UN महासभा में चीन की उप प्रतिनिधि सुन लेई ने वैश्विक विकास पुनर्जीवित करने के लिए पेश किए चार सूत्रीय सुझाव
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में चीन की उप स्थायी प्रतिनिधि सुन लेई ने 5 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की दूसरी समिति की आम बहस को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वैश्विक विकास को नई गति देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 2030 सतत विकास एजेंडे का क्रियान्वयन गंभीर रूप से पिछड़ रहा है और इसे पटरी पर लाने के लिए ठोस सामूहिक प्रयास की ज़रूरत है।
वैश्विक विकास की मौजूदा स्थिति
सुन लेई के अनुसार, उत्तर-दक्षिण विकास असमानता लगातार गहरी होती जा रही है, विकास संसाधन अपर्याप्त हैं और वैश्विक विकास की रफ़्तार धीमी पड़ रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा और इस प्रक्रिया में नई ऊर्जा का संचार करना होगा।
चीन के चार सूत्रीय सुझाव
पहला, रणनीतिक दिशा पर ध्यान केंद्रित रखते हुए विकास को अंतरराष्ट्रीय एजेंडा के केंद्र में बनाए रखा जाए। 2030 एजेंडे के लक्ष्यों को प्रत्येक देश की वास्तविकताओं से जोड़ते हुए मध्यम और दीर्घकालिक नीतिगत निरंतरता सुनिश्चित की जाए।
दूसरा, गरीबी उन्मूलन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे जन-कल्याण के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर लोगों की अपेक्षाओं का जवाब दिया जाए।
तीसरा, व्यावहारिक सहयोग और कार्रवाई-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाया जाए। उन्होंने विशेष रूप से विकसित देशों से आग्रह किया कि वे विकास वित्तपोषण और जलवायु वित्तपोषण पर की गई अपनी प्रतिबद्धताओं को गंभीरता से लागू करें।
चौथा, एकजुटता की भावना के साथ एक समतापूर्ण, संतुलित और समावेशी वैश्विक विकास साझेदारी का निर्माण किया जाए।
वैश्विक विकास पहल की पाँचवीं वर्षगांठ
सुन लेई ने इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया कि 2026 में वैश्विक विकास पहल (Global Development Initiative) की पाँचवीं वर्षगांठ है। उन्होंने कहा कि चीन इस पहल के अंतर्गत सहयोग को और आगे बढ़ाने, 2030 एजेंडे को समर्थन देने तथा एक समृद्ध विश्व के निर्माण में सभी देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
व्यापक संदर्भ
यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, ऋण संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि 2030 की समयसीमा अब केवल चार वर्ष दूर है, और संयुक्त राष्ट्र की अपनी रिपोर्टें भी स्वीकार कर चुकी हैं कि अधिकांश SDG लक्ष्य निर्धारित गति से पीछे चल रहे हैं। चीन का यह बयान उत्तर-दक्षिण सहयोग के उस व्यापक विमर्श का हिस्सा है जिसमें वह खुद को वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करता रहा है।