13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स 2026: दो दिन की चर्चा से उद्योग जगत को मिला वित्तीय गवर्नेंस का एक्शन प्लान

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ब्रिक्स 2026: दो दिन की चर्चा से उद्योग जगत को मिला वित्तीय गवर्नेंस का एक्शन प्लान

सारांश

ब्रिक्स 2026 के साइडलाइन में जुटे वैश्विक उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि दो दिनों की बातचीत ने वित्तीय जोखिम कम करने और गवर्नेंस सुधारने का ठोस रोडमैप दिया। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस सम्मेलन में दुनिया की 70% आबादी और 60% अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करने वाले देश शामिल हैं।

मुख्य बातें

ब्रिक्स 2026 की दो दिवसीय चर्चा से उद्योग प्रतिनिधियों को वित्तीय जोखिम कम करने और गवर्नेंस सुधारने का एक्शन प्लान तैयार करने में मदद मिली।
फिड्यूशरी के सीईओ निकोलस एराकोस सिम ने कहा कि कैपिटल मार्केट की अस्थिरता के बीच यह मंच बेहद उपयोगी साबित हुआ।
चिप रोज (रोजर्स कैपिटल कंसल्टिंग) ने कहा कि यहाँ वैश्विक वित्तीय लेन-देन को अधिक सुलभ और खुला बनाने पर व्यावहारिक चर्चा हुई।
भूपेश नागराजन (आईब्रिक्स 2026 को-कन्वेनर) ने बताया कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की 70% आबादी और 60% अर्थव्यवस्था समाहित है।
भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और नीति-निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन के साइडलाइन में जुटे उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने 13 सितंबर 2026 को कहा कि दो दिनों की गहन चर्चा ने उन्हें एक ऐसा ठोस एक्शन प्लान तैयार करने में मदद दी है, जिससे मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल में वित्तीय जोखिम को कम किया जा सके और एसेट व लिक्विडिटी के बंटवारे में गवर्नेंस के मानकों को मज़बूत किया जा सके। नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों के नीति-निर्माता और वैश्विक कारोबारी प्रतिनिधि एक साथ एकत्रित हुए।

उद्योग प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

हांगकांग की कंपनी फिड्यूशरी के को-फाउंडर और सीईओ निकोलस एराकोस सिम ने कहा, 'मेरे लिए ब्रिक्स का अनुभव बहुत ही फायदेमंद रहा है। कैपिटल मार्केट के लिए आज का दौर बहुत उतार-चढ़ाव वाला है, इसलिए हम यह कोशिश कर रहे हैं कि रिस्क को कैसे कम किया जाए और साथ ही एसेट और लिक्विडिटी के बंटवारे में गवर्नेंस के स्टैंडर्ड्स को कैसे बेहतर बनाया जाए। इन दो दिनों में हुई बातचीत से हमें इस पर एक्शन प्लान बनाने में बहुत मदद मिली है।'

रोजर्स कैपिटल कंसल्टिंग के प्रेसिडेंट और सीईओ तथा कम्युनिटी लीडर्स ऑफ अमेरिका के बोर्ड मेंबर चिप रोज ने कहा कि यहाँ केवल संभावनाओं पर विचार नहीं किया गया, बल्कि उन्हें ज़मीन पर उतारने के तरीकों पर भी बातचीत हुई।

वैश्विक वित्तीय लेन-देन को खुला बनाने पर ज़ोर

चिप रोज ने कहा, 'यहाँ बहुत से समझदार लोग हैं जो असल में समाधान का हिस्सा हैं। वे सिर्फ बैठकर यह बात नहीं कर रहे कि क्या हो सकता है, बल्कि इस पर चर्चा कर रहे हैं कि इसे हकीकत में बदलने के लिए वे क्या कर रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर — तीनों क्षेत्रों के प्रतिनिधि एक ही मकसद के साथ यहाँ आए हैं: दुनिया भर में वित्तीय लेन-देन को और अधिक सुलभ व खुला बनाना, ताकि किसी भी देश का उपभोक्ता इसका लाभ उठा सके।

भारत की अध्यक्षता और ब्रिक्स की वैश्विक अहमियत

आईब्रिक्स 2026 के को-कन्वेनर और फिक्की (FICCI), तमिलनाडु के को-चेयर भूपेश नागराजन ने कहा कि इस वर्ष भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता विशेष महत्त्व रखती है। उन्होंने बताया कि दुनिया की 70 प्रतिशत आबादी ब्रिक्स और उससे संबद्ध देशों में निवास करती है, जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था का 60 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों में केंद्रित है। नागराजन ने कहा, 'भारत इसकी अगुवाई कर रहा है और सभी नेता यहाँ मौजूद हैं। वे अपने-अपने देशों और हमारे देश के लिए अच्छा काम कर रहे हैं।'

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कैपिटल मार्केट भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों में अनिश्चितता के बीच दबाव में है। ब्रिक्स मंच पर तैयार किए गए इस एक्शन प्लान को अब नीतिगत स्तर पर आगे बढ़ाने की उम्मीद है, क्योंकि सम्मेलन में शामिल अधिकांश प्रतिनिधि अपने-अपने देशों में वित्तीय नीति-निर्माण से सीधे जुड़े हैं। सम्मेलन के नतीजे आने वाले महीनों में ब्रिक्स देशों की वित्तीय सहयोग रणनीति को नया आकार दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी क्रियान्वयन का रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है। इस बार उद्योग प्रतिनिधियों का उत्साह वास्तविक लगता है, खासकर जब वैश्विक कैपिटल मार्केट दबाव में हैं। असली परीक्षा यह है कि नई दिल्ली में हुई चर्चाएँ किस हद तक बाध्यकारी नीतिगत प्रतिबद्धताओं में तब्दील होती हैं। दुनिया की 70% आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला यह मंच क्षमता में बड़ा है, लेकिन आंतरिक मतभेदों और डॉलर-आधारित वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की जड़ता के बीच 'गवर्नेंस सुधार' को व्यवहार में बदलना आसान नहीं होगा।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स 2026 में उद्योग जगत को क्या हासिल हुआ?
ब्रिक्स 2026 की दो दिवसीय चर्चाओं से उद्योग प्रतिनिधियों को वित्तीय जोखिम कम करने और एसेट व लिक्विडिटी के बंटवारे में गवर्नेंस मानक सुधारने का एक्शन प्लान तैयार करने में मदद मिली। यह सम्मेलन नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
ब्रिक्स 2026 में किन प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया?
सम्मेलन में फिड्यूशरी (हांगकांग) के सीईओ निकोलस एराकोस सिम, रोजर्स कैपिटल कंसल्टिंग के सीईओ चिप रोज, और आईब्रिक्स 2026 के को-कन्वेनर व FICCI तमिलनाडु के को-चेयर भूपेश नागराजन समेत वित्त, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढाँचे से जुड़े वैश्विक प्रतिनिधि शामिल हुए।
ब्रिक्स देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में कितनी हिस्सेदारी है?
भूपेश नागराजन के अनुसार, ब्रिक्स और उससे संबद्ध देशों में दुनिया की 70 प्रतिशत आबादी निवास करती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था का 60 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों में केंद्रित है। यही कारण है कि इस मंच पर लिए जाने वाले नीतिगत फैसले वैश्विक महत्त्व रखते हैं।
ब्रिक्स 2026 में वैश्विक वित्तीय लेन-देन पर क्या चर्चा हुई?
प्रतिनिधियों ने वैश्विक वित्तीय लेन-देन को अधिक सुलभ और खुला बनाने पर व्यावहारिक विचार-विमर्श किया, ताकि दुनिया में कहीं भी कोई भी उपभोक्ता इसका लाभ उठा सके। चिप रोज ने कहा कि यहाँ केवल संभावनाओं पर नहीं, बल्कि क्रियान्वयन के तरीकों पर बात हुई।
2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कौन कर रहा है?
वर्ष 2026 में भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। नई दिल्ली में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में सदस्य और सहयोगी देशों के नीति-निर्माता व उद्योग जगत के प्रतिनिधि एकत्रित हुए।
राष्ट्र प्रेस
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