28 अक्टूबर 2026
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पटना एमएलसी चुनाव: राजद का आरोप — 6,100 वोट खारिज, मगनी लाल मंडल ने मतगणना पर उठाए गंभीर सवाल

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पटना एमएलसी चुनाव: राजद का आरोप — 6,100 वोट खारिज, मगनी लाल मंडल ने मतगणना पर उठाए गंभीर सवाल

सारांश

पटना ग्रेजुएट्स एमएलसी सीट पर राजद ने 6,100 वोट खारिज होने का आरोप लगाया है — और निशाने पर हैं जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार। बिहार प्रदेश अध्यक्ष मगनी लाल मंडल का दावा है कि उनके उम्मीदवार को सर्वाधिक वोट मिले थे, लेकिन मतगणना में हेरफेर हुई। 'इंडिया' गठबंधन की आंतरिक टूट भी उजागर हुई।

मुख्य बातें

राजद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मगनी लाल मंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि पटना ग्रेजुएट्स सीट पर उनके उम्मीदवार के 6,100 वोट तकनीकी आधार पर खारिज किए गए।
मंडल का दावा है कि यह कदम जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार की जीत सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया।
राजद पूरे नतीजों की समीक्षा के बाद अपील दायर करने पर निर्णय लेगी।
'इंडिया' गठबंधन में समन्वय की कमी और साझा उम्मीदवार घोषित न होने को मंडल ने विपक्ष की हार का कारण बताया।
कांग्रेस नेता मदन मोहन झा की हार को मंडल ने गठबंधन के लिए 'बड़ा झटका' करार दिया।
मंडल ने ईवीएम और मतपत्र दोनों को अपूर्ण बताया; कहा कि मतपत्र प्रणाली अल्पसंख्यकों के मतों की रक्षा नहीं कर पाती।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मगनी लाल मंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि पटना ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र में उनकी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में पड़े लगभग 6,100 मतपत्र तकनीकी आधार पर खारिज कर दिए गए, ताकि जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार नीरज कुमार की जीत सुनिश्चित की जा सके। मंडल के अनुसार, मतगणना में हुई यह कथित गड़बड़ी बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों को सीधे प्रभावित करती है।

मतगणना पर राजद के आरोप

मंडल ने दावा किया कि उनकी पार्टी के उम्मीदवार को वास्तव में सर्वाधिक वोट मिले थे, लेकिन बड़ी संख्या में मतपत्र अस्वीकार कर दिए गए। उन्होंने कहा, 'तकनीकी आधार पर हमारे लगभग 6,100 वोट खारिज कर दिए गए, क्योंकि वे चाहते थे कि नीतीश कुमार जी के उम्मीदवार, नीरज, जीतें।' उन्होंने यह भी बताया कि वोटों की गिनती में भी गड़बड़ी हुई है।

मंडल ने स्पष्ट किया कि पटना ग्रेजुएट्स सीट पर मतपत्र आधारित प्रणाली का उपयोग हुआ था, जिसमें वरीयता क्रम के कई राउंड होते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी, तीसरी और चौथी वरीयता की गिनती के दौरान उम्मीदवारों की स्थिति में बदलाव संभव है और इसी प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप उन्होंने लगाया है।

अपील की संभावना और आगे की रणनीति

राजद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पूरे नतीजों की विस्तृत समीक्षा के बाद पार्टी यह तय करेगी कि संबंधित अधिकारियों के सामने अपील दायर करनी है या नहीं। उन्होंने कहा, 'हम एक रणनीति बनाएंगे।' गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद के ग्रेजुएट और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतपत्र-आधारित एकल संक्रमणीय मत प्रणाली का इस्तेमाल होता है, जो परिणामों को अंतिम रूप में आने में अधिक समय लेती है।

'इंडिया' गठबंधन की कमज़ोर रणनीति पर मंडल की आलोचना

मंडल ने एमएलसी चुनाव में 'इंडिया' गठबंधन को अपेक्षित नतीजे न मिलने के लिए कांग्रेस के रवैये को भी ज़िम्मेदार ठहराया। उनके अनुसार, यह मुकाबला गठबंधन के साझेदारों के बीच ही 'फ्रेंडली फाइट' में बदल गया। समय रहते साझा उम्मीदवार घोषित न कर पाना और तालमेल की कमी विपक्ष की कमज़ोरी का मुख्य कारण रही।

कांग्रेस नेता मदन मोहन झा की हार को मंडल ने 'बड़ा झटका' बताते हुए दुख जताया। उन्होंने कहा कि गठबंधन की ओर से पहले से किसी संयुक्त उम्मीदवार की घोषणा न होना उनकी चुनावी तैयारी में स्पष्टता की कमी को दर्शाता है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी एकता पर कई राज्यों में सवाल उठ रहे हैं।

ईवीएम बनाम मतपत्र: मंडल का संतुलित रुख

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और मतपत्रों को लेकर जारी बहस पर मंडल ने कहा कि दोनों में से कोई भी प्रणाली 'अचूक समाधान' नहीं है। उन्होंने माना कि ईवीएम में तकनीकी खराबियाँ आ सकती हैं, लेकिन पूरी तरह मतपत्र प्रणाली की ओर लौटने को भी सही नहीं ठहराया। उन्होंने तर्क दिया कि मतपत्र आधारित चुनावों में अल्पसंख्यक वर्गों के मतदान अधिकारों की पर्याप्त रक्षा नहीं हो पाती। उनके अनुसार, तकनीकी तरक्की के साथ-साथ चुनावी प्रणाली में भी सुधार होना चाहिए।

लोकतांत्रिक विमर्श और भाजपा पर आरोप

विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में मंडल ने आरोप लगाया कि इन आंदोलनों के विरोध को लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को सीमित करने के बहाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर काम कर रहे हैं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिए जा रहे तर्क असहमति को दबाने का एक 'दिखावा' मात्र हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा विरोध में कारोबारी वर्ग की भागीदारी इसे विशेष महत्व देती है।

राजद की यह आपत्ति बिहार में आगामी चुनावी राजनीति के लिए मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता को एक अहम मुद्दा बनाती है। अब यह देखना होगा कि पार्टी औपचारिक अपील का रास्ता चुनती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अभी तक वे केवल एकतरफा दावे हैं — चुनाव आयोग या मतगणना पर्यवेक्षकों की ओर से कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह ध्यान देने योग्य है कि मतपत्र-आधारित वरीयता मतदान प्रणाली में तकनीकी आधार पर वोट रद्द होना असामान्य नहीं है — असली सवाल यह है कि क्या यह मानक प्रक्रिया थी या उससे परे। इससे भी बड़ी बात यह है कि राजद और 'इंडिया' गठबंधन के भीतर जो समन्वय की विफलता उजागर हुई है, वह बिहार में विपक्ष की चुनावी तैयारी की गहरी कमज़ोरी को दर्शाती है। मतगणना पर उंगली उठाने से पहले गठबंधन को अपनी रणनीतिक खामियों पर भी गंभीरता से विचार करना होगा।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना एमएलसी चुनाव में राजद ने क्या आरोप लगाया है?
राजद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मगनी लाल मंडल ने आरोप लगाया है कि पटना ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र में उनकी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में डाले गए लगभग 6,100 मतपत्र तकनीकी आधार पर खारिज कर दिए गए। उनका दावा है कि यह जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार की जीत सुनिश्चित करने के लिए किया गया।
पटना ग्रेजुएट्स एमएलसी सीट पर कौन जीता?
राजद के आरोपों के अनुसार, जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार ने यह सीट जीती है। हालाँकि, मंडल का दावा है कि उनके उम्मीदवार को वास्तव में सर्वाधिक वोट मिले थे।
राजद अब आगे क्या करेगी?
मगनी लाल मंडल ने कहा है कि पूरे नतीजों की समीक्षा के बाद पार्टी तय करेगी कि संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष औपचारिक अपील दायर करनी है या नहीं। अभी पार्टी रणनीति बनाने की प्रक्रिया में है।
'इंडिया' गठबंधन को बिहार एमएलसी चुनाव में क्यों नुकसान हुआ?
मंडल ने इसके लिए कांग्रेस के रवैये और गठबंधन में समन्वय की कमी को जिम्मेदार ठहराया है। उनके अनुसार, पहले से साझा उम्मीदवार घोषित न होने से विपक्षी साझेदार आपस में ही 'फ्रेंडली फाइट' करते रहे, जिससे संभावनाएँ कमज़ोर हो गईं।
ईवीएम और मतपत्र पर मंडल का क्या रुख है?
मंडल ने कहा कि ईवीएम में तकनीकी खराबियाँ आ सकती हैं, लेकिन पूरी तरह मतपत्र प्रणाली पर वापस जाना भी सही नहीं है। उनका तर्क है कि मतपत्र आधारित चुनावों में अल्पसंख्यक वर्गों के मतों की पर्याप्त रक्षा नहीं हो पाती और चुनावी प्रणाली में तकनीक के साथ सुधार होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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