28 अक्टूबर 2026
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आसाराम पर जेल वापसी में देरी का मामला दर्ज, मेडिकल पैरोल खत्म होने के घंटों बाद पहुँचे जोधपुर

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आसाराम पर जेल वापसी में देरी का मामला दर्ज, मेडिकल पैरोल खत्म होने के घंटों बाद पहुँचे जोधपुर

सारांश

20 दिन की मेडिकल पैरोल खत्म होने और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विस्तार की अर्जी खारिज करने के बावजूद आसाराम तय समय से साढ़े पाँच घंटे देरी से जोधपुर पहुँचे। रतनदा पुलिस ने प्रिजन्स एक्ट की धारा 58बी के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

मुख्य बातें

रतनदा पुलिस, जोधपुर ने 27 अक्टूबर 2026 को आसाराम के खिलाफ प्रिजन्स एक्ट की धारा 58बी के तहत मामला दर्ज किया।
आसाराम को मंगलवार शाम 5 बजे तक जेल में सरेंडर करना था, लेकिन वे रात 10:40 बजे एयर एम्बुलेंस से पहुँचे।
सर्वोच्च न्यायालय ने पैरोल विस्तार की अर्जी खारिज कर समय पर वापसी का निर्देश दिया था।
देर रात आने के कारण जेल प्रशासन ने प्रवेश नहीं दिया; उन्हें भगत की कोठी के एक अस्पताल ले जाया गया।
आसाराम को 25 अप्रैल 2018 को पॉक्सो कोर्ट ने दोषी ठहराया था और 27 मई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखी।

जोधपुर की रतनदा पुलिस ने 27 अक्टूबर 2026 को दोषी आसाराम के खिलाफ प्रिजन्स एक्ट की धारा 58बी के तहत मामला दर्ज किया है। आसाराम, जो एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में जोधपुर सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, 20 दिनों की मेडिकल पैरोल की समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद तय वक्त पर जेल नहीं लौटे। उन्हें मंगलवार शाम 5 बजे तक सरेंडर करना था, लेकिन वे रात 10:40 बजे इंदौर से एयर एम्बुलेंस के ज़रिए जोधपुर पहुँचे।

मामले का घटनाक्रम

राजस्थान हाईकोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को आसाराम को 20 दिनों की मेडिकल पैरोल दी थी, जिसकी अवधि 26 अक्टूबर को समाप्त हो गई। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि अगली शाम यानी 27 अक्टूबर तक शाम 5 बजे तक उन्हें जेल में सरेंडर करना होगा। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य कारणों से आसाराम उज्जैन के एक अस्पताल में उपचाराधीन थे।

जेल गार्ड बनवारीलाल की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया और जाँच का ज़िम्मा असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर भवानी सिंह को सौंपा गया है। देर रात पहुँचने के कारण जेल प्रशासन ने उन्हें प्रवेश नहीं दिया और उन्हें भगत की कोठी क्षेत्र के एक अस्पताल ले जाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल विस्तार से किया था इनकार

आसाराम की कानूनी टीम ने पैरोल अवधि बढ़ाने की माँग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस अर्जी को खारिज करते हुए उन्हें तय समय-सीमा के भीतर जोधपुर सेंट्रल जेल वापस लौटने का स्पष्ट निर्देश दिया। इसके बावजूद वे निर्धारित समय से करीब साढ़े पाँच घंटे की देरी से पहुँचे।

मूल मामला और सजा की पृष्ठभूमि

आसाराम को अगस्त 2013 में जोधपुर स्थित उनके आश्रम में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 27 मई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा।

गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट और नवंबर 2025 में गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें छह-छह महीने की अंतरिम मेडिकल ज़मानत दी थी, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द करने से इनकार कर दिया था। यह ताज़ा मामला उनके कानूनी विवादों की उस लंबी कड़ी में एक और कड़ी है जिसमें मेडिकल राहत की माँग बार-बार केंद्र में रही है।

आम जनता और कानूनी व्यवस्था पर असर

यह प्रकरण पैरोल प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। अधिकारियों के अनुसार, जेल अधिनियम की धारा 58बी के तहत पैरोल की समय-सीमा का उल्लंघन एक दंडनीय अपराध है। मामले की जाँच रतनदा पुलिस कर रही है और बुधवार को आसाराम को वापस जेल भेजे जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

आगे क्या होगा

धारा 58बी के तहत दर्ज मामले में जाँच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्यवाही की संभावना है। स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर उनकी कानूनी टीम नए सिरे से राहत की अर्जी दे सकती है, हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय का हालिया रुख इस मार्ग को कठिन बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सर्वोच्च न्यायालय का उन्हें रद्द न करना, और अब पैरोल विस्तार की अर्जी की अस्वीकृति — यह पैटर्न दर्शाता है कि अदालतें इस मामले में स्पष्ट संकेत दे रही हैं। धारा 58बी के तहत मामला दर्ज होना कानूनी प्रक्रिया की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पीड़ित पक्ष और आम जन को संदेश देता है कि न्यायिक आदेशों का पालन किसी के लिए भी वैकल्पिक नहीं है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आसाराम के खिलाफ ताज़ा मामला क्यों दर्ज किया गया?
आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दी गई 20 दिनों की मेडिकल पैरोल की समय-सीमा 26 अक्टूबर को समाप्त हो गई थी और उन्हें 27 अक्टूबर शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करना था। समय पर न लौटने पर जेल गार्ड की शिकायत के आधार पर रतनदा पुलिस ने प्रिजन्स एक्ट की धारा 58बी के तहत मामला दर्ज किया।
आसाराम कितनी देरी से जोधपुर पहुँचे और कहाँ से आए?
आसाराम तय समय से करीब साढ़े पाँच घंटे की देरी से रात 10:40 बजे इंदौर से एयर एम्बुलेंस के ज़रिए जोधपुर पहुँचे। बताया जा रहा है कि वे उज्जैन के एक अस्पताल में उपचाराधीन थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने पैरोल विस्तार की अर्जी पर क्या फैसला सुनाया?
सर्वोच्च न्यायालय ने आसाराम की कानूनी टीम की पैरोल विस्तार की माँग खारिज कर दी और स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि उन्हें तय समय-सीमा के भीतर जोधपुर सेंट्रल जेल वापस लौटना होगा।
आसाराम को मूल सजा कब और किस मामले में मिली थी?
आसाराम को अगस्त 2013 में जोधपुर स्थित उनके आश्रम में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 25 अप्रैल 2018 को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसे 27 मई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा।
देरी से पहुँचने पर जेल प्रशासन ने क्या किया?
देर रात पहुँचने के कारण जेल प्रशासन ने आसाराम को जेल में प्रवेश नहीं दिया और उन्हें भगत की कोठी क्षेत्र के एक अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार उन्हें बुधवार को वापस जेल लाए जाने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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