13 सितंबर 2026
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अमित शाह का 'सेवा संकल्प' दौरा राजनीतिक हथकंडा: महाराष्ट्र कांग्रेस, किसान कर्ज माफी की मांग

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अमित शाह का 'सेवा संकल्प' दौरा राजनीतिक हथकंडा: महाराष्ट्र कांग्रेस, किसान कर्ज माफी की मांग

सारांश

महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने गृह मंत्री अमित शाह के 'सेवा संकल्प अभियान' को जनसेवा नहीं, राजनीतिक चाल बताया। साथ ही सूखाग्रस्त किसानों के लिए पूर्ण कर्ज माफी और ₹50,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजे की मांग उठाई — और आरएसएस भाजपा की वैचारिक 'दोगली नीति' पर भी निशाना साधा।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने 13 सितंबर 2026 को गृह मंत्री अमित शाह के 'सेवा संकल्प अभियान' को राजनीतिक हथकंडा करार दिया।
अभियान की घोषित अवधि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 है।
कांग्रेस ने प्रभावित किसानों का पूर्ण कृषि ऋण माफ करने और प्रति हेक्टेयर ₹50,000 मुआवजा देने की मांग की।
सपकाल ने महायुति गठबंधन पर उद्योगपतियों को ज़मीन हस्तांतरण और कुंभ मेला खर्चों में अनियमितता का आरोप लगाया।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से संविधान और अल्पसंख्यकों पर सार्वजनिक सफाई की मांग की गई।
भाजपा आरएसएस के कथित 'मुस्लिम विरोधी' रुख और PM मोदी द्वारा 10 से अधिक इस्लामिक देशों के सम्मान स्वीकार करने में विरोधाभास बताया।

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रस्तावित दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरा वास्तविक जनसेवा नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक फायदे के लिए अपनाया गया एक सुनियोजित हथकंडा है। उन्होंने यह बयान तब दिया जब गृह मंत्री शाह ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले 'सेवा संकल्प अभियान' की घोषणा की थी।

कांग्रेस का आरोप: सेवा की आड़ में सियासत

सपकाल ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि यह दौरा जनहित में नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने और राजनीतिक समीकरण साधने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पर उद्योगपतियों को कीमती सरकारी ज़मीनें हस्तांतरित करने और कुंभ मेले से जुड़े खर्चों सहित विभिन्न निधि आवंटनों में जवाबदेही का अभाव है।

उन्होंने कहा, "अगर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सच में महाराष्ट्र के लोगों की सेवा करना चाहते हैं, तो उन्हें तुरंत किसानों का पूरा कर्ज माफ करने और प्रति हेक्टेयर ₹50,000 मुआवजा देने की घोषणा करनी चाहिए। वरना यह दौरा भ्रष्टाचार के मामलों को निपटाने के लिए एक राजनीतिक हथकंडे के अलावा और कुछ नहीं है।"

सूखे की मार और किसानों की मांग

सपकाल ने पूरे महाराष्ट्र में सूखे जैसी गंभीर स्थिति और किसानों की बदहाली का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से तत्काल राहत की माँग की। उन्होंने दो ठोस मांगें रखीं — राज्यभर के प्रभावित किसानों का पूरा कृषि ऋण माफ किया जाए और फसल का भारी नुकसान झेलने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹50,000 का मुआवजा दिया जाए।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में किसान संकट पिछले कई वर्षों से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में 2024 विधानसभा चुनावों के बाद महायुति सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की आक्रामकता लगातार बढ़ रही है।

आरएसएस और भाजपा पर निशाना

सपकाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरएसएस के हालिया 'उदार' रुख को 'नकली और बेईमानी भरा' करार दिया। उनका आरोप था कि संघ भारतीय संविधान और राष्ट्रीय ध्वज को लेकर संदिग्ध रुख रखता है और संघ के पूर्व प्रमुख एमएस गोलवलकर की पुस्तक 'बंच ऑफ थॉट्स' में उल्लिखित अपने बुनियादी सिद्धांतों को छिपाता है।

सपकाल ने देश में भाजपा आरएसएस के कथित 'मुस्लिम विरोधी' रुख और विदेशों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 से अधिक इस्लामिक देशों से सर्वोच्च नागरिक सम्मान स्वीकार करने के बीच 'जबरदस्त विरोधाभास' बताया। यह तर्क कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह सत्तारूढ़ गठबंधन को वैचारिक स्तर पर घेरने का प्रयास करती रही है।

मोहन भागवत से सार्वजनिक सफाई की मांग

कांग्रेस नेता ने मांग की कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संविधान, अल्पसंख्यक समुदायों और संगठन के व्यापक राजनीतिक एजेंडे पर सीधे तौर पर सार्वजनिक सफाई दें। उनका कहना था कि संघ के वक्तव्यों और उसकी कार्यशैली में पारदर्शिता की कमी है।

आने वाले दिनों में गृह मंत्री शाह के महाराष्ट्र दौरे के दौरान विपक्ष की ओर से इसी तरह के विरोध प्रदर्शन और बयानबाज़ी की संभावना है, जो राज्य में राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन रणनीतिक रूप से यह महायुति की 'जनसेवा' छवि को उसी के मैदान पर चुनौती देने की कोशिश है। विडंबना यह है कि जब महाराष्ट्र के किसान वास्तविक सूखे की मार झेल रहे हैं, तब दोनों पक्ष मुआवजे के आँकड़ों पर राजनीति कर रहे हैं — राहत की घोषणा नहीं। आरएसएस और इस्लामिक देशों वाले विरोधाभास का तर्क सुनने में प्रभावशाली लगता है, लेकिन यह विपक्ष की उस पुरानी शैली का हिस्सा है जो नीतिगत जवाबदेही की जगह वैचारिक हमलों को प्राथमिकता देती है। असली कसौटी यह होगी कि कांग्रेस कर्ज माफी के इस वादे को किसी ठोस वैकल्पिक नीति प्रस्ताव में बदल पाती है या नहीं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह का 'सेवा संकल्प अभियान' क्या है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा और इसके तहत महाराष्ट्र में जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महाराष्ट्र कांग्रेस ने इसे जनसेवा नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक हितों के लिए अपनाया गया हथकंडा बताया है।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने किसानों के लिए क्या मांगें रखी हैं?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दो मुख्य मांगें रखी हैं — राज्य के सभी प्रभावित किसानों का पूरा कृषि ऋण माफ किया जाए और फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹50,000 का मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि महाराष्ट्र में इस समय सूखे जैसे गंभीर हालात हैं।
सपकाल ने महायुति गठबंधन पर क्या आरोप लगाए?
सपकाल ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पर उद्योगपतियों को कीमती सरकारी ज़मीनें हस्तांतरित करने और कुंभ मेले से जुड़े खर्चों सहित विभिन्न फंड आवंटनों में जवाबदेही न होने का आरोप लगाया। उनके अनुसार शाह का दौरा इन्हीं मामलों को दबाने की कोशिश है।
कांग्रेस ने आरएसएस और भाजपा पर क्या सवाल उठाए?
सपकाल ने आरएसएस के हालिया 'उदार' रुख को नकली बताया और मांग की कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संविधान तथा अल्पसंख्यकों पर संगठन का स्पष्ट रुख सार्वजनिक करें। उन्होंने भाजपा आरएसएस के कथित मुस्लिम विरोधी रुख और PM मोदी द्वारा 10 से अधिक इस्लामिक देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान स्वीकार करने में विरोधाभास भी बताया।
यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में क्यों अहम है?
2024 विधानसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र में महायुति सरकार के खिलाफ विपक्ष की आक्रामकता बढ़ी है। अमित शाह का हाई प्रोफाइल दौरा और उस पर कांग्रेस का तीखा पलटवार यह दर्शाता है कि आगामी राजनीतिक मौसम में किसान संकट और वैचारिक मुद्दे केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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