13 सितंबर 2026
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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में PM मोदी की चेतावनी: तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार बनाना समावेशी विकास के लिए खतरा

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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में PM मोदी की चेतावनी: तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार बनाना समावेशी विकास के लिए खतरा

सारांश

भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में PM मोदी ने तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स को भू राजनीतिक हथियार बनाने की प्रवृत्ति पर सीधी चोट की — और साथ में स्टार्टअप फंड, डिजिटल कृषि नेटवर्क तथा रोग प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली जैसे ठोस प्रस्ताव भी रखे।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया।
मोदी ने चेतावनी दी कि तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार बनाना समावेशी आर्थिक विकास में बाधा बन सकता है।
भारत ने ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड और ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क का प्रस्ताव रखा।
ब्रिक्स डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क के ज़रिये AI और भू स्थानिक तकनीक को किसानों से जोड़ने की योजना।
संक्रामक रोगों के लिए ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली पर सदस्य देशों में सहमति बनी।
भारत की अध्यक्षता का विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता" रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में विश्व नेताओं को स्पष्ट चेतावनी दी कि प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) को भू राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना वैश्विक विकास, साझा समृद्धि और समावेशी आर्थिक प्रगति के मार्ग में गंभीर बाधा उत्पन्न कर सकता है। मोदी ने जोर देकर कहा कि दुनिया को सहयोग, नवाचार और साझेदारी की राह पर चलना होगा, न कि रणनीतिक संसाधनों को प्रतिस्पर्धा के औज़ार बनाने की नीति अपनानी होगी।

भारत की अध्यक्षता और ब्रिक्स का विस्तार

समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स आज विभिन्न महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं को एक साझा मंच पर एकजुट कर रहा है। उन्होंने इसे संगठन की बढ़ती स्वीकार्यता और सदस्य देशों के आपसी विश्वास का प्रमाण बताया।

भारत की अध्यक्षता का मूल विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता" रहा। मोदी ने कहा कि सभी सदस्य देशों के सामूहिक प्रयास से इस विषय को ठोस और व्यावहारिक परिणामों में बदलने का प्रयास किया गया।

भू राजनीतिक तनाव और साझा चुनौतियाँ

वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बढ़ते भू राजनीतिक तनावों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि महामारी, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाएं और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों ने यह सिद्ध कर दिया है कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।

यह ऐसे समय में आया है जब तकनीक, डेटा और रणनीतिक संसाधनों को भू राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के साधन के रूप में तेज़ी से इस्तेमाल किया जा रहा है। मोदी के संबोधन को उन वैश्विक परिस्थितियों पर सीधी टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।

ब्रिक्स की नई पहलें और ढाँचे

प्रधानमंत्री ने बताया कि ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विश्वसनीय और मजबूत बनाने में सहायक होगा। नवाचार को गति देने के लिए ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क सदस्य देशों के स्टार्टअप और इन्क्यूबेटरों को आपस में जोड़ेगा।

भारत ने ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड का भी प्रस्ताव रखा है, जो नवाचार आधारित और बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों को प्रोत्साहित करेगा। इसके अलावा, ब्रिक्स डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), भू स्थानिक प्रौद्योगिकी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप उपयोग में लाया जाएगा।

स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन पर सहमति

भविष्य की महामारियों और स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच एक संक्रामक रोग एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम) पर सहमति बनी है। साथ ही आपदा प्रबंधन के लिए अर्ली वार्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइंस की भी घोषणा की गई।

मोदी ने कहा कि समय रहते जोखिमों की पहचान और तत्काल कार्रवाई के लिए तैयारी ही भविष्य की चुनौतियों का सही जवाब है। गौरतलब है कि कोविड 19 महामारी के बाद से ब्रिक्स देश स्वास्थ्य सहयोग को नई प्राथमिकता दे रहे हैं।

व्यापक भागीदारी का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स सहयोग केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ब्रिक्स की इन घोषणाओं को सदस्य देश किस गति और प्रतिबद्धता के साथ ज़मीन पर उतारते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि ब्रिक्स के भीतर ही चीन जैसे सदस्य की तकनीकी आधिपत्य नीतियों पर भारत कितनी दृढ़ता से बोलने को तैयार है। स्टार्टअप फंड और डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क जैसी पहलें स्वागतयोग्य हैं, लेकिन इनकी सफलता वित्त पोषण की बाध्यकारी प्रतिबद्धता और सदस्य देशों की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में PM मोदी ने क्या मुख्य चेतावनी दी?
PM मोदी ने 13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में कहा कि तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) को भू राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना वैश्विक विकास और समावेशी आर्थिक प्रगति के लिए गंभीर बाधा बन सकता है। उन्होंने सहयोग और साझेदारी को ही आगे बढ़ने का सही रास्ता बताया।
ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड क्या है और इसका प्रस्ताव किसने रखा?
ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड का प्रस्ताव भारत ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रखा। इसका उद्देश्य नवाचार आधारित और बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों को प्रोत्साहित करना है, जो ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क के माध्यम से सदस्य देशों के स्टार्टअप को आपस में जोड़ेगा।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में स्वास्थ्य के मोर्चे पर क्या सहमति बनी?
ब्रिक्स देशों के बीच संक्रामक रोगों की रोकथाम और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए एक एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम) पर सहमति बनी। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन के लिए अर्ली वार्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइंस की भी घोषणा की गई।
ब्रिक्स डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क किसानों की कैसे मदद करेगा?
ब्रिक्स डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), भू स्थानिक प्रौद्योगिकी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की वास्तविक ज़रूरतों के अनुरूप लागू किया जाएगा। इसका लक्ष्य ब्रिक्स सदस्य देशों के किसानों के लिए नई तकनीकी संभावनाएं खोलना है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय क्या था और इसके क्या परिणाम रहे?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' रहा। इस दौरान ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क, स्टार्टअप इनोवेशन फंड, डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क और संक्रामक रोग चेतावनी प्रणाली जैसी ठोस पहलों को व्यावहारिक रूप देने का प्रयास किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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