8 अक्टूबर 2026
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संयुक्त राष्ट्र में 'वैश्विक शासन के मित्रों के समूह' का आह्वान: अंतर्राष्ट्रीय कानून और UN चार्टर का पालन करें

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संयुक्त राष्ट्र में 'वैश्विक शासन के मित्रों के समूह' का आह्वान: अंतर्राष्ट्रीय कानून और UN चार्टर का पालन करें

सारांश

'वैश्विक शासन के मित्रों के समूह' का संयुक्त राष्ट्र में यह बयान सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं — यह एकतरफावाद, दोहरे मापदंड और बल प्रयोग के खिलाफ एक सुनियोजित बहुपक्षीय संदेश है, जो मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच अंतर्राष्ट्रीय कानून की केंद्रीयता को पुनर्स्थापित करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि सुन लेई ने 7 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में 'वैश्विक शासन के मित्रों के समूह' की ओर से संयुक्त बयान दिया।
बयान में क्षेत्रीय संघर्षों , एकतरफावाद और सत्ता की राजनीति को अंतर्राष्ट्रीय कानून के लिए गंभीर खतरा बताया गया।
संप्रभुता के सिद्धांत को आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की आधारशिला बताते हुए सभी देशों की संप्रभुता और गरिमा के सम्मान पर ज़ोर दिया गया।
दोहरे मापदंड और चयनात्मक अनुप्रयोग का पुरजोर विरोध; अंतर्राष्ट्रीय नियमों के समान अनुप्रयोग की माँग।
सभी देशों को विवाद समाधान के अपने तरीके चुनने का अधिकार; बल प्रयोग या बल के खतरे का विरोध।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि सुन लेई ने 7 अक्टूबर 2026 को महासभा की छठी समिति में 'वैश्विक शासन के मित्रों के समूह' की ओर से एक संयुक्त बयान पेश किया, जिसमें सभी पक्षों से संयुक्त राष्ट्र चार्टर की सर्वोच्चता को बनाए रखने और अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन का सख्ती से पालन करने का आह्वान किया गया। यह बयान 'घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कानून का शासन' एजेंडा मद के अंतर्गत दिया गया।

वैश्विक परिस्थिति पर चिंता

संयुक्त बयान में वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य को गहरी अशांति से ग्रस्त बताया गया। बयान के अनुसार, क्षेत्रीय संघर्ष एक के बाद एक उभर रहे हैं, एकतरफावाद और सत्ता की राजनीति चरम सीमा पर पहुँच चुकी है, और वैश्विक प्रतिद्वंद्विता तेज़ी से बढ़ रही है। इन परिस्थितियों में अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन को गंभीर क्षति हो रही है और मानवीय शांति तथा सुरक्षा कठिन चुनौतियों का सामना कर रही है।

मुख्य घटनाक्रम: बयान के प्रमुख बिंदु

बयान में स्पष्ट किया गया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन की नींव UN चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के पालन में निहित है। समूह ने कहा कि सभी पक्षों को अंतर्राष्ट्रीय कानून की प्रामाणिकता और गंभीरता की रक्षा करनी चाहिए और इस पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को सामूहिक रूप से सुरक्षित रखना चाहिए।

बयान में संप्रभुता के सिद्धांत को आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की आधारशिला घोषित किया गया और ज़ोर देकर कहा गया कि सभी राज्यों की संप्रभुता और गरिमा का सम्मान अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब कई क्षेत्रों में संप्रभुता उल्लंघन के आरोप लगातार सुर्खियों में हैं।

दोहरे मापदंड का विरोध

समूह ने अंतर्राष्ट्रीय नियमों के समान और एकसमान अनुप्रयोग को संप्रभु समानता की अनिवार्य शर्त बताया। बयान में कहा गया कि सभी राज्यों के अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत समान अधिकार और दायित्व हैं, और दोहरे मापदंड तथा चयनात्मक अनुप्रयोग का पुरजोर विरोध किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि यह आह्वान पश्चिमी देशों द्वारा विभिन्न संघर्षों में अपनाए गए भिन्न रुखों की पृष्ठभूमि में किया गया है।

विवाद समाधान पर रुख

बयान में स्पष्ट किया गया कि सभी देशों को विवाद समाधान के अपने तरीके चुनने का अधिकार है। 'वैश्विक शासन के मित्रों के समूह' ने UN चार्टर के अनुसार और प्रत्येक देश द्वारा चुने गए तरीकों के माध्यम से सीमा विवादों सहित सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग या बल के खतरे का स्पष्ट विरोध किया गया।

आगे क्या होगा

इस संयुक्त बयान के बाद महासभा की छठी समिति में आगे की चर्चाओं में इन मुद्दों पर विभिन्न देशों के रुख स्पष्ट होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान उन देशों के बीच बढ़ती सहमति का संकेत है जो पश्चिमी-नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था के एकाधिकार को चुनौती देते हैं। बहुपक्षवाद की दिशा में यह पहल वैश्विक शासन के ढाँचे पर होने वाली आगामी बहसों में अहम भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अंतर्राष्ट्रीय कानून की व्याख्या अपनी सुविधानुसार करते हैं। 'दोहरे मापदंड और चयनात्मक अनुप्रयोग' का विरोध उक्रेन, गाज़ा और दक्षिण चीन सागर जैसे संदर्भों में बहस को नई दिशा देता है। हालाँकि, यह समूह स्वयं चीन के नेतृत्व में है, जिस पर कथित तौर पर तिब्बत, शिनजियांग और ताइवान जैसे मुद्दों पर संप्रभुता के चुनिंदा अनुप्रयोग के आरोप लगते रहे हैं — यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनदेखा रह जाता है। बहुपक्षवाद की असली परीक्षा तब होगी जब यही समूह अपने सदस्य देशों पर भी समान मापदंड लागू करने की इच्छाशक्ति दिखाए।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वैश्विक शासन के मित्रों का समूह' क्या है?
यह संयुक्त राष्ट्र में कई देशों का एक समूह है जो वैश्विक शासन, बहुपक्षवाद और अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक रूप से काम करता है। 7 अक्टूबर 2026 को इस समूह ने महासभा की छठी समिति में संयुक्त बयान दिया।
इस संयुक्त बयान में क्या माँगें रखी गई हैं?
बयान में UN चार्टर की सर्वोच्चता, सभी देशों की संप्रभुता और गरिमा का सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय नियमों का समान अनुप्रयोग, दोहरे मापदंडों का विरोध, और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया गया है। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग या बल के खतरे का विरोध किया गया है।
यह बयान किस वैश्विक पृष्ठभूमि में आया है?
बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ रहे हैं, एकतरफावाद और सत्ता की राजनीति तेज हो रही है, और अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन पर दबाव बढ़ रहा है। मानवीय शांति और सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौतियाँ हैं।
सुन लेई ने किस भूमिका में यह बयान दिया?
सुन लेई संयुक्त राष्ट्र में चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि हैं। उन्होंने 7 अक्टूबर 2026 को महासभा की छठी समिति में 'वैश्विक शासन के मित्रों के समूह' की सामूहिक आवाज़ के रूप में यह संयुक्त बयान प्रस्तुत किया।
इस बयान का अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
यह बयान उन देशों के बढ़ते गठजोड़ का संकेत है जो एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, महासभा में आगामी चर्चाओं में यह बयान कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है, हालाँकि इसके व्यावहारिक प्रभाव सदस्य देशों की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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