NIA का बंगाल में बड़ा एक्शन: पूर्व TMC विधायक शौकत मोल्ला के घर छापा, बेटे इमरान से पूछताछ
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 4 जून गुरुवार सुबह पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना ज़िले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक शौकत मोल्ला के आवास पर छापा मारा और उनके बेटे इमरान मोल्ला से लंबी पूछताछ की। यह कार्रवाई भांगर इलाके में विधानसभा चुनावों से पहले हुए उस बम धमाके की जाँच से जुड़ी है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
छापेमारी का घटनाक्रम
एजेंसी की टीम सुबह-सुबह कई गाड़ियों में जीवनतला थाना क्षेत्र के मौखाली गाँव स्थित मोल्ला के आवास पर पहुँची। तलाशी अभियान बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की मौजूदगी में शुरू हुआ। सूत्रों के अनुसार, NIA अधिकारियों के पहुँचने से पहले ही शौकत मोल्ला कथित तौर पर घर से फरार हो गए थे, जिसके चलते एजेंसी ने उनके बेटे इमरान से पूछताछ की।
छापेमारी के दौरान बरामदगी को लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
परिवार की प्रतिक्रिया
छापेमारी के बाद शौकत मोल्ला की पत्नी सायेर बानू मोल्ला ने मीडिया से कहा, ‘मेरे बेटे ने मुझे फोन किया। उस समय मैं घर पर नहीं थी।’ परिवार की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
भांगर बम धमाका और जाँच की पृष्ठभूमि
यह धमाका राज्य विधानसभा चुनावों से कुछ दिन पहले भांगर में हुआ था। घटना के बाद नौशाद सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) ने मामले की NIA जाँच की माँग की थी, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने जाँच की कमान संभाली। इससे पहले NIA इसी मामले में तृणमूल नेता वाहिदुल इस्लाम समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जाँच के तहत शौकत के घर और उनके पार्टी दफ़्तर पर भी पहले छापे पड़ चुके हैं।
शौकत मोल्ला का राजनीतिक कद
शौकत मोल्ला कैनिंग पुरबा विधानसभा क्षेत्र से 2016 और 2021 में लगातार दो बार TMC विधायक चुने गए थे। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भांगर सीट से ताल ठोकी, लेकिन ISF प्रत्याशी नौशाद से हार गए। उन्हें TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी का क़रीबी माना जाता है, और दक्षिण 24 परगना ज़िले में पार्टी की संगठनात्मक पकड़ मज़बूत करने में उनकी भूमिका मानी जाती रही है।
आगे क्या
NIA सूत्रों के अनुसार, इमरान मोल्ला से पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। शौकत मोल्ला की तलाश जारी है और एजेंसी जल्द ही उन्हें औपचारिक नोटिस जारी कर सकती है। यह छापेमारी बंगाल की राजनीति में नया तूल पकड़ सकती है, क्योंकि TMC पहले से ही केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताती रही है।