28 अक्टूबर 2026
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क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंध तुरंत हटाए जाएं — संयुक्त राष्ट्र में चीन की कड़ी माँग

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क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंध तुरंत हटाए जाएं — संयुक्त राष्ट्र में चीन की कड़ी माँग

सारांश

संयुक्त राष्ट्र महासभा में चीन ने 60 साल पुरानी अमेरिकी नाकेबंदी के खिलाफ मुखर आवाज़ उठाई — और यह सिर्फ क्यूबा के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर अमेरिकी एकतरफा नीतियों को चुनौती देने की बीजिंग की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने 28 अक्टूबर 2026 को महासभा में अमेरिका से क्यूबा पर प्रतिबंध हटाने की माँग की।
अमेरिकी आर्थिक नाकेबंदी 60 वर्षों से अधिक समय से जारी है; महासभा इस मुद्दे पर 34 बार चर्चा कर चुकी है।
चीन ने क्यूबा को अमेरिका की 'आतंकवाद प्रायोजक देशों' की सूची से हटाने की माँग की।
फू त्सोंग ने कहा कि सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का कोई अंतर्राष्ट्रीय कानूनी आधार नहीं है।
चीन ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तीसरे देशों के ज़रिये लगाए जाने वाले द्वितीयक प्रतिबंधों को भी समाप्त करने की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने 28 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका से क्यूबा के विरुद्ध दशकों से जारी आर्थिक नाकेबंदी और एकतरफा दबाव को तत्काल समाप्त करने की माँग की। यह वक्तव्य महासभा में 'क्यूबा के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय नाकेबंदी को समाप्त करना अनिवार्य है' विषय पर आयोजित चर्चा के दौरान सामने आया।

60 वर्षों से जारी नाकेबंदी का मुद्दा

फू त्सोंग ने रेखांकित किया कि अमेरिका की यह आर्थिक नाकेबंदी और एकतरफा प्रतिबंध 60 वर्षों से भी अधिक समय से लागू हैं और इन्हें अभी भी और सख्त बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा इस मुद्दे पर अब तक लगातार 34 बार विचार-विमर्श कर चुकी है, फिर भी संबंधित प्रस्ताव धरातल पर लागू नहीं हो सका है। यह स्थिति, उनके अनुसार, क्यूबा की जनता की कठिनाइयों के साथ-साथ अमेरिका की 'प्रभुत्ववादी नीति' को भी उजागर करती है।

चीन का रुख: न्याय और संप्रभुता के साथ

चीन ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर 'ऐतिहासिक न्याय, मानवता के साझा मूल्यों और समानता के सिद्धांतों' के पक्ष में खड़ा है। बीजिंग ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर क्यूबा की राष्ट्रीय गरिमा और संप्रभु समानता की रक्षा करने तथा अमेरिका पर प्रतिबंध हटाने के लिए दबाव बनाने की अपील की।

फू त्सोंग ने तर्क दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का कोई वैध अंतर्राष्ट्रीय कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर देश को अपनी सामाजिक व्यवस्था और विकास-पथ चुनने का अधिकार है तथा किसी भी बाहरी शक्ति को अपनी इच्छा थोपने, प्रतिबंध लगाने या सैन्य धमकी देने का अधिकार नहीं है।

आतंकवाद सूची से हटाने की माँग

चीन ने अमेरिका से यह भी माँग की कि क्यूबा को 'आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों' की अमेरिकी सूची से तत्काल हटाया जाए। साथ ही, तीसरे देशों के माध्यम से लगाए जाने वाले द्वितीयक प्रतिबंधों को भी समाप्त करने की अपील की गई।

व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब चीन-अमेरिका संबंध पहले से ही व्यापार, तकनीक और क्षेत्रीय प्रभाव के मुद्दों पर तनावपूर्ण हैं। क्यूबा पर चीन का यह सार्वजनिक और मुखर रुख, संयुक्त राष्ट्र मंच पर अमेरिकी नीतियों को चुनौती देने की बीजिंग की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। चीन के मुताबिक, इस तरह के कदम संयुक्त राष्ट्र केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय कानून पर आधारित वैश्विक ढाँचे की रक्षा के लिए अनिवार्य हैं।

आगे क्या होगा

संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह प्रस्ताव पहले भी भारी बहुमत से पारित हो चुका है, लेकिन इसके क्रियान्वयन की बाधा अमेरिका की नीति में बदलाव पर निर्भर रहती है। आलोचकों का कहना है कि जब तक सुरक्षा परिषद में बाध्यकारी प्रस्ताव नहीं आता, तब तक महासभा के संकल्प प्रतीकात्मक ही रहेंगे। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नज़र अब इस पर है कि अमेरिका इन माँगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि बीजिंग इस मंच का इस्तेमाल अमेरिकी एकपक्षीयता को वैश्विक स्तर पर बदनाम करने के लिए रणनीतिक रूप से कर रहा है। यह कूटनीतिक बयानबाज़ी उस बड़े भू-राजनीतिक खेल का हिस्सा है जिसमें चीन खुद को 'ग्लोबल साउथ' के रक्षक के रूप में पेश कर रहा है। जब तक सुरक्षा परिषद में अमेरिकी वीटो बाधा बनी रहेगी, तब तक ये प्रस्ताव कूटनीतिक प्रतीकवाद से आगे नहीं बढ़ेंगे।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र में चीन ने क्यूबा के समर्थन में क्या कहा?
चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने 28 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका से क्यूबा पर 60 साल से जारी आर्थिक नाकेबंदी और एकतरफा प्रतिबंध तत्काल समाप्त करने की माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि क्यूबा को अमेरिका की 'आतंकवाद प्रायोजक देशों' की सूची से हटाया जाए।
क्यूबा पर अमेरिकी नाकेबंदी कब से जारी है?
अमेरिका की आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय नाकेबंदी 60 वर्षों से भी अधिक समय से क्यूबा पर लागू है। संयुक्त राष्ट्र महासभा इस विषय पर अब तक 34 बार विचार-विमर्श कर चुकी है, लेकिन इससे संबंधित प्रस्ताव अभी तक लागू नहीं हो सका है।
चीन के अनुसार अमेरिकी एकतरफा प्रतिबंध क्यों अवैध हैं?
फू त्सोंग के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का कोई वैध अंतर्राष्ट्रीय कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि हर देश को अपनी सामाजिक व्यवस्था और विकास-पथ चुनने का संप्रभु अधिकार है।
चीन ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से क्या अपील की?
चीन ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर क्यूबा की राष्ट्रीय गरिमा और संप्रभु समानता की रक्षा करने की अपील की। साथ ही, तीसरे देशों के माध्यम से लगाए जाने वाले द्वितीयक प्रतिबंधों को भी तत्काल खत्म करने की माँग रखी गई।
इस माँग का व्यापक भू-राजनीतिक अर्थ क्या है?
आलोचकों का कहना है कि चीन का यह रुख केवल क्यूबा के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संयुक्त राष्ट्र मंच पर अमेरिकी एकपक्षीय नीतियों को चुनौती देने और 'ग्लोबल साउथ' में अपनी साख मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। हालाँकि, सुरक्षा परिषद में अमेरिकी वीटो के चलते इन प्रस्तावों की बाध्यकारी शक्ति सीमित रहती है।
राष्ट्र प्रेस
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