भारतीय पेटेंट कार्यालय लोगो का अनधिकृत उपयोग प्रतिबंधित, DPIIT ने जारी किया कड़ा नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने 13 सितंबर 2026 को एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर स्पष्ट किया कि भारतीय पेटेंट कार्यालय (IPO) के आधिकारिक लोगो, प्रतीक चिह्न या उनसे मिलते-जुलते किसी भी डिज़ाइन का उपयोग बिना पूर्व लिखित अनुमति के पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह निर्देश व्यक्तियों, व्यावसायिक संस्थाओं, डिजिटल प्लेटफार्मों और कानूनी सेवा प्रदाताओं — सभी पर समान रूप से लागू होता है।
नोटिस की पृष्ठभूमि और कारण
पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क नियंत्रक महानियंत्रक कार्यालय (CGPDTM) के संज्ञान में यह आया है कि अनेक व्यक्ति, एजेंसियाँ, कॉर्पोरेट संस्थाएँ, ऑनलाइन लीगल-टेक प्लेटफार्म और अनधिकृत सेवा प्रदाता अपनी वेबसाइटों, सोशल मीडिया खातों, प्रचार सामग्री, स्टेशनरी और डिजिटल विज्ञापनों में IPO के आधिकारिक लोगो और प्रतीकों का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं।
विभाग ने रेखांकित किया कि भारतीय पेटेंट कार्यालय का लोगो भारत सरकार के एक वैधानिक संस्थान की पहचान है, जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन DPIIT के अंतर्गत कार्य करता है। इसका अनधिकृत उपयोग आम जनता में यह भ्रामक धारणा उत्पन्न कर सकता है कि संबंधित संस्था या सेवा प्रदाता को सरकार की मान्यता या समर्थन प्राप्त है।
किन माध्यमों पर लागू होगा यह प्रतिबंध
DPIIT ने स्पष्ट किया है कि प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया, प्रायोजित विज्ञापन या किसी अन्य माध्यम में IPO का लोगो, ट्रेड ड्रेस अथवा DPIIT के प्रतीकों का इस्तेमाल करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है।
विभाग ने उन सभी संस्थाओं और व्यक्तियों को तत्काल निर्देश दिया है जो अपनी वेबसाइट, पोर्टल, विजिटिंग कार्ड, प्रचार बैनर, एप्लिकेशन इंटरफेस या अन्य किसी सामग्री में IPO का लोगो अथवा उससे मिलते-जुलते डिज़ाइन प्रदर्शित कर रहे हैं — वे उन्हें तुरंत प्रभाव से हटा दें।
कानूनी प्रावधान और दंड का प्रावधान
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अनधिकृत उपयोग, गलत प्रस्तुतीकरण या आधिकारिक लोगो की नकल निम्नलिखित कानूनों के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ सकती है:
'द एम्ब्लेम्स एंड नेम्स (प्रिवेंशन ऑफ इम्प्रॉपर यूज) एक्ट, 1950', ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999, कॉपीराइट एक्ट, 1957 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 — इन सभी के अंतर्गत दीवानी और आपराधिक कार्रवाई, प्रशासनिक प्रतिबंध एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों को रिपोर्ट किए जाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए विशेष सलाह
CGPDTM ने आम जनता, स्टार्टअप्स और MSME को विशेष रूप से सलाह दी है कि वे बौद्धिक संपदा पंजीकरण सेवाएँ प्रदान करने वाली संस्थाओं की प्रामाणिकता अनिवार्य रूप से जाँचें। सभी आधिकारिक आवेदन, अपडेट और संचार के लिए केवल सरकारी पोर्टल www.ipindia.gov.in का ही उपयोग करें।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) से जुड़ी धोखाधड़ी और फर्जी सेवा प्रदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। यह नोटिस उन हितधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण सतर्कता संदेश है जो अनजाने में अनधिकृत एजेंटों की सेवाएँ ले रहे हैं।
आगे क्या होगा
आलोचकों का कहना है कि ऐसे दिशानिर्देशों के साथ-साथ सरकार को एक सार्वजनिक जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए ताकि छोटे उद्यमी और स्टार्टअप अनजाने में कानूनी उलझनों में न फँसें। विभाग से अपेक्षा है कि वह अनुमति प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाएगा, जिससे अधिकृत संस्थाएँ निर्धारित ढाँचे के भीतर लोगो का उचित उपयोग कर सकें।