स्लोवाकिया भारत के बाज़ार और स्टार्टअप इकोनॉमी से उत्साहित, राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने बताया EU-FTA का रास्ता
सारांश
मुख्य बातें
स्लोवाकिया में भारत की राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने 13 जून 2026 को ब्रातिस्लावा से बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी दो दिवसीय स्लोवाकिया दौरे से पहले स्लोवाकिया भारत के साथ साझेदारी के लिए पूरी तरह उत्साहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्लोवाकिया भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (EU-FTA) का प्रवेश द्वार बन सकता है।
स्लोवाकिया क्यों है भारत के लिए रणनीतिक द्वार
राजदूत श्रीवास्तव ने कहा, "स्लोवाकिया मध्य यूरोप का महत्वपूर्ण देश है। अगर आप इसे जगह देते हैं, तो भारतीय कंपनियों के लिए यह 'गेटवे टू यूरोप' की तरह भी महत्वपूर्ण है। यहाँ की तकनीक हमारे लिए बहुत ज़रूरी है। EU-FTA की वजह से संभावनाएँ अपार हैं। सहयोग के लिए क्षेत्र खुल गए हैं।" उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की पहचान और उसकी जीवंत स्टार्टअप इकोनॉमी ही स्लोवाकिया को भारत के करीब खींच रही है।
भारत की वैश्विक भूमिका पर स्लोवाकिया का नज़रिया
राजदूत ने बताया कि स्लोवाकिया भारत को गहरे सम्मान से देखता है और यह स्वीकार करता है कि भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा, "हमारा बाज़ार और स्टार्टअप इकोनॉमी — इसी वजह से स्लोवाकिया हमारे साथ साझेदारी करने के लिए उत्सुक है।" यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी उपस्थिति तेज़ी से बढ़ा रहा है।
हिंद-प्रशांत रणनीति में भारत की बड़ी भूमिका
गौरतलब है कि स्लोवाकिया ने दिसंबर 2025 में अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति लॉन्च की थी, जिसमें व्यापार, तकनीक और राजनीतिक संबंधों को प्राथमिकता दी गई है। राजदूत श्रीवास्तव के अनुसार, इस रणनीति में भारत की भूमिका केंद्रीय है। यह इस बात का संकेत है कि यूरोपीय देश भी अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को एक अपरिहार्य साझेदार मान रहे हैं।
स्लोवाकिया में भारतीय समुदाय और शैक्षणिक सहयोग
राजदूत ने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में स्लोवाकिया में भारतीय समुदाय की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में लगभग 11,000 भारतीय वहाँ निवास कर रहे हैं, जिनमें 500 के करीब भारतीय छात्र विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हैं। उन्होंने बताया कि स्लोवाकियाई विश्वविद्यालय भारतीय संस्थानों के साथ संस्थागत सहयोग में गहरी रुचि दिखा रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान होने वाली घोषणाओं में इस सहयोग को औपचारिक रूप दिए जाने की उम्मीद है।
योग और आयुर्वेद से बन रहा सांस्कृतिक सेतु
सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा करते हुए राजदूत श्रीवास्तव ने बताया कि स्लोवाकिया में योग और आयुर्वेद का व्यापक प्रचलन है — थोड़ी-थोड़ी दूरी पर योग स्टूडियो मिलते हैं। आयुर्वेद के लिए स्लोवाक नागरिक भारत के केरल तक जाते हैं। उन्होंने बताया कि स्लोवाकिया की पारंपरिक वॉटर थेरेपी के साथ आयुर्वेद को जोड़कर काम किया जा रहा है, जिसमें आगे और विस्तार की भरपूर संभावनाएँ हैं। भारतीय खाना भी वहाँ तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-स्लोवाकिया संबंधों को एक नई ऊँचाई देने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकती है, जहाँ व्यापार, तकनीक, शिक्षा और संस्कृति — सभी मोर्चों पर साझेदारी को संस्थागत रूप मिलने की उम्मीद है।