भारत-स्लोवाकिया रक्षा समझौते पर चर्चा तेज, PM मोदी का ऐतिहासिक पहला द्विपक्षीय दौरा
सारांश
मुख्य बातें
स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भारत की राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने 13 जून 2026 को पुष्टि की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आने वाले हैं — यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का स्लोवाकिया में पहला द्विपक्षीय दौरा होगा। राजदूत ने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में एक व्यापक समझौते पर सक्रिय चर्चा जारी है और इस यात्रा के दौरान कोई बड़ा ऐलान संभव है।
ऐतिहासिक दौरे का महत्व
राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने कहा, "इस यात्रा से न केवल हमारे राजनीतिक संबंध सुदृढ़ होंगे, बल्कि हमारे आर्थिक, रक्षा और लोगों के बीच जुड़ाव के भी मजबूत होने की बहुत आशाएं हैं। क्वांटम, एआई, शिक्षा के क्षेत्र में हमारे सहयोग के नए आयाम खुलेंगे।" यह दौरा भारत-यूरोप कूटनीतिक संबंधों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आर्थिक संबंधों में तेज उछाल
राजदूत ने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2024 में पहली बार द्विपक्षीय व्यापार ने 1 बिलियन यूरो का आँकड़ा पार किया, और 2025 में यह बढ़कर 1.6 बिलियन यूरो हो गया। ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और मोबाइल जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में सहयोग जारी है। टाटा मोटर्स के जगुआर लैंड रोवर का भी स्लोवाकिया में निवेश है। गौरतलब है कि ग्रीन वॉटर टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी सहयोग की व्यापक संभावनाएं देखी जा रही हैं।
रक्षा सहयोग: नया अध्याय
रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के संबंधों पर राजदूत ने कहा कि पूर्व चेकोस्लोवाकिया के समय से भारत के साथ रक्षा सहयोग की मजबूत नींव रही है। 1995 के भारत-स्लोवाकिया रक्षा समझौते के अतिरिक्त, अब एक व्यापक रक्षा समझौते पर वार्ता चल रही है। उन्होंने संकेत दिया कि पीएम मोदी की यात्रा के दौरान इस संदर्भ में कोई ठोस घोषणा हो सकती है। ग्रैंड पावर ने पहले ही रक्षा क्षेत्र में कोयंबटूर में परिचालन शुरू कर दिया है।
मेक इन इंडिया में स्लोवाकिया की भूमिका
पीएम मोदी स्लोवाकिया की कई प्रमुख कंपनियों के सीईओ से मुलाकात करेंगे। स्लोवाकिया की कंपनी टाट्रा वैगोन्का पॉप्राड ने ओडिशा में निवेश की घोषणा की है, जबकि उत्तर प्रदेश में एनवीएन समूह का एक बायोएथनॉल फ्यूल प्लांट स्थापित है। पिछले तीन वर्षों में लगभग 5 बड़े स्लोवाक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भारत यात्रा कर चुके हैं। राजदूत को उम्मीद है कि पीएम मोदी से मुलाकात के बाद और कंपनियाँ भारत में निवेश के लिए प्रेरित होंगी।
आगे की राह
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी 'मेक इन इंडिया' और रक्षा आत्मनिर्भरता नीतियों के तहत यूरोपीय भागीदारों के साथ संबंध गहरे कर रहा है। रक्षा व्यापक समझौते की घोषणा, यदि होती है, तो यह दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग को नई दिशा देगी।