PM मोदी की स्लोवाकिया यात्रा 14-16 जून: राजदूत मैक्सियन बोले, 'यह ऐतिहासिक पल है'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर जाएंगे — और भारत में स्लोवाकिया के राजदूत रॉबर्ट मैक्सियन इसे एक ऐतिहासिक अवसर बता रहे हैं। स्लोवाक प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा इसलिए विशेष है क्योंकि 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद से किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी।
राजदूत का बयान: 'मील का पत्थर साबित होगी यह यात्रा'
राजदूत मैक्सियन ने इस यात्रा को 'लैंडमार्क मोमेंट' करार दिया। उन्होंने कहा, 'अब तक भारत और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्रियों की कभी मुलाकात नहीं हुई है, ऐसे में यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाली साबित होगी।' उनके अनुसार स्लोवाकिया इस क्षण का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि
राजदूत मैक्सियन ने उस कूटनीतिक नींव का उल्लेख किया जिस पर यह यात्रा टिकी है। उन्होंने कहा, 'दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय राजनीतिक संवाद पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है।' इसकी शुरुआत 2022 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की स्लोवाकिया यात्रा से हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच कई मुलाकातें हुईं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अप्रैल 2022 में स्लोवाकिया का दौरा किया था, जबकि स्लोवाक राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी इसी वर्ष फरवरी में एआई शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आए थे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-यूरोप संबंध व्यापार और प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर नई गहराई पकड़ रहे हैं।
संभावित समझौते और सहयोग के क्षेत्र
राजदूत मैक्सियन के अनुसार, 15 जून को होने वाली बैठक में निवेश, व्यापार, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्टूडेंट एक्सचेंज और श्रम गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने संकेत दिया कि इस दौरान कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, हालांकि उन्होंने इनके विवरण को फिलहाल गोपनीय रखा।
व्यावसायिक संबंधों पर जोर
राजदूत ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों की कंपनियों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों को और अधिक निकटता से काम करने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यूरोपीय संघ की लगभग 6,000 कंपनियाँ भारत में सक्रिय हैं और स्लोवाकिया भी भारत में अपनी व्यावसायिक उपस्थिति बढ़ाना चाहता है।
यात्रा का कार्यक्रम
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अपने स्लोवाक समकक्ष रॉबर्ट फिको के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और राष्ट्रपति पेलेग्रिनी से भी मुलाकात करेंगे। भारत के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि इस दौरे से दोनों देशों के संबंध और अधिक सुदृढ़ होंगे। गौरतलब है कि यह यात्रा भारत की यूरोप के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेगी।