2 अक्टूबर 2026
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संयुक्त राष्ट्र में चीन का बड़ा बयान: 28 देशों संग एकतरफा प्रतिबंधों को तत्काल हटाने की माँग

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संयुक्त राष्ट्र में चीन का बड़ा बयान: 28 देशों संग एकतरफा प्रतिबंधों को तत्काल हटाने की माँग

सारांश

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने 28 देशों की तरफ से महासभा में एकतरफा प्रतिबंधों को 'अवैध' और 'संयुक्त राष्ट्र चार्टर के विरुद्ध' बताया और पश्चिमी देशों से इन्हें तत्काल वापस लेने की माँग की — यह वैश्विक दक्षिण के बढ़ते राजनयिक दबाव का स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने 2 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में बयान दिया।
28 समान विचारधारा वाले देशों ने संयुक्त रूप से एकतरफा दंडात्मक उपायों का विरोध दर्ज कराया।
बयान में कहा गया कि ये उपाय संयुक्त राष्ट्र चार्टर , बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध हैं।
द्वितीयक प्रतिबंध और अत्यधिक अनुपालन से खाद्य, ऊर्जा और वित्तीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है।
पश्चिमी देशों से सभी एकतरफा उपायों को तत्काल और बिना शर्त वापस लेने का आह्वान किया गया।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने 2 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में 28 समान विचारधारा वाले देशों की तरफ से एक संयुक्त बयान पढ़ा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकतरफा दंडात्मक उपायों पर कड़ाई से रोक लगाने का आह्वान किया गया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधों के इस्तेमाल को लेकर विकासशील देशों में असंतोष तेज़ी से बढ़ रहा है।

मुख्य बयान और तर्क

फू थ्सोंग ने कहा कि इस समय एकतरफावाद व्यापक रूप से बढ़ रहा है और एकतरफा दंडात्मक उपायों का इस्तेमाल लगातार जारी है। उनके अनुसार, इतिहास गवाह है कि ऐसे उपाय अंतरराष्ट्रीय अव्यवस्था और विश्व व्यवस्था में गड़बड़ी के प्रमुख कारणों में से रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुटता और सहयोग को मजबूत करने और इन 'अवैध प्रथाओं' पर प्रभावी ढंग से रोक लगाने का आग्रह किया।

विकासशील देशों पर असर

फू थ्सोंग ने कहा कि विकासशील देश और उनकी जनता लंबे समय से एकतरफा दंडात्मक उपायों के नकारात्मक प्रभाव झेल रही है। उनके अनुसार, ये उपाय संप्रभु समानता और सहयोग के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल देते हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों व सिद्धांतों के विरुद्ध हैं। साथ ही, ये बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के भी खिलाफ बताए गए।

मानवीय और आर्थिक चुनौतियाँ

बयान में चेतावनी दी गई कि एकतरफा दंडात्मक उपाय, द्वितीयक प्रतिबंध और अत्यधिक अनुपालन आवश्यकताएँ मौजूदा मानवीय और आर्थिक चुनौतियों को और गहरा कर रहे हैं। इससे खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है, और कई मामलों में आम लोगों के जीवन पर भी खतरा उत्पन्न हो रहा है।

पश्चिमी देशों से सीधी अपील

फू थ्सोंग ने 28 देशों का हवाला देते हुए कुछ पश्चिमी देशों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की न्यायसंगत अपीलों पर ध्यान देने और सभी एकतरफा दंडात्मक उपायों को तत्काल तथा बिना शर्त वापस लेने का आह्वान किया। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय कई बार ऐसे उपायों को हटाने की अपील कर चुका है, लेकिन कथित तौर पर इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

आगे की दिशा

यह बयान संयुक्त राष्ट्र में चीन के नेतृत्व में विकासशील देशों के बढ़ते समन्वय का संकेत देता है। आलोचकों का कहना है कि यह पहल पश्चिमी प्रतिबंध-नीति के विरुद्ध एक व्यापक राजनयिक दबाव का हिस्सा है। आने वाले सत्रों में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे सिर्फ एक नैतिक आह्वान मानना भूल होगी — यह चीन की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह 'ग्लोबल साउथ' का नेतृत्व करते हुए पश्चिमी प्रतिबंध-तंत्र को संयुक्त राष्ट्र मंच पर चुनौती देता है। आलोचक यह भी बताते हैं कि खुद चीन अपने कुछ व्यापारिक और राजनयिक कदमों में एकतरफा दबाव का इस्तेमाल करता रहा है, जो इस बयान की नैतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। 28 देशों का समर्थन संख्या में प्रभावशाली दिखता है, पर यह देखना ज़रूरी है कि इनमें से कितने देश इस मुद्दे पर किसी बाध्यकारी प्रस्ताव का समर्थन करेंगे। असली परिणाम तब आएगा जब यह राजनयिक बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढाँचे में तब्दील हो।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र में चीन ने एकतरफा दंडात्मक उपायों पर क्या कहा?
चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने 2 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में 28 देशों की ओर से बयान देते हुए एकतरफा दंडात्मक उपायों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया। उन्होंने पश्चिमी देशों से इन उपायों को तत्काल और बिना शर्त वापस लेने का आह्वान किया।
एकतरफा दंडात्मक उपाय विकासशील देशों को कैसे प्रभावित करते हैं?
बयान के अनुसार, ये उपाय विकासशील देशों की खाद्य, ऊर्जा और वित्तीय सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं और कई मामलों में आम नागरिकों के जीवन के लिए भी खतरा उत्पन्न करते हैं। द्वितीयक प्रतिबंध और अत्यधिक अनुपालन आवश्यकताएँ मौजूदा मानवीय संकटों को और गहरा करती हैं।
इस संयुक्त बयान में कितने देश शामिल थे?
यह संयुक्त बयान 28 समान विचारधारा वाले देशों की ओर से दिया गया। चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने इन देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए महासभा की तीसरी समिति में यह वक्तव्य पढ़ा।
क्या एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध हैं?
चीन और 28 देशों का तर्क है कि एकतरफा दंडात्मक उपाय संप्रभु समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों के विरुद्ध हैं। हालाँकि, कई पश्चिमी देश इन्हें अपनी विदेश नीति का वैध हिस्सा मानते हैं — यह विषय अंतरराष्ट्रीय कानून में विवादास्पद बना हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे पर आगे क्या हो सकता है?
यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के चल रहे सत्र के दौरान आया है और आने वाले सत्रों में इस पर बहस तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, विकासशील देशों का यह बढ़ता समन्वय किसी बाध्यकारी प्रस्ताव की दिशा में एक राजनयिक दबाव रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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