तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: डीएमके के सहयोगियों ने अधिक सीटों की मांग की

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: डीएमके के सहयोगियों ने अधिक सीटों की मांग की

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में सीटों का बंटवारा एक विवाद का विषय बन गया है। वामपंथी दलों और छोटे सहयोगियों द्वारा अधिक सीटों की मांग से स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। जानें क्या है पूरा मामला।

Key Takeaways

  • डीएमके का नेतृत्व वाला गठबंधन तनाव में है।
  • वामपंथी दलों ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
  • निर्वाचन क्षेत्रों का वितरण जटिल हो गया है।
  • टीवीके ने भी असंतोष व्यक्त किया है।
  • सभी दलों को संवाद स्थापित करना आवश्यक है।

चेन्नई, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) में सीटों के बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ता दिख रहा है। इस स्थिति का कारण पुराने सहयोगी दलों द्वारा अधिक सीटों की मांग है।

वामपंथी दलों और अन्य छोटे सहयोगी दलों के नेताओं ने डीएमके नेतृत्व को अपनी चिंताएं व्यक्त करते हुए बताया है कि २०२१ के चुनाव में उनके प्रदर्शन और जमीनी स्तर पर उपस्थिति के आधार पर उनकी सीटें बढ़ाई जानी चाहिए।

यह चर्चाएं उस समय हो रही हैं जब गठबंधन का दायरा बढ़ा है, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों का वितरण और भी जटिल हो गया है।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) दोनों ने अधिक सीटों की मांग की है। पिछले विधानसभा चुनाव में इन दोनों पार्टियों ने छह-छह सीटों पर चुनाव लड़ा था और दोनों ने दो-दो सीटें जीती थीं।

वामपंथी दलों के सूत्रों के अनुसार, डीएमके ने सुझाव दिया है कि वे इस बार पांच-पांच सीटों पर चुनाव लड़ें।

सीपीआई और सीपीआईएम के नेताओं ने सप्ताहांत में आंतरिक चर्चा के बाद अपने विकल्पों का मूल्यांकन किया और आगे की रणनीति पर चर्चा की।

हालांकि उन्होंने गठबंधन में बने रहने की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया है कि वे २०२१ में जिन सीटों पर चुनाव लड़े थे, कम से कम उतनी सीटें बरकरार रखने के इच्छुक हैं।

एक अन्य सहयोगी दल, टीवीके ने भी सीट आवंटन को लेकर असंतोष व्यक्त किया है।

पार्टी नेता टी. वेलमुरुगन ने कहा कि यदि उन्हें फिर से केवल एक ही निर्वाचन क्षेत्र की पेशकश की जाती है तो पार्टी नेतृत्व डीएमके के साथ अपने गठबंधन पर पुनर्विचार कर रहा है।

टी वेलमुरुगन ने पत्रकारों से कहा कि हमने अतिरिक्त सीटों की मांग की है, लेकिन डीएमके की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इन परिस्थितियों में हमारी पार्टी की उच्च स्तरीय समिति के कई सदस्यों का मानना है कि हमें केवल एक सीट के लिए गठबंधन में बने रहने के बारे में पुनर्विचार करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने डीएमके नेतृत्व को दस मांगों का एक सेट भी सौंपा है और वह प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रही है।

Point of View

जहां सहयोगी दलों की सीटों की मांग ने चुनावी समीकरणों को जटिल बना दिया है। विभिन्न दलों के बीच संवाद और समझौता आवश्यक है ताकि चुनावी रणनीति को प्रभावी बनाया जा सके।
NationPress
17/03/2026

Frequently Asked Questions

डीएमके गठबंधन में कौन-कौन से दल शामिल हैं?
डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) में वामपंथी दल और अन्य छोटे सहयोगी दल शामिल हैं।
सीटों के बंटवारे में समस्या का कारण क्या है?
पुराने सहयोगी दलों द्वारा अधिक सीटों की मांग के कारण सीटों के बंटवारे में तनाव उत्पन्न हो रहा है।
सीपीआई और सीपीआईएम ने कितनी सीटों की मांग की है?
सीपीआई और सीपीआईएम ने प्रत्येक ने अधिक सीटों की मांग की है, जबकि पिछले चुनाव में उन्होंने छह-छह सीटों पर चुनाव लड़ा था।
टीवीके ने किस प्रकार की समस्याएं उठाई हैं?
टीवीके ने सीट आवंटन पर असंतोष व्यक्त किया है और यदि उन्हें केवल एक निर्वाचन क्षेत्र की पेशकश की जाती है तो गठबंधन पर पुनर्विचार करने की बात कही है।
क्या डीएमके ने सहयोगियों की मांगों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक डीएमके की ओर से सहयोगियों की मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
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