अमित शाह का 'सेवा संकल्प' दौरा राजनीतिक हथकंडा: महाराष्ट्र कांग्रेस, किसान कर्ज माफी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रस्तावित दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरा वास्तविक जनसेवा नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक फायदे के लिए अपनाया गया एक सुनियोजित हथकंडा है। उन्होंने यह बयान तब दिया जब गृह मंत्री शाह ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले 'सेवा संकल्प अभियान' की घोषणा की थी।
कांग्रेस का आरोप: सेवा की आड़ में सियासत
सपकाल ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि यह दौरा जनहित में नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने और राजनीतिक समीकरण साधने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पर उद्योगपतियों को कीमती सरकारी ज़मीनें हस्तांतरित करने और कुंभ मेले से जुड़े खर्चों सहित विभिन्न निधि आवंटनों में जवाबदेही का अभाव है।
उन्होंने कहा, "अगर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सच में महाराष्ट्र के लोगों की सेवा करना चाहते हैं, तो उन्हें तुरंत किसानों का पूरा कर्ज माफ करने और प्रति हेक्टेयर ₹50,000 मुआवजा देने की घोषणा करनी चाहिए। वरना यह दौरा भ्रष्टाचार के मामलों को निपटाने के लिए एक राजनीतिक हथकंडे के अलावा और कुछ नहीं है।"
सूखे की मार और किसानों की मांग
सपकाल ने पूरे महाराष्ट्र में सूखे जैसी गंभीर स्थिति और किसानों की बदहाली का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से तत्काल राहत की माँग की। उन्होंने दो ठोस मांगें रखीं — राज्यभर के प्रभावित किसानों का पूरा कृषि ऋण माफ किया जाए और फसल का भारी नुकसान झेलने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹50,000 का मुआवजा दिया जाए।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में किसान संकट पिछले कई वर्षों से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में 2024 विधानसभा चुनावों के बाद महायुति सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की आक्रामकता लगातार बढ़ रही है।
आरएसएस और भाजपा पर निशाना
सपकाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरएसएस के हालिया 'उदार' रुख को 'नकली और बेईमानी भरा' करार दिया। उनका आरोप था कि संघ भारतीय संविधान और राष्ट्रीय ध्वज को लेकर संदिग्ध रुख रखता है और संघ के पूर्व प्रमुख एमएस गोलवलकर की पुस्तक 'बंच ऑफ थॉट्स' में उल्लिखित अपने बुनियादी सिद्धांतों को छिपाता है।
सपकाल ने देश में भाजपा आरएसएस के कथित 'मुस्लिम विरोधी' रुख और विदेशों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 से अधिक इस्लामिक देशों से सर्वोच्च नागरिक सम्मान स्वीकार करने के बीच 'जबरदस्त विरोधाभास' बताया। यह तर्क कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह सत्तारूढ़ गठबंधन को वैचारिक स्तर पर घेरने का प्रयास करती रही है।
मोहन भागवत से सार्वजनिक सफाई की मांग
कांग्रेस नेता ने मांग की कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संविधान, अल्पसंख्यक समुदायों और संगठन के व्यापक राजनीतिक एजेंडे पर सीधे तौर पर सार्वजनिक सफाई दें। उनका कहना था कि संघ के वक्तव्यों और उसकी कार्यशैली में पारदर्शिता की कमी है।
आने वाले दिनों में गृह मंत्री शाह के महाराष्ट्र दौरे के दौरान विपक्ष की ओर से इसी तरह के विरोध प्रदर्शन और बयानबाज़ी की संभावना है, जो राज्य में राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकती है।