6 अक्टूबर 2026
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मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा बसेरा: वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 7 अक्टूबर को होगी विमुक्ति

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मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा बसेरा: वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 7 अक्टूबर को होगी विमुक्ति

सारांश

कूनो और गांधीसागर के बाद अब सागर का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनेगा मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा घर। 7 अक्टूबर को सीएम मोहन यादव दो चीते विमुक्त करेंगे — 2,339 वर्ग किलोमीटर का यह रिजर्व बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था और वन्यजीव पर्यटन की नई तस्वीर लिखने को तैयार है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव 7 अक्टूबर 2026 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए दो चीते विमुक्त करेंगे।
यह मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा आधिकारिक आवास बनेगा — पहले दो कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य हैं।
रिजर्व में चीतों के लिए 439 हेक्टेयर में विशेष आवास और आधुनिक बोमा तैयार किए गए हैं।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है — क्षेत्रफल लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर ; 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।
भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए चीतों को विमुक्त कर की थी।
चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड में पर्यटन, रोज़गार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व 7 अक्टूबर 2026 को प्रदेश में चीतों का तीसरा आधिकारिक आवास बनने जा रहा है, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए दो चीतों को यहाँ विमुक्त करेंगे। कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद यह मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान का तीसरा पड़ाव है।

तैयार किया गया विशेष आवास

चीतों के सुरक्षित अनुकूलन के लिए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं। आधुनिक बोमा (बाड़े) और अन्य ज़रूरी सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आवास तैयार किया गया है। वन विभाग ने चीतों की नियमित निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए समुचित ढाँचा सुनिश्चित किया है, और क्षेत्र में पहले से मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखा गया है।

रिजर्व की विशेषताएँ

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे पूर्व में नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से जाना जाता था, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है — इसका क्षेत्रफल लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर है। 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य से एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा प्रदान किया गया।

यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू सहित विविध वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। इसके साथ ही यह संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है।

भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की नींव रखी थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए। यह अभियान अब मध्य प्रदेश के उपयुक्त वन क्षेत्रों में विस्तार पा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत का चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम वैश्विक संरक्षण समुदाय की नज़र में एक महत्त्वाकांक्षी पहल के रूप में स्थापित हो चुका है — दशकों पूर्व विलुप्त हो गई एक प्रजाति को पुनः भारतीय भूमि पर बसाने का यह प्रयास दुनिया में अपनी तरह का एक अनूठा प्रयोग है।

आम जनता और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों के आने से होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को नए रोज़गार के अवसर मिलेंगे।

आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी पर्यटन-आधारित आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने का अनुमान है। वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन के अवसर पर यह विमुक्ति समारोह सागर और बुंदेलखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण में एक ऐतिहासिक पड़ाव के रूप में दर्ज होगी।

आगे की राह

7 अक्टूबर 2026 को होने वाली यह विमुक्ति चीता पुनर्स्थापना अभियान को मध्य प्रदेश में तीन स्थलों तक विस्तार देगी। अब यह देखना अहम होगा कि कूनो और गांधीसागर के अनुभवों से सीखते हुए वन विभाग इस नई लोकेशन पर चीतों के दीर्घकालिक अनुकूलन और प्रजनन को कैसे सुनिश्चित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कूनो में शुरुआती वर्षों में हुई कई चीतों की मौत ने निगरानी तंत्र और पर्यावास-तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। असली कसौटी यह होगी कि 2,339 वर्ग किलोमीटर के इस बड़े रिजर्व में चीते अनुकूलित होते हैं या नहीं, और दीर्घकालिक प्रजनन की संभावना कितनी है। पर्यटन और रोज़गार के दावे तभी पूरे होंगे जब स्थानीय समुदाय को संरक्षण प्रक्रिया में वास्तविक भागीदार बनाया जाए, न केवल लाभार्थी।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीते कब और कैसे विमुक्त किए जाएंगे?
मुख्यमंत्री मोहन यादव 7 अक्टूबर 2026 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे। यह कार्यक्रम वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व कहाँ है और इसकी खासियत क्या है?
यह रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर है। 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया और यहाँ बाघ, तेंदुआ, भालू सहित अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं।
मध्य प्रदेश में चीतों के अन्य दो आवास कौन-से हैं?
मध्य प्रदेश में चीतों के पहले दो आवास कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व अब प्रदेश का तीसरा चीता आवास बनेगा।
भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत कब और कैसे हुई?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर इस अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए और अब यह अभियान मध्य प्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक विस्तार पा रहा है।
चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड को क्या फायदा होगा?
चीतों के आने से सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और होटल, होम-स्टे, परिवहन, गाइड तथा हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन-आधारित आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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