28 अक्टूबर 2026
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केरल हाई कोर्ट ने VACB को RTI छूट पर केरल सरकार से माँगा हलफनामा

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केरल हाई कोर्ट ने VACB को RTI छूट पर केरल सरकार से माँगा हलफनामा

सारांश

केरल सरकार ने 22 अक्टूबर को VACB के दो सेक्शन को RTI छूट दी, लेकिन हाई कोर्ट ने सवाल उठाया — क्या सरकारी अधिकारियों की सतर्कता जाँच भी इसके दायरे में आती है? 2016 में ऐसी ही अधिसूचना वापस ली जा चुकी है। अब सरकार को हलफनामा देना होगा।

मुख्य बातें

केरल उच्च न्यायालय ने 28 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार को VACB के T1 और T2 सेक्शन की RTI छूट पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
22 अक्टूबर 2026 की सरकारी अधिसूचना के तहत VACB के दो सेक्शन को RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत छूट दी गई थी।
याचिकाकर्ता का तर्क: VACB एक आपराधिक जाँच एजेंसी है, इसे केवल अधिसूचना से खुफिया/सुरक्षा संगठन नहीं माना जा सकता।
2006 की मूल छूट सूची में VACB शामिल नहीं था; 2016 में भी ऐसी ही अधिसूचना हाई कोर्ट में चुनौती के बाद वापस ली गई थी।
अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद ; हाई कोर्ट ने अधिसूचना की वैधता पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया।

केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को कोच्चि में राज्य सरकार से स्पष्टीकरण माँगा कि क्या सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध की जाने वाली सतर्कता जाँच (विजिलेंस इंक्वायरी), सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के अंतर्गत सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) के दो विभागों को दी गई छूट के दायरे में आती है या नहीं। यह मामला सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसे 22 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया था।

मामले का मुख्य घटनाक्रम

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति वी.एम. श्याम कुमार की खंडपीठ ने राज्य सरकार को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस हलफनामे में VACB के T1 और T2 सेक्शन द्वारा संभाली जाने वाली सूचनाओं की श्रेणियों का विस्तृत विवरण देना होगा, जिन्हें 22 अक्टूबर की अधिसूचना के ज़रिए RTI छूट का दायरा दिया गया था।

अदालत ने रेखांकित किया कि ये दोनों सेक्शन सतर्कता जाँच, खुफिया इनपुट, तलाशी रिपोर्ट और सतर्कता कार्यवाही से संबंधित अन्य जानकारियों को संभालते हैं। पीठ ने माना कि इनमें से कुछ सूचनाएँ संवेदनशील हो सकती हैं, लेकिन सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध की जाने वाली जाँच भी इसी छूट के अंतर्गत आती है — यह बिंदु स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है। इस मामले पर तीन सप्ताह बाद पुनः सुनवाई होगी।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता का तर्क है कि VACB मूलतः एक आपराधिक जाँच एजेंसी है, जो लोक सेवकों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच करती है। केवल एक प्रशासनिक अधिसूचना के माध्यम से इसे खुफिया या सुरक्षा संगठन का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

याचिका में बताया गया कि 7 फरवरी 2006 के सरकारी आदेश के तहत जिन आठ संगठनों को RTI छूट दी गई थी, उनमें VACB का नाम शामिल नहीं था। गौरतलब है कि 2016 में राज्य सरकार ने एक ऐसी ही अधिसूचना को वापस ले लिया था, जब उसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी — यह दूसरी बार है जब इस प्रकार का कदम कानूनी जाँच के दायरे में आया है।

RTI कानून और मौजूदा प्रावधान

RTI अधिनियम की धारा 24(4) राज्य सरकारों को यह अधिकार देती है कि वे 'ऑफिशियल गजट' में अधिसूचना जारी करके कुछ विशिष्ट खुफिया और सुरक्षा संगठनों को अधिनियम के दायरे से बाहर रख सकती हैं। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि RTI अधिनियम में पहले से ही संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त छूट के प्रावधान मौजूद हैं, जिनमें ऐसी सामग्री शामिल है जिसके खुलासे से जाँच में बाधा आ सकती है या व्यक्तियों की जान को खतरा हो सकता है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले — 'स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट बनाम कामता प्रसाद मिश्रा एवं अन्य' — का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि भ्रष्टाचार की जाँच करने वाली एजेंसी को धारा 24(4) के तहत स्वतः खुफिया या सुरक्षा संगठन नहीं माना जा सकता।

जनता की निगरानी पर संभावित असर

याचिका में आरोप लगाया गया है कि 22 अक्टूबर की अधिसूचना का हवाला देकर VACB के सूचना अधिकारी अब सतर्कता जाँच, प्रारंभिक सत्यापन, क्लोजर रिपोर्ट और अभियोजन की मंजूरी से जुड़ी सूचनाओं के अनुरोधों को खारिज कर रहे हैं। याचिकाकर्ता की चिंता है कि इन दोनों सेक्शन को संपूर्ण छूट देने से राज्य की भ्रष्टाचार-रोधी मशीनरी पर जनता की निगरानी सीमित हो सकती है।

आगे क्या होगा

याचिका में 22 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना को रद्द करने और VACB के T1 व T2 सेक्शन पर RTI अधिनियम को पूर्णतः लागू रखने की माँग की गई है, ताकि कानूनी रूप से उपलब्ध जानकारी प्राप्त की जा सके। हाई कोर्ट ने अभी तक अधिसूचना की वैधता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है; अगली सुनवाई में सरकार का हलफनामा इस मामले की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो समूचे सेक्शन को छूट देने की ज़रूरत क्यों पड़ी — यह व्यापक छूट जनता की निगरानी को कमज़ोर करती है, जो भ्रष्टाचार-विरोधी मशीनरी की विश्वसनीयता के लिए अनिवार्य है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाई कोर्ट ने VACB की RTI छूट पर क्या आदेश दिया?
केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें VACB के T1 और T2 सेक्शन द्वारा संभाली जाने वाली सूचनाओं की श्रेणियाँ स्पष्ट करनी होंगी। अदालत ने जानना चाहा कि क्या अधिकारियों के विरुद्ध सतर्कता जाँच भी 22 अक्टूबर की अधिसूचना द्वारा दी गई छूट के दायरे में आती है।
22 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना में क्या था?
केरल सरकार ने 22 अक्टूबर 2026 को एक अधिसूचना जारी कर VACB के T1 और T2 सेक्शन को RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत छूट दी, जो सामान्यतः खुफिया और सुरक्षा संगठनों को दी जाती है। इसके बाद VACB के सूचना अधिकारी सतर्कता जाँच, क्लोजर रिपोर्ट और अभियोजन मंजूरी से जुड़े RTI अनुरोधों को खारिज करने लगे।
याचिकाकर्ता ने VACB छूट को क्यों चुनौती दी?
याचिकाकर्ता का तर्क है कि VACB एक आपराधिक जाँच एजेंसी है, न कि खुफिया या सुरक्षा संगठन, इसलिए इसे धारा 24(4) के तहत छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के 'स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट बनाम कामता प्रसाद मिश्रा' फैसले और 2016 की वापस ली गई अधिसूचना का भी हवाला दिया।
क्या VACB को पहले भी RTI से छूट मिली थी?
नहीं। 7 फरवरी 2006 के सरकारी आदेश में जिन आठ संगठनों को छूट दी गई थी, उनमें VACB शामिल नहीं था। 2016 में एक ऐसी ही अधिसूचना को हाई कोर्ट में चुनौती मिलने के बाद राज्य सरकार ने उसे वापस ले लिया था।
इस मामले पर अगली सुनवाई कब होगी?
केरल उच्च न्यायालय ने इस मामले पर तीन सप्ताह बाद पुनः सुनवाई निर्धारित की है। तब तक सरकार को हलफनामा दाखिल करना होगा; अदालत ने अभी तक 22 अक्टूबर की अधिसूचना की वैधता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है।
राष्ट्र प्रेस
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