तमिलनाडु उपचुनाव: वामपंथी दल मदुरंतकम और धारापुरम में अकेले उतरेंगे, टीवीके सरकार को समर्थन जारी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों में वामपंथी दलों ने स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया है, जबकि वे तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को बाहर से समर्थन देना जारी रखेंगे। पार्टी सूत्रों ने 13 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी। यह निर्णय शनिवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्य नेतृत्व की अलग-अलग बैठकों के बाद लिया गया।
सीट-बंटवारे का फैसला
CPI(M) मदुरंतकम विधानसभा सीट पर अपना प्रत्याशी उतारेगी, जबकि CPI धारापुरम सीट से चुनाव लड़ेगी। दोनों दल वाम मोर्चे के बैनर तले मैदान में होंगे। CPI(M) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने तिरुचि में पत्रकारों को बताया कि यह निर्णय CPI और CPI (ML) लिबरेशन के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।
शनमुगम ने स्पष्ट किया कि वामपंथी दल तमिलनाडु में मौजूद तीनों प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों में से किसी में शामिल नहीं हैं और इसी स्वतंत्र रुख को बनाए रखते हुए ये उपचुनाव लड़े जाएंगे।
उम्मीदवारों की घोषणा और नामांकन की समयसीमा
प्रत्याशियों के नामों की औपचारिक घोषणा 15 सितंबर को चेन्नई में CPI(M), CPI और CPI(ML) लिबरेशन के राज्य सचिवों की संयुक्त बैठक में की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर है। CPI(M) तीन प्रमुख गठबंधनों से बाहर की पार्टियों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश करेगी।
TVK सरकार से समर्थन बरकरार, पर मतभेद भी
चेन्नई में CPI के राज्य सचिव एम. वीर पांडियन ने कहा कि पार्टी की राज्य कार्यकारिणी ने सभी मौजूदा गठबंधनों से बाहर रहने के अपने पुराने रुख को बरकरार रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपचुनाव लड़ने के फैसले का अर्थ TVK सरकार से समर्थन वापस लेना कतई नहीं है।
वीर पांडियन ने बताया कि राज्य विधानसभा चुनाव के बाद CPI ने TVK सरकार को बाहर से समर्थन इसलिए दिया था ताकि जनादेश का सम्मान हो सके और राज्यपाल अथवा भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा प्रशासन पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण की किसी भी कोशिश को रोका जा सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि CPI न तो सरकार में शामिल हुई और न ही TVK के साथ कोई औपचारिक गठबंधन किया।
यह ऐसे समय में आया है जब शनमुगम ने यह भी स्वीकार किया कि वामपंथी दलों के TVK सरकार के साथ कई मुद्दों पर मतभेद हैं — बजट के कुछ प्रावधान और उदारवादी व नव-उदारवादी आर्थिक नीतियों का क्रियान्वयन इनमें प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान ये मुद्दे खुलकर उठाए जाएंगे।
दल-बदल पर आलोचना और अतिरिक्त माँगें
शनमुगम ने उन दो उम्मीदवारों की आलोचना की जिन्होंने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के टिकट पर जीत हासिल की थी और फिर मात्र 20 दिनों के भीतर इस्तीफा देकर TVK में शामिल हो गए — इसी कारण ये उपचुनाव आवश्यक हुए। उन्होंने इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दिया।
गौरतलब है कि शनमुगम ने राज्य सरकार से विदेशी निवेश का पूरा विवरण सार्वजनिक करने और घरेलू व लघु उद्योगों को अधिक वित्तीय, कर एवं ऋण सहायता उपलब्ध कराने की भी माँग की।
आगे क्या होगा
वाम दलों की स्वतंत्र भागीदारी तमिलनाडु के उपचुनावी समीकरणों को जटिल बना सकती है, खासकर उन सीटों पर जहाँ मताधिकार का विभाजन निर्णायक साबित हो सकता है। 15 सितंबर को होने वाली संयुक्त बैठक के बाद उम्मीदवारों के नाम सामने आने पर राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होगी।