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क्या पश्चिम बंगाल में एसआईआर की सुनवाई के डर से तीन लोगों की मौत हुई?

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क्या पश्चिम बंगाल में एसआईआर की सुनवाई के डर से तीन लोगों की मौत हुई?

सारांश

पश्चिम बंगाल में एसआईआर के डर से हुई तीन मौतें चिंता का विषय बन गई हैं। क्या यह एक सामान्य प्रक्रिया है या कुछ और? जानिए इस गंभीर मुद्दे पर विस्तार से।

मुख्य बातें

एसआईआर सुनवाई से जुड़ी चिंताएं मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं।
प्रशासन को लोगों को इन प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक करना चाहिए।
यह घटना समाज में डर और चिंता का वातावरण पैदा करती है।

कोलकाता, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर 24 परगना, नादिया और बीरभूम के तीन अलग-अलग जिलों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की सुनवाई प्रक्रिया के भय के चलते तीन व्यक्तियों की जान चली गई है।

पुलिस के अनुसार, दो व्यक्तियों ने आत्महत्या की और एक व्यक्ति की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। उनके परिवारों का कहना है कि एसआईआर के डर के कारण उनकी मृत्यु हुई।

उत्तर 24 परगना जिले के हिंगलगंज में, एक पिता की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई, जब उनके बेटे और बेटी को उनके मतदाता पंजीकरण में 'तार्किक विसंगतियों' के लिए एसआईआर सुनवाई के नोटिस मिले।

पता चला है कि बेटे अब्दुर रहमान और बेटी अंजुरा बीबी को एसआईआर सुनवाई के लिए बुलाया गया था। परिवार का दावा है कि उनके पिता छोयेद शेख की मृत्यु चिंता और भय के कारण हुई।

यह घटना हिंगलगंज के मामूदपुर स्थित बूथ नंबर 103 के क्षेत्र में हुई। परिवार के अनुसार, छोयेद की चिंता तब और बढ़ गई जब उन्हें पता चला कि उनका बेटा दूसरे राज्य में काम करता है, इसलिए वह एसआईआर सुनवाई में उपस्थित नहीं हो पाएगा।

62 वर्षीय व्यक्ति मानसिक तनाव के कारण बीमार पड़ गया और सोमवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से उसकी मृत्यु हो गई। उसे हिंगलगंज ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

मृतक की बेटी अंजुरा ने पत्रकारों को बताया, "मुझे और मेरे भाई को सुनवाई के नोटिस मिले थे। मेरा भाई दूसरे राज्य में प्रवासी मजदूर के रूप में काम करता है। हमारी सुनवाई सोमवार को होनी थी। मेरे पिता कई दिनों से चिंतित थे क्योंकि मेरा भाई नहीं आ सका था। हमने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की। मेरे पिता की मृत्यु एसआईआर के डर के कारण हुई।"

इसी बीच, नादिया जिले के करीमपुर में नाम में गड़बड़ी के कारण पत्नी के नाम पर नोटिस आने से फिजुर खान नामक व्यक्ति भयभीत हो गया। परिवार का आरोप है कि इसी भय के कारण नादिया के होगलबेरिया पुलिस थाना क्षेत्र में फिजुर खान ने रविवार रात आत्महत्या कर ली।

स्थानीय और पारिवारिक स्रोतों के अनुसार, फिजूर की पत्नी परवीना बीबी को एसआईआर सुनवाई का नोटिस मिला और दस्तावेजों में नाम की वर्तनी या अन्य जानकारी में विसंगतियों के कारण उन्हें पेश होने के लिए कहा गया।

परिवार का दावा है कि फिजूर को लगा था कि उनकी पत्नी को बांग्लादेश भेज दिया जाएगा।

बीडीओ देवब्रत चक्रवर्ती ने कहा, "तार्किक विसंगतियों को दूर करना एक सामान्य प्रक्रिया है। इसका देश से निर्वासित किए जाने से कोई संबंध नहीं है।"

इसी बीच, बीरभूम जिले के रामपुरहाट नगरपालिका के वार्ड 14 में जॉनी शेख नामक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। परिवार का आरोप है कि उसने एसआईआर से संबंधित भय के कारण यह कदम उठाया।

पारिवारिक स्रोतों के अनुसार, जॉनी ट्रेनों में पानी की बोतलें बेचा करता था। उसकी पत्नी उसे कई साल पहले छोड़कर चली गई थी। वह कभी-कभी शराब पीता था। वे रेलवे की जमीन पर निवास करते थे। उसके पिता का निधन हो चुका है और उसकी मां काम के सिलसिले में मुंबई में रहती है। जॉनी रामपुरहाट में अपने चचेरे भाई के घर खाना खाता था।

रविवार दोपहर को खाना खाने के बाद वह अपने कमरे में गया और दरवाजा बंद कर लिया। जब उसने रात तक दरवाजा नहीं खोला, तो स्थानीय लोगों को शक हुआ। सूत्रों के अनुसार, निवासियों ने ताला तोड़कर दरवाजा खोला और उसे मृत पाया।

परिवार का कहना है कि चुनाव आयोग ने उस वार्ड में 171 लोगों को सुनवाई का नोटिस जारी किया था। उन्हें डर था कि कहीं उन्हें भी सुनवाई का नोटिस न मिल जाए। उनका आरोप है कि इसी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह इस बात की भी ओर इशारा करती है कि कैसे प्रशासनिक प्रक्रियाएं लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। हमें समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह सामान्य प्रक्रिया है?
हाँ, एसआईआर एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसके प्रति लोगों का भय चिंता का विषय है।
क्या प्रशासन इसका समाधान कर रहा है?
प्रशासन ने कहा है कि तार्किक विसंगतियों को दूर करना सामान्य प्रक्रिया है।
राष्ट्र प्रेस
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