चीन ने UNSC में अफ्रीकी शांति और विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन का आह्वान किया
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू छोंग ने 6 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की उस खुली बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफ्रीकी देशों की शांति और विकास को निरंतर समर्थन देने का आग्रह किया, जो 'संयुक्त राष्ट्र-अफ्रीकी संघ सहयोग' विषय पर आयोजित की गई थी। फू छोंग ने अफ्रीका को वैश्विक प्रभाव का एक बढ़ता हुआ केंद्र बताते हुए कहा कि इस महाद्वीप को अभी भी बहुपक्षीय मंचों के ठोस समर्थन की ज़रूरत है।
बैठक की पृष्ठभूमि और संदर्भ
फू छोंग ने अपने संबोधन में कहा कि संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी संघ के बीच की साझेदारी बहुपक्षीय सहयोग का एक आदर्श उदाहरण है और इसने अफ्रीका में शांति, स्थिरता तथा विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य जटिल और अस्थिर है, जिसमें दीर्घकालिक भू-राजनीतिक संघर्ष, बढ़ता विकास अंतर और अनेक वैश्विक चुनौतियाँ शामिल हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब अफ्रीका के कई हिस्सों में सशस्त्र संघर्ष और आर्थिक असमानता को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। गौरतलब है कि सुरक्षा परिषद में अफ्रीकी मामलों पर नियमित बहस होती है, किंतु ठोस कार्रवाई अक्सर राजनीतिक टकराव में उलझ जाती है।
चीन के तीन प्रमुख सुझाव
फू छोंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष तीन स्पष्ट प्रस्ताव रखे। पहला — संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक वार्ता के ज़रिये सुलझाया जाए और अफ्रीका में शांति व स्थिरता को सामूहिक रूप से बढ़ावा दिया जाए। दूसरा — अफ्रीकी विकास में अधिक निवेश किया जाए ताकि महाद्वीप को समृद्ध और पुनर्जीवित होने में मदद मिल सके। तीसरा — वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार किया जाए और अफ्रीका की आत्मनिर्भरता तथा आत्म-सशक्तिकरण को प्रोत्साहित किया जाए।
ये तीनों सुझाव चीन की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति से मेल खाते हैं, जिसके तहत वह खुद को 'ग्लोबल साउथ' का प्रतिनिधि और विकासशील देशों का हमदर्द प्रस्तुत करता रहा है।
अफ्रीका का बढ़ता वैश्विक महत्व
आलोचकों का कहना है कि चीन का यह रुख केवल मानवीय नहीं, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक हितों से भी प्रेरित है। अफ्रीका में चीनी निवेश पिछले दो दशकों में तेज़ी से बढ़ा है — बुनियादी ढाँचे, खनन और व्यापार में बीजिंग की गहरी मौजूदगी है। इस संदर्भ में सुरक्षा परिषद में दिया गया यह बयान चीन की समग्र अफ्रीका नीति का एक हिस्सा माना जा सकता है।
फू छोंग ने यह भी कहा कि अफ्रीका वैश्विक प्रभाव का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है और इसकी आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
आगे की राह
इस बैठक में उठाए गए मुद्दे संयुक्त राष्ट्र की आगामी बहसों में केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं, विशेष रूप से अफ्रीकी संघ को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व देने की लंबे समय से चल रही माँग के परिप्रेक्ष्य में। चीन के इस आह्वान के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य स्थायी सदस्य देश इन प्रस्तावों पर किस प्रकार की प्रतिक्रिया देते हैं।