13 सितंबर 2026
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सिकंदराबाद आर्मरी डकैती: पूर्व सैनिक मल्लेश 7 दिन की पुलिस कस्टडी में, एनआईए से भी होगी जानकारी साझा

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सिकंदराबाद आर्मरी डकैती: पूर्व सैनिक मल्लेश 7 दिन की पुलिस कस्टडी में, एनआईए से भी होगी जानकारी साझा

सारांश

सिकंदराबाद कैंटोनमेंट के आर्मरी से एके-203 राइफलें और सैकड़ों राउंड गोला-बारूद चुराने के आरोपी पूर्व सैनिक मल्लेश को 7 दिन की पुलिस कस्टडी मिली। जाँच का दायरा अब एनआईए तक पहुँचा — सवाल यह है कि क्या वह अकेला था या कोई बड़ा नेटवर्क था।

मुख्य बातें

सिकंदराबाद की अदालत ने पूर्व आर्मी एनसीओ उप्पुथौला मल्लेश को 7 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा।
कथित चोरी 30-31 अगस्त 2026 की रात, बोलारम स्थित 20 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के आर्मरी से हुई।
बरामद सामग्री में 4 एके-203 राइफलें, 6 पिस्टल, 1 इंसास राइफल और 1,900 से अधिक राउंड गोला-बारूद शामिल।
मल्लेश 30 जून 2026 को अनुशासनहीनता के आधार पर सेना से पृथक हुआ था; कथित मकसद असमय रिटायरमेंट से असंतोष।
तेलंगाना पुलिस पूछताछ की जानकारी एनआईए और सेना अधिकारियों के साथ साझा करेगी।
डीजीपी सीवी आनंद के अनुसार प्रारंभ में अपराध अकेले किया गया, लेकिन दूसरों की संभावित भूमिका की जाँच जारी।

तेलंगाना के सिकंदराबाद की एक अदालत ने पूर्व आर्मी एनसीओ उप्पुथौला मल्लेश को बोलारम स्थित 20 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के आर्मरी से हथियार और गोला-बारूद की चोरी के मामले में 7 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। जाँच एजेंसियाँ सोमवार को आरोपी को कस्टडी में लेकर विस्तृत पूछताछ करेंगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस मामले में और लोग शामिल थे।

मुख्य घटनाक्रम

37 वर्षीय मल्लेश ने कथित तौर पर 30 और 31 अगस्त 2026 की रात को यह चोरी की थी। बोलारम पुलिस ने हैदराबाद टास्क फोर्स और एसओटी मलकाजगिरी कमिश्नरेट के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान में 11 सितंबर 2026 को मल्लेश की गिरफ्तारी की घोषणा की थी। उसी दिन उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजकर चंचलगुडा सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया था।

गिरफ्तारी के बाद प्रारंभिक पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर जाँचकर्ता अब मल्लेश से और गहराई से पूछताछ करेंगे। रिपोर्टों के अनुसार, तेलंगाना पुलिस इस पूछताछ में प्राप्त जानकारी को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साझा करेगी।

चोरी की योजना और क्रियान्वयन

जाँच में सामने आया है कि मल्लेश ने 27, 28 और 29 अगस्त को हथियार भंडार की रेकी की थी। 30 अगस्त की रात उसने आर्मरी का ताला तोड़ा, चुराए गए हथियार और गोला-बारूद पहले अपनी बाइक पर ले गया और बाद में कार से नागरकुरनूल जिले अपने घर के पास छिपा दिए।

पुलिस के अनुसार, 27 अगस्त से वारदात तक मल्लेश का आचरण संदिग्ध था और उसके बयानों में विसंगतियाँ पाई गईं, जिससे जाँचकर्ताओं का ध्यान उस पर गया। वह नागरकुरनूल जिले के जंगारेड्डीपल्ले गाँव का मूल निवासी है और सिकंदराबाद कैंटोनमेंट के बालाजीनगर में परिवार के साथ रह रहा था।

बरामद हथियारों का जखीरा

तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक सीवी आनंद ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि चुराए गए हथियारों और गोला-बारूद का पूरा जखीरा बरामद कर लिया गया है। बरामद सामग्री में शामिल हैं:

चार एके-203 असॉल्ट राइफलें और पाँच मैगजीन, एक इंसास राइफल और तीन मैगजीन, छह 9 एमएम पिस्टल और 12 मैगजीन, एक सिविल 6.35-बोर पिस्टल और एक मैगजीन, एक पैसिव नाइट-विजन दूरबीन, 9 एमएम पिस्टल के 1,156 राउंड गोला-बारूद, एके-203 के 720 राउंड, तथा 5.56 एमएम इंसास के 11 बॉल, 5 ट्रेसर और 20 खाली राउंड

आरोपी की पृष्ठभूमि और कथित मकसद

मल्लेश 2010 में भारतीय सेना में शामिल हुआ था और 16 वर्षों की सेवा के बाद 30 जून 2026 को अनुशासनहीनता और खराब स्वास्थ्य के आधार पर सेवा से पृथक किया गया था। डीजीपी के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में चोरी के पीछे कथित मकसद सेवा से समय से पहले रिटायरमेंट से असंतोष लग रहा है।

डीजीपी सीवी आनंद ने यह भी कहा था कि पहली नज़र में यह अपराध मल्लेश ने अकेले किया है, हालाँकि पुलिस दूसरों की संभावित भूमिका की जाँच जारी रखे हुए है। पुलिस कस्टडी के दौरान जाँचकर्ता यह जानने का प्रयास करेंगे कि क्या किसी ने उसकी सहायता की थी और क्या हथियार किसी अन्य व्यक्ति को सौंपे गए थे।

आगे की जाँच और एनआईए की भूमिका

यह मामला अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि इसमें सेना के आर्मरी से सैन्य श्रेणी के स्वचालित हथियार चोरी हुए हैं। एनआईए और सेना अधिकारियों को जानकारी साझा किए जाने के संकेत बताते हैं कि केंद्रीय एजेंसियाँ इस मामले में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। 7 दिन की पुलिस कस्टडी पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई का फैसला जाँच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

आंतरिक सुरक्षा की खामियों का प्रश्न है। डीजीपी का यह बयान कि 'अकेले ने किया', जाँच पूरी होने से पहले ही निष्कर्ष जैसा लगता है। असली परीक्षण यह है कि आर्मरी में घुसपैठ तीन दिन की रेकी के बावजूद कैसे संभव हुई और सुरक्षा प्रोटोकॉल कहाँ चूके — जिसका जवाब केवल एनआईए और सेना की संयुक्त जाँच दे सकती है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिकंदराबाद आर्मरी चोरी मामला क्या है?
यह मामला बोलारम स्थित 20 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के आर्मरी से 30-31 अगस्त 2026 की रात हथियार और गोला-बारूद चुराने का है। आरोपी पूर्व सैनिक उप्पुथौला मल्लेश ने कथित तौर पर एके-203 राइफलें, पिस्टल और 1,900 से अधिक राउंड गोला-बारूद चुराए थे।
उप्पुथौला मल्लेश कौन है और उसे कब गिरफ्तार किया गया?
मल्लेश नागरकुरनूल जिले का 37 वर्षीय पूर्व आर्मी एनसीओ है जो 2010 से 2026 तक सेना में रहा। उसे 11 सितंबर 2026 को बोलारम पुलिस, हैदराबाद टास्क फोर्स और एसओटी मलकाजगिरी के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया।
चोरी के पीछे क्या मकसद बताया जा रहा है?
डीजीपी सीवी आनंद के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में कथित मकसद सेवा से समय से पहले रिटायरमेंट से असंतोष लग रहा है। मल्लेश को 30 जून 2026 को अनुशासनहीनता और खराब स्वास्थ्य के आधार पर सेना से पृथक किया गया था।
इस मामले में एनआईए की क्या भूमिका होगी?
तेलंगाना पुलिस पूछताछ के दौरान प्राप्त जानकारी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और सेना अधिकारियों के साथ साझा करेगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियाँ आगे की जाँच में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।
क्या सभी चुराए गए हथियार बरामद हो गए हैं?
हाँ, डीजीपी सीवी आनंद ने पुष्टि की है कि 20 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के कोटे और मैगजीन से चुराए गए हथियारों और गोला-बारूद का पूरा जखीरा बरामद कर लिया गया है। मल्लेश ने सामान नागरकुरनूल जिले में अपने घर के पास छिपाया था।
राष्ट्र प्रेस
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