स्टीव स्मिथ मेरे साथ खेले सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी: आरोन फिंच की बड़ी तारीफ
सारांश
मुख्य बातें
ऑस्ट्रेलिया की व्हाइट-बॉल टीम के पूर्व कप्तान आरोन फिंच ने स्टीव स्मिथ को अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय करियर में साथ खेले सभी खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ करार दिया है। क्रिकइन्फो के शो 'क्रिकेटर्स ऑन क्रिकेटर्स' पर दिए गए साक्षात्कार में फिंच ने कहा कि एक लेग-स्पिन ऑलराउंडर से विश्व के शीर्ष बल्लेबाजों में शुमार होने तक का स्मिथ का सफर 'प्राकृतिक प्रतिभा, कड़ी मेहनत और अपने तरीकों पर अटूट विश्वास का अनूठा मिश्रण' है।
लेग-स्पिनर से महान बल्लेबाज तक का असाधारण सफर
स्टीव स्मिथ ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत एक लेग-स्पिनर के रूप में की थी, जो आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते थे। उस दौर में उन्हें महान शेन वॉर्न के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था। हालाँकि, कालांतर में वे सर डोनाल्ड ब्रैडमैन के बाद ऑस्ट्रेलिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बनकर उभरे, टेस्ट बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया और क्रिकेट के सभी प्रारूपों में ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी भी की।
फिंच ने कहा, 'शुरुआत में स्टीव स्मिथ को शेन वॉर्न के विकल्प के तौर पर देखा जाता था। वह आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते थे, कुछ ओवर लेग-स्पिन गेंदबाजी करते थे और कभी-कभार फिनिशर के रूप में कुछ रन बना देते थे। फिर अचानक सब कुछ बदल गया — वह एक ऐसे शानदार बल्लेबाज बन गए, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।'
तकनीकी बदलाव और मानसिक मजबूती
फिंच ने स्मिथ की बल्लेबाजी की शैली का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा कि वे क्रीज पर हमेशा से बहुत हाथों और पैरों का इस्तेमाल करने वाले खिलाड़ी रहे, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपने खेल को सरल बना लिया। उन्होंने कहा, 'लंबे समय तक छठे और पाँचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने के बाद चौथे नंबर पर आना और वहाँ खुद को ढाल लेना, वाकई असाधारण था। मेरे साथ खेले गए खिलाड़ियों में वह सबसे बेहतरीन हैं।'
फिंच ने स्मिथ की मानसिकता को उनकी 'सुपरपावर' बताया: 'उनका मानना है कि मैं इस तरह से खेलूंगा; बाहरी दुनिया को यह कैसा दिखता है, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह एक तरह की सुपरपावर है — वह जो कर दिखाते हैं, उसे बाकी खिलाड़ी नहीं कर पाते। यह स्वाभाविक प्रतिभा है, लेकिन इसमें उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण भी शामिल है।'
बॉल-टेम्परिंग कांड और वापसी
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्मिथ का करियर 2018 में केपटाउन में हुए बॉल-टेम्परिंग कांड की वजह से प्रभावित हुआ, जिसके कारण उन पर 12 महीने का प्रतिबंध लगाया गया और दो वर्षों के लिए किसी भी तरह की कप्तानी या नेतृत्व भूमिका से वंचित किया गया। इस कांड के बाद स्मिथ ने वापसी की और मौजूदा टेस्ट कप्तान पैट कमिंस के उप-कप्तान बने।
फिंच का मानना है कि कप्तानी की जिम्मेदारी न होने से स्मिथ को एक खिलाड़ी के रूप में फायदा मिला। उन्होंने कहा, '2018 की घटना के बाद जब स्मिथ वापस लौटे तो एक खिलाड़ी के तौर पर वे काफी शांत थे, क्योंकि उनके पास कप्तानी नहीं थी। कप्तान के तौर पर आपका बहुत सारा समय खेल के बाहर की चीजों में चला जाता है — अब वह सिर्फ अपने खेल पर ध्यान दे सकते थे।'
2015 वर्ल्ड कप की अविस्मरणीय यादें
2021 में ऑस्ट्रेलिया को पुरुष टी20 विश्व कप का खिताब दिलाने वाले फिंच ने 2015 आईसीसी पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैचों में स्मिथ की बल्लेबाजी को अपनी सबसे सुखद यादों में शुमार किया। उन्होंने याद दिलाया कि ऑस्ट्रेलिया बनाम पाकिस्तान क्वार्टर फाइनल में भले ही वहाब रियाज बनाम शेन वॉटसन की टक्कर सुर्खियों में रही, लेकिन दूसरे छोर पर स्मिथ की शानदार पारी को नजरअंदाज किया गया।
फिंच ने कहा, 'भारत के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने 89 गेंदों पर शतक जड़ा और न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में नाबाद 56 रनों की पारी खेली। इन तीनों मैचों में वह कहीं से भी दबाव में नहीं दिखे। वर्ल्ड कप के नॉकआउट चरण सबसे ज्यादा दबाव वाले मैच होते हैं, लेकिन यह खिलाड़ी पूरी तरह शांत रहकर बल्लेबाजी कर रहा था।'
फिंच ने स्मिथ की मानसिक शक्ति को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि वे अपनी पिछली पारियों का कोई बोझ अगली पारी में नहीं ले जाते — और यही उन्हें असाधारण बनाता है। इस तरह की बेबाक तारीफ यह संकेत देती है कि क्रिकेट समुदाय में स्मिथ की विरासत को लेकर बहस अभी भी जारी है।