रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 7 अक्टूबर को दो चीते छोड़ेंगे CM मोहन यादव, बुंदेलखंड में नई उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव 7 अक्टूबर 2026 को वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, सागर में दो चीतों को औपचारिक रूप से छोड़ेंगे। यह आयोजन बुंदेलखंड में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो इस क्षेत्र की परिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित करेगा।
तैयारियों का विवरण
रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के जिला वन अधिकारी (DFO) रजनीश सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री यादव ने 25 मार्च को इस परियोजना का भूमि पूजन किया था, जिसके बाद निर्माण कार्य तेज़ी से शुरू हुआ। तय समय में लगभग 440 हेक्टेयर में फैले 'बोमा' (बाड़े) का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इस बाड़े में पाँच अलग-अलग हिस्से और एक क्वारंटाइन क्षेत्र शामिल है।
बोमा में इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई गई है ताकि कोई भी शिकारी या मांसाहारी जानवर बाड़े के अंदर न आ सके और न ही बाहर जा सके। पानी की पर्याप्त व्यवस्था के साथ-साथ चौबीसों घंटे निगरानी के लिए पेट्रोलिंग कैंप स्थापित किए गए हैं। एक वन्यजीव पशु चिकित्सक भी रिजर्व में नियुक्त किया गया है।
कूनो से प्रशिक्षण, बुंदेलखंड में बदलाव की उम्मीद
DFO रजनीश सिंह ने बताया कि रिजर्व के 60-70 कर्मचारी कूनो राष्ट्रीय उद्यान में प्रशिक्षण लेकर लौटे हैं। उन्होंने कहा, 'यह बुंदेलखंड का ऐसा प्रोजेक्ट है, जिससे बुंदेलखंड की परिस्थितिकी में परिवर्तन आएगा।' गौरतलब है कि बुंदेलखंड में जल संकट एक दीर्घकालिक चुनौती रही है — रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व केन, बेतवा और नर्मदा के जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है, जिससे भविष्य में जल उपलब्धता बेहतर होने की संभावना जताई जा रही है।
रजनीश सिंह के अनुसार, 'चीता जब घास के मैदानों का संरक्षण करेगा तो स्वतः ही हमारे खेतों का संरक्षण होगा और हमारे बुंदेलखंड और भारत की प्रगति होगी।' यह टिप्पणी परिस्थितिकी और कृषि के बीच के अंतर्संबंध को रेखांकित करती है।
पर्यटन और रोज़गार पर असर
मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि चीतों का आगमन केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, इससे सागर और समूचे बुंदेलखंड में पर्यटन, रोज़गार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक चीतों को देखने के लिए यहाँ आकर्षित हो सकते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश पहले से ही कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता पुनर्वास परियोजना का केंद्र रहा है। रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की उपस्थिति इस पुनर्वास कार्यक्रम के विस्तार का संकेत है।
आगे की राह
440 हेक्टेयर का सुरक्षित बोमा, प्रशिक्षित कर्मचारी दल और चिकित्सा व्यवस्था के साथ रिजर्व तकनीकी रूप से तैयार बताया जा रहा है। आने वाले महीनों में चीतों की निगरानी और उनके व्यवहार के अवलोकन के आधार पर अगले चरण की रणनीति तय की जाएगी। बुंदेलखंड के लिए यह परियोजना पारिस्थितिक पुनरुद्धार और टिकाऊ पर्यटन के एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।