28 अक्टूबर 2026
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संयुक्त राष्ट्र में चीन की अपील: अमेरिका-ईरान संघर्ष रोकें, कूटनीतिक बातचीत बहाल करें

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संयुक्त राष्ट्र में चीन की अपील: अमेरिका-ईरान संघर्ष रोकें, कूटनीतिक बातचीत बहाल करें

सारांश

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने साफ कहा — अमेरिका की 'अधिकतम दबाव' नीति और ईरान की परमाणु सुविधाओं पर सैन्य हमले ही मौजूदा गतिरोध की जड़ हैं। बीजिंग ने सभी पक्षों से युद्ध रोककर कूटनीति की राह चुनने की अपील की।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने 28 अक्टूबर 2026 को सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका-ईरान संघर्ष रोकने की अपील की।
चीन ने अमेरिका की 'अधिकतम दबाव' नीति और परमाणु समझौते से एकतरफा बाहर निकलने को मौजूदा गतिरोध की प्रमुख वजह बताया।
अमेरिका और इज़रायल द्वारा IAEA निगरानी में चल रही ईरानी परमाणु सुविधाओं पर दो बार सैन्य हमले किए गए, जिससे निगरानी कार्य प्रभावित हुआ।
चीन ने UNSC प्रस्ताव 2231 का हवाला देते हुए कहा कि समाधान केवल कूटनीतिक वार्ता से संभव है।
फू त्सोंग ने अमेरिका से ईरान पर सैन्य हमला न करने की प्रतिबद्धता जताने की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने 28 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बैठक में अमेरिका, ईरान और अन्य सभी पक्षों से तत्काल संघर्ष रोकने तथा कूटनीतिक वार्ता बहाल करने की अपील की। यह बैठक ईरान के परमाणु मुद्दे पर बुलाई गई थी, जहाँ बीजिंग ने स्पष्ट संदेश दिया कि क्षेत्रीय तनाव वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बन रहा है।

मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव

फू त्सोंग ने सुरक्षा परिषद को बताया कि मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिसका प्रतिकूल असर क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत इस समय ठप पड़ी है। साथ ही, ईरान के विरुद्ध नई सैन्य कार्रवाई की तैयारियों से जुड़ी खबरें स्थिति को और अधिक विस्फोटक बना रही हैं।

गतिरोध की जड़: अमेरिका की 'अधिकतम दबाव' नीति

फू त्सोंग के अनुसार, मौजूदा गतिरोध की प्रमुख वजह अमेरिका का ईरान परमाणु समझौते से एकतरफा बाहर निकलना, प्रतिबंधों को पुनः लागू करना और 'अधिकतम दबाव' की नीति अपनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप के तीन देशों ने परमाणु समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी नहीं कीं, फिर भी उन्होंने अमेरिकी एकतरफा प्रतिबंधों का समर्थन किया।

चीनी प्रतिनिधि ने कहा कि इन देशों द्वारा प्रतिबंधों को तेज़ी से पुनः लागू करने की प्रक्रिया कानूनी और प्रक्रियागत दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है। उनका मानना है कि इससे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एकजुटता और विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँचा है।

IAEA निगरानी पर सैन्य हमलों का असर

फू त्सोंग ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़रायल ने दो बार ईरान की उन परमाणु सुविधाओं पर सैन्य हमले किए जो अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में थीं। उनके अनुसार, इन हमलों के कारण IAEA के लिए उन सुविधाओं की निगरानी जारी रखना कठिन हो गया है। इन परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ करते हुए कुछ देशों ने IAEA में ईरान की निगरानी से जुड़ा प्रस्ताव पारित कराया, जिसे फू त्सोंग ने राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित कदम बताया।

चीन का रुख: कूटनीति और परमाणु अप्रसार दोनों जरूरी

फू त्सोंग ने जोर देकर कहा कि ईरान परमाणु समझौते और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2231 से यह स्पष्ट होता है कि परमाणु मुद्दे का समाधान केवल राजनीतिक और कूटनीतिक वार्ता से ही संभव है। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित न करने की अपनी प्रतिबद्धता का पालन करना चाहिए।

साथ ही, उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के सदस्य के रूप में ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उपयोग के अधिकार का सम्मान करें। चीनी प्रतिनिधि ने अमेरिका से ईरान पर सैन्य हमला न करने की प्रतिबद्धता जताने का भी आग्रह किया, ताकि बिना किसी सैन्य दबाव के परमाणु निगरानी प्रभावी ढंग से जारी रह सके।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में कई मोर्चों पर तनाव चरम पर है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय कूटनीतिक समाधान की तलाश में है। गौरतलब है कि चीन परमाणु समझौते के मूल हस्ताक्षरकर्ता देशों में से एक है और वह लगातार वार्ता की वकालत करता रहा है। आने वाले हफ्तों में सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर और चर्चा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर ईरान पर प्रतिबंधों को 'अवैध' ठहराकर उसे कूटनीतिक संरक्षण देता है। मध्य पूर्व में दो बार हो चुके सैन्य हमलों के बाद IAEA की निगरानी क्षमता वास्तव में कमज़ोर हुई है — यह एक तथ्यात्मक संकट है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। आगे सवाल यह है कि क्या वार्ता की यह अपील किसी ठोस मध्यस्थता प्रस्ताव में तब्दील होगी, या यह केवल भू-राजनीतिक स्थिति-निर्माण तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका और ईरान से क्या अपील की?
चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने 28 अक्टूबर 2026 को सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका और ईरान समेत सभी पक्षों से संघर्ष तत्काल रोकने और कूटनीतिक वार्ता बहाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि परमाणु मुद्दे का समाधान केवल राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यम से ही संभव है।
चीन के अनुसार मौजूदा गतिरोध की प्रमुख वजह क्या है?
फू त्सोंग ने कहा कि अमेरिका का ईरान परमाणु समझौते से एकतरफा बाहर निकलना, प्रतिबंधों को फिर से लागू करना और 'अधिकतम दबाव' की नीति अपनाना मौजूदा गतिरोध की प्रमुख वजह है। उन्होंने यूरोपीय देशों पर भी समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियाँ न निभाने का आरोप लगाया।
IAEA की निगरानी पर सैन्य हमलों का क्या असर हुआ?
चीन के अनुसार अमेरिका और इज़रायल ने IAEA की निगरानी में चल रही ईरानी परमाणु सुविधाओं पर दो बार सैन्य हमले किए। इन हमलों के बाद IAEA के लिए उन सुविधाओं की निगरानी जारी रखना कठिन हो गया, जिससे परमाणु पारदर्शिता बाधित हुई।
चीन ने अमेरिका से क्या विशेष माँग की?
फू त्सोंग ने अमेरिका से ईरान पर सैन्य हमला न करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता जताने की अपील की। उनका कहना था कि सैन्य दबाव के बिना ही IAEA की परमाणु निगरानी प्रभावी ढंग से जारी रह सकती है।
UNSC प्रस्ताव 2231 का ईरान मुद्दे में क्या महत्व है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव संख्या 2231 ईरान परमाणु समझौते को अंतर्राष्ट्रीय कानूनी आधार देता है। चीन ने इसी प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि परमाणु मुद्दे का समाधान बातचीत से ही होना चाहिए, न कि सैन्य दबाव या एकतरफा प्रतिबंधों से।
राष्ट्र प्रेस
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