कूनो में चीता केजीपी12 ने दिए 4 शावक, देश में चीतों की संख्या बढ़कर 56 हुई
सारांश
मुख्य बातें
कूनो नेशनल पार्क से 18 सितंबर 2026 को बड़ी खुशखबरी आई — भारत में जन्मी मादा चीता केजीपी12 ने चार नए शावकों को जन्म दिया, जिससे देश में चीतों की कुल संख्या 56 हो गई है। यह जन्म प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के ठीक एक दिन बाद हुआ, जो इस संरक्षण अभियान के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव है।
ऐतिहासिक क्षण: चार साल, चार नई जिंदगियाँ
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'प्रोजेक्ट चीता के लिए सचमुच एक ऐतिहासिक और खुशी का पल! भारत के चीता प्रोजेक्ट के चार साल पूरे होने के एक दिन बाद, भारत में जन्मी मादा चीता केजीपी12 ने कूनो में चार शावकों को जन्म दिया है। चार साल, चार नई जिंदगियाँ — यह उम्मीद, हिम्मत और भारत में चीता संरक्षण की बढ़ती सफलता का एक शानदार प्रतीक है।' उन्होंने कूनो और प्रोजेक्ट चीता से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।
कूनो में चीतों की वर्तमान स्थिति
कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर जिला, मध्य प्रदेश में वर्तमान में कुल 49 चीते मौजूद हैं। इनमें से 17 चीते खुले वन क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं — जिनमें 10 नर और 7 मादा शामिल हैं। शेष 32 चीते सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में रखे गए हैं, जिनमें 5 नर, 8 मादा और एक वर्ष से कम उम्र के शावक हैं।
गौरतलब है कि केजीपी12 स्वयं भारत में जन्मी चीता है — अर्थात यह भारतीय भूमि पर पली-बढ़ी चीता अब माँ बन चुकी है, जो इस पुनर्स्थापना कार्यक्रम की दीर्घकालिक सफलता का प्रमाण है।
कूनो से आगे: गांधी सागर तक विस्तार
चीता संरक्षण कार्यक्रम का दायरा अब केवल कूनो तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य में भी 3 चीते मौजूद हैं। इस तरह राज्य में चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना का काम लगातार व्यापक होता जा रहा है। यह प्रयास भारत को उस स्थिति की ओर ले जाने का हिस्सा है जहाँ चीतों की एक स्थायी, स्व-निर्भर आबादी प्राकृतिक परिवेश में विचरण कर सके।
प्रोजेक्ट चीता का संदर्भ और महत्व
भारत में चीता 1952 में विलुप्त घोषित हो गया था। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को कूनो में छोड़कर इस पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। बाद में दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए। यह विश्व का पहला अंतर-महाद्वीपीय चीता स्थानांतरण कार्यक्रम है।
चार वर्षों में 56 की संख्या तक पहुँचना — विशेषकर जब केजीपी12 जैसी भारत में जन्मी चीता खुद शावकों को जन्म दे रही है — इसे संरक्षणविद् एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब परियोजना की शुरुआत में हुई कुछ मौतों के कारण इस पर सवाल उठे थे।
आगे क्या होगा
नए शावकों की देखभाल और उनके स्वास्थ्य पर कूनो की टीम की कड़ी निगरानी जारी रहेगी। भारत में जन्म लेने वाले चीतों की संख्या बढ़ना इस परियोजना के अगले चरण — यानी प्राकृतिक प्रजनन के ज़रिए स्व-निर्भर आबादी — की ओर एक अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गांधी सागर जैसे नए ठिकानों पर विस्तार से भी चीतों की आबादी को दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी।