ईडी के निशाने पर बड़ा ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क; नई शिकायत में समुंदर सिंह राठौड़ समेत कई नामों पर जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 13 अक्टूबर 2026 को ऑनलाइन बेटिंग और साइबर फ्रॉड से जुड़े कथित नेटवर्क के खिलाफ मुंबई, पुणे, मेहसाणा, सूरत और हैदराबाद में 20 स्थानों पर छापेमारी की थी। अब इस मामले ने नया मोड़ लिया है — 24 अक्टूबर 2026 को दर्ज एक नई शिकायत में कथित तौर पर समुंदर सिंह राठौड़, मुकेश जैन और पहले से गिरफ्तार एडसम फिनटेक के संस्थापक राम यू. रामधानी के वित्तीय संबंधों की व्यापक जांच की माँग की गई है।
छापेमारी की पृष्ठभूमि और ईडी की जांच
ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म ऑल पैनल एक्सचेंज और एमजीएम91 से जुड़े कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच शुरू की। एजेंसी के अनुसार, इन प्लेटफॉर्मों के जरिए पीड़ितों से एकत्र किया गया धन पुणे स्थित एडसम फिनटेक के नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया जाता था।
जांच में यह भी कथित तौर पर सामने आया कि कंपनी ने 'आईपैसा' नामक एक पेमेंट इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म विकसित किया था, जिसके जरिए 200 से अधिक शेल और फ्रंट कंपनियों को जोड़ा गया था। तलाशी के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए तथा अनेक बैंक खातों को फ्रीज किया गया।
धन विदेश भेजने के कथित तरीके
ईडी की जांच में कथित तौर पर तीन प्रमुख तरीकों से अवैध धन विदेश भेजने का खुलासा हुआ है। पहला — ओवर-इनवॉयसिंग दिखाकर व्यापारिक लेनदेन के रूप में धन विदेश भेजना। दूसरा — एपीएमसी यूनिट्स के नाम पर खोले गए म्यूल खातों से नकद निकासी। तीसरा — धन को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर भारत से बाहर ट्रांसफर करना।
ईडी का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क म्यूल बैंक खातों, डिजिटल भुगतान माध्यमों और कथित तौर पर दुबई से संचालित निर्देशों के आधार पर काम कर रहा था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में ऑनलाइन बेटिंग और साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
नई शिकायत में क्या है
संतोष घोलप नामक शिकायतकर्ता ने 24 अक्टूबर 2026 को आठ केंद्रीय एजेंसियों को एक विस्तृत शिकायत सौंपी। शिकायत में दावा किया गया है कि ऑल पैनल एक्सचेंज एक बड़े नेटवर्क का महज एक हिस्सा है। कथित तौर पर समुंदर सिंह राठौड़ को इस नेटवर्क के प्रमुख संचालकों में शामिल बताया गया है।
शिकायत में ऑनलाइन बेटिंग एक्सचेंज, मटका प्लेटफॉर्म, साइबर फ्रॉड नेटवर्क, डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी और गोवा स्थित कैसीनो कारोबार से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की माँग की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, मुंबई, पुणे, गोवा, दिल्ली और बेंगलुरु में छोटे कार्यालयों के माध्यम से बड़ी संख्या में म्यूल बैंक अकाउंट और यूपीआई आईडी संचालित किए जाते थे।
शिकायत के प्रमुख आरोप और दावे
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उसके पास करीब 20,442 कैसीनो खिलाड़ियों के नाम, मोबाइल नंबर और लेनदेन विवरण उपलब्ध हैं। इसके अलावा 17 बैंक खातों और 46 व्यक्तियों की सूची भी जांच एजेंसियों को सौंपी गई है। कथित तौर पर रोजाना हजारों करोड़ रुपए के लेनदेन को विभिन्न माध्यमों से संचालित किया जाता था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि गोवा के एक कैसीनो के प्रस्तावित अधिग्रहण में ₹900 करोड़ की डील की योजना थी, जिसमें कथित तौर पर ₹200 करोड़ आधिकारिक रिकॉर्ड में और ₹700 करोड़ ऑफ-द-रिकॉर्ड भुगतान के रूप में दिए जाने का प्रस्ताव था। साथ ही महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन को सुविधा उपलब्ध कराने के आरोप भी लगाए गए हैं।
आगे की जांच की संभावना
गौरतलब है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और जांच एजेंसियों की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। एडसम फिनटेक के संस्थापक राम यू. रामधानी पहले ही गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां ईडी की पूर्व कार्रवाई और नई शिकायत के आरोपों के बीच संभावित वित्तीय संबंधों, बैंक खातों, भुगतान श्रृंखला (पेमेंट ट्रेल) और अंतिम लाभार्थियों की भूमिका की जांच कर सकती हैं। मामले की जांच जारी है और आने वाले हफ्तों में इस प्रकरण में नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।