भांगर बम विस्फोट: पूर्व टीएमसी विधायक शौकत मोल्ला 14 दिन की एनआईए हिरासत में, 19 जून को अगली पेशी
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता की विशेष एनआईए अदालत ने शनिवार, 7 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर में विधानसभा चुनाव से पहले हुए बम विस्फोट मामले में गिरफ्तार पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक शौकत मोल्ला को 14 दिनों की एनआईए हिरासत में भेजने का आदेश दिया। उन्हें अब 19 जून को पुनः अदालत में पेश किया जाएगा।
गिरफ्तारी और बरामदगी
शुक्रवार रात गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शौकत मोल्ला के कब्जे से एक मोबाइल फोन और एक पेन ड्राइव बरामद की। अदालत ने इन दोनों इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराने की एनआईए की याचिका भी स्वीकार कर ली।
एनआईए के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले शौकत मोल्ला दक्षिण 24 परगना के तटीय सीमा क्षेत्र से बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे थे। सीमा से सटे चुनाखाली इलाके में स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें पहचान लिया और पीछा किया, लेकिन वे वहाँ से निकलने में सफल रहे।
इसके बाद एजेंसी ने क्षेत्र में कड़ी निगरानी शुरू की। सूत्रों के मुताबिक, जब शौकत मोल्ला कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एनआईए कार्यालय में आत्मसमर्पण करने जा रहे थे, तभी बारुईपुर क्षेत्र के एक अज्ञात स्थान से एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
मामले में अब तक की गिरफ्तारियाँ
इस मामले में एनआईए अब तक कुल चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से दो आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, एक आरोपी एनआईए की हिरासत में है, और अब शौकत मोल्ला को भी 14 दिनों की एजेंसी हिरासत में भेजा गया है। अदालत ने इन आरोपियों से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच की अनुमति भी पहले ही दे दी है।
अदालत में बहस: जमानत अर्जी खारिज
विशेष एनआईए अदालत में पेशी के दौरान शौकत मोल्ला के वकील ने जमानत की माँग की। हालाँकि, एनआईए ने इसका कड़ा विरोध किया। एजेंसी ने दलील दी कि क्षेत्र में पूर्व विधायक होने के कारण शौकत मोल्ला एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और जमानत मिलने की स्थिति में वे सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं तथा गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि शौकत मोल्ला को पिछली राज्य सरकार की ओर से जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, इसलिए उनका इस बम विस्फोट में शामिल होना संभव नहीं है।
इसके जवाब में एनआईए ने अदालत को बताया कि विस्फोट के बाद शौकत मोल्ला लगातार अन्य आरोपियों के संपर्क में थे और उन्हें निर्देश दे रहे थे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने एनआईए की माँग स्वीकार करते हुए हिरासत का आदेश दिया।
आगे क्या होगा
शौकत मोल्ला को 19 जून 2026 को पुनः अदालत में पेश किया जाएगा। एनआईए बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच के नतीजों के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी। गौरतलब है कि भांगर क्षेत्र में राजनीतिक हिंसा और बम विस्फोट की घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं, और यह मामला पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा की जांच के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है।