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खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को कैबिनेट की मंजूरी, ₹1,856.67 करोड़ का परिव्यय

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खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को कैबिनेट की मंजूरी, ₹1,856.67 करोड़ का परिव्यय

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने ₹1,856.67 करोड़ की 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' को हरी झंडी दे दी है। 2026 से 2033-34 तक चलने वाली यह योजना SGMZ, MSME सशक्तीकरण, गुणवत्ता प्रमाणन और निर्यात प्रोत्साहन के ज़रिये भारत को वैश्विक खेल सामग्री बाज़ार में नई पहचान दिलाने का लक्ष्य रखती है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' को मंजूरी दी।
योजना का कुल परिव्यय ₹1,856.67 करोड़ ; अवधि 2026 से 2033-34 ।
निवेश और उत्पादन वृद्धि के लिए ₹1,130 करोड़ तथा गुणवत्ता प्रमाणन के लिए ₹105 करोड़ आवंटित।
देश भर में स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग जोन (SGMZ) विकसित किए जाएंगे, जो भव्य योजना और एनआईसीडीसी पार्कों से जुड़े होंगे।
योजना 'खेलो भारत नीति 2025' , 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के अनुरूप।
अनुसंधान के लिए प्रमुख संस्थानों में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' और स्टार्टअप्स को विशेष सहायता दी जाएगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' को औपचारिक मंजूरी दे दी। ₹1,856.67 करोड़ के कुल परिव्यय वाली यह योजना 2026 से 2033-34 की अवधि के लिए निर्धारित है और इसका उद्देश्य वैश्विक खेल सामग्री बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी को सुदृढ़ करना है। केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई इस घोषणा को अब सरकारी स्वीकृति मिल गई है।

योजना के मुख्य घटक

इस योजना में स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग जोन (SGMZ) विकसित करने की परिकल्पना की गई है, जहाँ निर्माता, आपूर्तिकर्ता, परीक्षण सुविधाएँ, डिज़ाइन केंद्र और सहायक उद्यम एक ही स्थान पर संचालित होंगे। इन जोन को 'भव्य' योजना और एनआईसीडीसी औद्योगिक पार्कों के तहत मौजूदा औद्योगिक अवसंरचना के साथ एकीकृत किया जाएगा।

निवेश और उत्पादन वृद्धि के लिए ₹1,130 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसमें 'एंकर इन्वेस्टमेंट सपोर्ट' घटक प्रमुख घरेलू और वैश्विक निर्माताओं व ब्रांड्स को SGMZ में इकाइयाँ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जबकि 'टर्नओवर लिंक्ड सपोर्ट' घटक निरंतर उत्पादन वृद्धि को प्रोत्साहन देगा।

एमएसएमई और क्लस्टर विकास पर ज़ोर

योजना में खेल सामग्री क्षेत्र में कार्यरत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को विशेष महत्व दिया गया है। मौजूदा विनिर्माण क्लस्टरों के उन्नयन के लिए साझा सुविधाएँ और साझा बुनियादी ढाँचा विकसित किया जाएगा। गौरतलब है कि भारत के अधिकांश खेल सामग्री निर्माता — विशेषकर जालंधर और मेरठ जैसे क्षेत्रों में — MSME श्रेणी में आते हैं, और यह योजना उनकी क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने का प्रयास करती है।

गुणवत्ता प्रमाणन और अनुसंधान

अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से प्रमाणन प्राप्त करने और उसे नवीनीकृत कराने के लिए ₹105 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ेगी और निर्यात के द्वार खुलेंगे।

खेल उपकरणों, सामग्री विज्ञान और उन्नत विनिर्माण तकनीकों में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित किए जाएंगे। 'अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन' के साथ तालमेल बिठाकर R&D गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। 'स्टार्टअप इंडिया' के अनुरूप, नवाचार-केंद्रित स्टार्टअप्स को विशेष सहायता मिलेगी।

कौशल विकास और वैश्विक बाज़ार

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से उद्योग की ज़रूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे, ताकि खेल सामग्री निर्माण क्षेत्र में कुशल कार्यबल की माँग पूरी की जा सके।

वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच के लिए 'निर्यात संवर्धन मिशन' का लाभ उठाया जाएगा। विशेष ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार पहलों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय खेल सामग्री बाज़ारों में भारत की उपस्थिति विस्तारित की जाएगी।

व्यापक नीतिगत संदर्भ और आगे की राह

यह योजना 'खेलो भारत नीति 2025', 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न के अनुरूप है। यह ऐसे समय में आई है जब भारत 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और 'खेलो इंडिया' तथा 'फिट इंडिया' जैसी पहलों के लिए उच्च-गुणवत्ता, घरेलू निर्मित खेल सामग्री की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। सरकार के अनुसार, यह योजना भारत को खेल सामग्री के डिज़ाइन, विकास और निर्माण के लिए एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

856.67 करोड़ की यह योजना कागज़ पर व्यापक दिखती है, लेकिन असली कसौटी SGMZ की ज़मीनी तैयारी होगी — भव्य योजना और NICDC पार्कों के साथ एकीकरण की बात वर्षों से होती आई है, जबकि जालंधर और मेरठ जैसे पारंपरिक क्लस्टर बुनियादी ढाँचे की कमी से जूझते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन सहायता एक ठोस कदम है, क्योंकि यही वह बाधा है जो भारतीय MSME को ओलंपिक-स्तरीय आपूर्ति श्रृंखलाओं से बाहर रखती है। लेकिन 2033-34 तक फैली लंबी समय-सीमा और स्पष्ट रोज़गार या निर्यात लक्ष्यों के अभाव में यह आकलन करना मुश्किल होगा कि योजना वास्तव में सफल रही या नहीं।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक योजना है जिसे 28 अक्टूबर 2026 को कैबिनेट ने ₹1,856.67 करोड़ के परिव्यय के साथ 2026 से 2033-34 की अवधि के लिए मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य भारत में खेल सामग्री के विनिर्माण, निर्यात और नवाचार को बढ़ावा देकर वैश्विक बाज़ार में देश की स्थिति मज़बूत करना है।
स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग जोन (SGMZ) क्या होंगे?
SGMZ विशेष औद्योगिक क्षेत्र होंगे जहाँ निर्माता, आपूर्तिकर्ता, परीक्षण सुविधाएँ, डिज़ाइन केंद्र और सहायक उद्यम एक ही स्थान पर काम करेंगे। इन्हें भव्य योजना और एनआईसीडीसी औद्योगिक पार्कों के साथ जोड़कर विकसित किया जाएगा।
इस योजना से MSME को क्या लाभ होगा?
योजना मौजूदा खेल सामग्री विनिर्माण क्लस्टरों के उन्नयन और साझा बुनियादी ढाँचे के विकास पर ज़ोर देती है, जिससे छोटे उद्यमों को सीधा लाभ मिलेगा। कौशल विकास, गुणवत्ता प्रमाणन और अनुसंधान सहायता के माध्यम से MSME को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में प्रवेश करने में मदद मिलेगी।
गुणवत्ता प्रमाणन के लिए कितना बजट है और इससे क्या होगा?
अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से प्रमाणन प्राप्त करने और नवीनीकरण के लिए ₹105 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इससे भारतीय खेल सामग्री की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता बढ़ेगी और वैश्विक बाज़ारों में निर्यात के अवसर खुलेंगे।
यह योजना 'आत्मनिर्भर भारत' और 'खेलो इंडिया' से कैसे जुड़ी है?
यह योजना 'खेलो भारत नीति 2025', 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न के अनुरूप बनाई गई है। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर आयात निर्भरता घटाना और 'खेलो इंडिया' व 'फिट इंडिया' जैसी पहलों के लिए उच्च गुणवत्ता की घरेलू खेल सामग्री उपलब्ध कराना इसके प्रमुख लक्ष्य हैं।
राष्ट्र प्रेस
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