संयुक्त राष्ट्र में 'वैश्विक शासन के मित्रों के समूह' का आह्वान: अंतर्राष्ट्रीय कानून और UN चार्टर का पालन करें
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि सुन लेई ने 7 अक्टूबर 2026 को महासभा की छठी समिति में 'वैश्विक शासन के मित्रों के समूह' की ओर से एक संयुक्त बयान पेश किया, जिसमें सभी पक्षों से संयुक्त राष्ट्र चार्टर की सर्वोच्चता को बनाए रखने और अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन का सख्ती से पालन करने का आह्वान किया गया। यह बयान 'घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कानून का शासन' एजेंडा मद के अंतर्गत दिया गया।
वैश्विक परिस्थिति पर चिंता
संयुक्त बयान में वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य को गहरी अशांति से ग्रस्त बताया गया। बयान के अनुसार, क्षेत्रीय संघर्ष एक के बाद एक उभर रहे हैं, एकतरफावाद और सत्ता की राजनीति चरम सीमा पर पहुँच चुकी है, और वैश्विक प्रतिद्वंद्विता तेज़ी से बढ़ रही है। इन परिस्थितियों में अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन को गंभीर क्षति हो रही है और मानवीय शांति तथा सुरक्षा कठिन चुनौतियों का सामना कर रही है।
मुख्य घटनाक्रम: बयान के प्रमुख बिंदु
बयान में स्पष्ट किया गया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन की नींव UN चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के पालन में निहित है। समूह ने कहा कि सभी पक्षों को अंतर्राष्ट्रीय कानून की प्रामाणिकता और गंभीरता की रक्षा करनी चाहिए और इस पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को सामूहिक रूप से सुरक्षित रखना चाहिए।
बयान में संप्रभुता के सिद्धांत को आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की आधारशिला घोषित किया गया और ज़ोर देकर कहा गया कि सभी राज्यों की संप्रभुता और गरिमा का सम्मान अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब कई क्षेत्रों में संप्रभुता उल्लंघन के आरोप लगातार सुर्खियों में हैं।
दोहरे मापदंड का विरोध
समूह ने अंतर्राष्ट्रीय नियमों के समान और एकसमान अनुप्रयोग को संप्रभु समानता की अनिवार्य शर्त बताया। बयान में कहा गया कि सभी राज्यों के अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत समान अधिकार और दायित्व हैं, और दोहरे मापदंड तथा चयनात्मक अनुप्रयोग का पुरजोर विरोध किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि यह आह्वान पश्चिमी देशों द्वारा विभिन्न संघर्षों में अपनाए गए भिन्न रुखों की पृष्ठभूमि में किया गया है।
विवाद समाधान पर रुख
बयान में स्पष्ट किया गया कि सभी देशों को विवाद समाधान के अपने तरीके चुनने का अधिकार है। 'वैश्विक शासन के मित्रों के समूह' ने UN चार्टर के अनुसार और प्रत्येक देश द्वारा चुने गए तरीकों के माध्यम से सीमा विवादों सहित सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग या बल के खतरे का स्पष्ट विरोध किया गया।
आगे क्या होगा
इस संयुक्त बयान के बाद महासभा की छठी समिति में आगे की चर्चाओं में इन मुद्दों पर विभिन्न देशों के रुख स्पष्ट होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान उन देशों के बीच बढ़ती सहमति का संकेत है जो पश्चिमी-नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था के एकाधिकार को चुनौती देते हैं। बहुपक्षवाद की दिशा में यह पहल वैश्विक शासन के ढाँचे पर होने वाली आगामी बहसों में अहम भूमिका निभा सकती है।