यात्रा 'विभिन्न क्षेत्रों में स्लोवाकिया के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराएगी।'

स्लोवाकिया की इंडो-पैसिफिक रणनीति और भारत की भूमिका

राजदूत श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि स्लोवाकिया ने दिसंबर 2025 में अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति शुरू की है, जिसमें व्यापार, प्रौद्योगिकी और राजनीतिक संबंधों को प्राथमिकता दी गई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत यूरोपीय देशों के साथ अपनी साझेदारी को व्यापक आधार देने में जुटा है। गौरतलब है कि स्लोवाकिया यूरोपीय संघ का सदस्य है, जो इस द्विपक्षीय संबंध को रणनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

यात्रा से पहले राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मैं सोमवार को ब्रातिस्लावा में आपका स्वागत करने के लिए उत्सुक हूँ। आपकी यह ऐतिहासिक यात्रा नई दिल्ली में हुई हमारी सकारात्मक बातचीत को आगे बढ़ाएगी और स्लोवाकिया-भारत सहयोग के नए अवसर खोलेगी।'

यूरोप दौरे का व्यापक कार्यक्रम

स्लोवाकिया के बाद प्रधानमंत्री मोदी 16-17 जून को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जहाँ वे जी7 देशों के नेताओं, आमंत्रित साझेदार देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। 18 जून को वे पेरिस पहुँचेंगे, जहाँ द्विपक्षीय बैठकों के साथ-साथ यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी एवं स्टार्टअप कार्यक्रम में भी उनकी भागीदारी अपेक्षित है। इसके अलावा, पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करने की भी संभावना बताई जा रही है।

यह यूरोप यात्रा भारत की बहुआयामी विदेश नीति को रेखांकित करती है — एक ओर ऐतिहासिक द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्जीवित करना, दूसरी ओर वैश्विक मंचों पर भारत की उपस्थिति को और सशक्त बनाना।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर तब जब यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत जारी है। स्लोवाकिया का ऑटोमोबाइल क्षेत्र — जो यूरोप में प्रति व्यक्ति सर्वाधिक कारें बनाता है — भारतीय सप्लाई चेन के लिए स्वाभाविक साझेदार हो सकता है। लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या सीईओ बैठकें ठोस निवेश प्रतिबद्धताओं में बदलती हैं, या केवल इरादों की घोषणाओं तक सिमट जाती हैं — जो अक्सर राजकीय यात्राओं की नियति बनती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी की स्लोवाकिया यात्रा ऐतिहासिक क्यों मानी जा रही है?
1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद से यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली राजकीय यात्रा है। तीन दशकों के अंतराल को देखते हुए यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
मोदी स्लोवाकिया में किन नेताओं से मिलेंगे?
प्रधानमंत्री मोदी ब्रातिस्लावा में स्लोवाकियाई प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा, स्लोवाकिया की बड़ी कंपनियों के सीईओ से भी बैठक होगी।
भारत और स्लोवाकिया के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग की संभावना है?
दोनों देशों के बीच ऑटोमोबाइल निर्माण, रेलवे अवसंरचना, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर चर्चा होने की संभावना है। स्लोवाकिया की इंडो-पैसिफिक रणनीति में व्यापार और प्रौद्योगिकी को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
स्लोवाकिया के बाद पीएम मोदी का यूरोप दौरे का क्या कार्यक्रम है?
स्लोवाकिया यात्रा के बाद मोदी 16-17 जून को फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और 18 जून को पेरिस जाएंगे, जहाँ द्विपक्षीय बैठकों के साथ-साथ यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी एवं स्टार्टअप कार्यक्रम में भी उनकी भागीदारी अपेक्षित है।
स्लोवाकिया की इंडो-पैसिफिक रणनीति का भारत से क्या संबंध है?
स्लोवाकिया ने दिसंबर 2025 में अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति लॉन्च की, जिसमें व्यापार, प्रौद्योगिकी और राजनीतिक संबंधों को प्राथमिकता दी गई है। भारत इस रणनीति में एक प्रमुख साझेदार के रूप में उभर सकता है, जो इस यात्रा को कूटनीतिक दृष्टि से और महत्वपूर्ण बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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