दक्षिण-दक्षिण सहयोग गहरा करने की अपील: संयुक्त राष्ट्र में चीन ने रखा प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
चीन के संयुक्त राष्ट्र स्थित स्थायी मिशन के अस्थायी कार्यदूत सुन लेई ने 11 सितंबर 2026 को दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र दिवस पर आयोजित एक उच्च स्तरीय चर्चा में वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को स्वतंत्रता, समानता और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों पर आधारित साझेदारी को मज़बूत करना चाहिए।
चीन का रुख और 'ग्रुप ऑफ 77' का समर्थन
सुन लेई ने स्पष्ट किया कि चीन 'ग्रुप ऑफ 77 और चीन' की ओर से उरुग्वे द्वारा प्रस्तुत बयान का पूर्ण समर्थन करता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण सहयोग कार्यालय (UNOSSC) द्वारा वैश्विक दक्षिण के विकास को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दक्षिण-दक्षिण देशों के सामने आर्थिक और सामाजिक विकास हासिल करने का एक साझा लक्ष्य है, जिसे सामूहिक प्रयासों से ही प्राप्त किया जा सकता है।
क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण पर ज़ोर
चीनी दूत ने कहा कि विकासशील देशों को आत्मनिर्भरता के सिद्धांतों का पालन करते हुए क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण में दक्षिण-दक्षिण सहयोग की ताकत का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा से वैश्विक दक्षिण का अभिन्न सदस्य रहा है और इस ढाँचे के तहत सहयोग के नए तंत्रों एवं मंचों के निरंतर संवर्धन का स्वागत करता है। गौरतलब है कि चीन पिछले कई वर्षों से अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के ज़रिये इस सहयोग को व्यवहार में लागू करने का दावा करता रहा है।
विकास को संयुक्त राष्ट्र एजेंडे के केंद्र में लाने की माँग
सुन लेई ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को विकास को संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे के केंद्र में वापस लाना चाहिए, ताकि वैश्विक दक्षिण के देश अंतरराष्ट्रीय सहयोग में निष्पक्ष रूप से भाग ले सकें और विकास के फलों को साझा कर सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित सहयोग विकासशील देशों के नेतृत्व में और माँग-उन्मुख होकर व्यावहारिक परिणाम प्राप्त करता रहे।
व्यापक संदर्भ और आलोचनात्मक दृष्टि
यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों की ऋण संकट, जलवायु परिवर्तन और व्यापार असंतुलन जैसी चुनौतियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। आलोचकों का कहना है कि चीन का दक्षिण-दक्षिण सहयोग का आह्वान अक्सर उसकी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के रणनीतिक हितों से जुड़ा रहता है, जिसमें कई छोटे देश ऋण निर्भरता के चक्र में फँस जाते हैं। हालाँकि, चीन लगातार इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है और 'विन-विन' सहयोग की वकालत करता है। आगे देखना होगा कि इस बार के प्रस्ताव से ठोस कार्ययोजना सामने आती है या यह कूटनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहती है।