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UNSC सुधार पर चीन का रुख: विकसित देशों का प्रतिनिधित्व अधिशेष खत्म हो — फु त्सोंग

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UNSC सुधार पर चीन का रुख: विकसित देशों का प्रतिनिधित्व अधिशेष खत्म हो — फु त्सोंग

सारांश

चीनी प्रतिनिधि फु त्सोंग ने UN महासभा में साफ कहा — UNSC सुधार तब तक अधूरा है जब तक विकसित देशों का प्रतिनिधित्व अधिशेष खत्म नहीं होता। यह बयान वैश्विक दक्षिण की बढ़ती माँग के बीच आया है, जो 1945 के ढाँचे को बदलने की दिशा में दबाव बढ़ा रहा है।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थाई प्रतिनिधि फु त्सोंग ने 22 अक्टूबर 2026 को UN महासभा में UNSC सुधार पर चीन का आधिकारिक पक्ष रखा।
चीन का कहना है कि सुधार का लक्ष्य विकसित देशों के प्रतिनिधित्व अधिशेष को खत्म करना और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाना होना चाहिए।
चीन ने अंतर-सरकार वार्ता को सुधार का मुख्य माध्यम बनाए रखने और सदस्य देशों की सहमति के आधार पर 'पैकेज समाधान' पर जोर दिया।
सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना 1945 से अपरिवर्तित है; G4 देशों और अफ्रीकी राष्ट्रों की स्थाई सीट की माँग दशकों से लंबित है।
चीन ने कहा कि वह सभी पक्षों के साथ मिलकर 'अधिक निष्पक्ष व युक्तियुक्त वैश्विक शासन व्यवस्था ' के निर्माण में योगदान देगा।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थाई प्रतिनिधि फु त्सोंग ने 22 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में सुरक्षा परिषद सुधार पर अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि इस सुधार का अंतिम लक्ष्य विकसित देशों के प्रतिनिधित्व अधिशेष की मौजूदा स्थिति को बदलना होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि विकासशील देशों को परिषद में उनकी आबादी और वैश्विक भूमिका के अनुरूप उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

चीन का मूल रुख

फु त्सोंग ने कहा कि चीन सुरक्षा परिषद में 'ज़रूरी और जायज़ सुधारों' का समर्थन करता है, जिनसे परिषद की प्रतिष्ठा और कार्यकुशलता में वृद्धि हो। उनके अनुसार, ऐसे सुधार परिषद को वैश्विक संकटों और चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निर्धारित दायित्वों को प्रभावी रूप से निभाने में सक्षम बनाएँगे।

उन्होंने तीन प्रमुख सिद्धांत रेखांकित किए — विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व और अभिव्यक्ति अधिकार बढ़ाना, सदस्य देशों की सहमति का सम्मान करते हुए 'पैकेज समाधान' पर टिके रहना, और अंतर-सरकार वार्ता को सुधार प्रक्रिया का मुख्य माध्यम बनाए रखना।

वैश्विक शासन में सुधार की माँग

फु त्सोंग ने कहा कि चीन सभी पक्षों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रखेगा कि सुरक्षा परिषद का सुधार समस्त सदस्य देशों के साझा हितों के अनुरूप हो। उनके बयान के अनुसार, इस प्रक्रिया का लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करना और 'अधिक निष्पक्ष व युक्तियुक्त वैश्विक शासन व्यवस्था' के निर्माण में योगदान देना है।

यह ऐसे समय में आया है जब UNSC सुधार पर बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है। भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान सहित 'G4' देश स्थाई सदस्यता के लिए दशकों से प्रयासरत हैं, और अफ्रीकी देश भी महाद्वीप को स्थाई प्रतिनिधित्व दिलाने की माँग करते रहे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि सुरक्षा परिषद की संरचना 1945 में स्थापित हुई थी और तब से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। पाँच स्थाई सदस्य — अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन — के पास वीटो का अधिकार है, जबकि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और घनी आबादी वाले देशों को स्थाई सीट नहीं मिली है। आलोचकों का कहना है कि मौजूदा ढाँचा द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाता है, न कि आज की दुनिया को।

आगे की राह

चीन के इस बयान को वैश्विक दक्षिण (Global South) की आकांक्षाओं के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सुधार के लिए सुरक्षा परिषद के सभी पाँच स्थाई सदस्यों की सहमति और दो-तिहाई महासभा समर्थन की ज़रूरत होगी, जो इस प्रक्रिया को कठिन बनाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह बहस अगले कई सत्रों तक जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में समझना ज़रूरी है — चीन स्वयं उन्हीं पाँच स्थाई सदस्यों में से एक है जिनके वीटो अधिकार किसी भी सुधार को रोक सकते हैं। 'विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व' की वकालत करते हुए चीन वास्तव में भारत जैसे G4 देशों की स्थाई सदस्यता की माँग को जटिल बनाने की रणनीति भी अपनाता रहा है। 'पैकेज समाधान' पर जोर देना और 'अंतर-सरकार वार्ता' को केंद्र में रखना — ये दोनों रुख ऐतिहासिक रूप से सुधार की गति को धीमा करते आए हैं। असली सवाल यह है कि क्या चीन UNSC विस्तार में नए स्थाई सदस्यों को वीटो देने के पक्ष में है — और इस पर उसका रुख अभी भी अस्पष्ट है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UNSC सुधार पर चीन का रुख क्या है?
चीन UNSC में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने और विकसित देशों के प्रतिनिधित्व अधिशेष को खत्म करने के पक्ष में है। चीनी प्रतिनिधि फु त्सोंग ने 22 अक्टूबर 2026 को UN महासभा में यह रुख स्पष्ट किया।
UNSC सुधार क्यों ज़रूरी माना जा रहा है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना 1945 से अपरिवर्तित है, जब दुनिया की भू-राजनीतिक स्थिति आज से बिल्कुल अलग थी। भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान जैसे बड़े देशों के पास स्थाई सीट नहीं है, और अफ्रीका को भी स्थाई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
UNSC सुधार में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
किसी भी सुधार के लिए सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थाई सदस्यों की सहमति और UN महासभा के दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन ज़रूरी है। यह प्रक्रिया बेहद जटिल है क्योंकि स्थाई सदस्य देश अपनी वर्तमान शक्ति को कमज़ोर नहीं करना चाहते।
चीन की 'पैकेज समाधान' की माँग का क्या अर्थ है?
'पैकेज समाधान' का अर्थ है कि UNSC सुधार के सभी पहलुओं — स्थाई सीटों की संख्या, अस्थाई सीटें, वीटो अधिकार, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व — पर एक साथ सहमति बनाई जाए। आलोचकों का कहना है कि यह रुख ऐतिहासिक रूप से सुधार की गति को धीमा करता आया है।
राष्ट्र प्रेस
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