तमिलनाडु चुनाव: डीएमके और सीपीआई के बीच सीट बंटवारे पर सहमति, वामपंथी को मिली एक सीट कम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु चुनाव: डीएमके और सीपीआई के बीच सीट बंटवारे पर सहमति, वामपंथी को मिली एक सीट कम

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में डीएमके और सीपीआई के बीच समझौता हुआ है, जिसमें सीपीआई को 5 सीटें दी गई हैं। यह समझौता चुनावों की तैयारी में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बातें

डीएमके और सीपीआई के बीच सीट बंटवारे का समझौता हुआ।
सीपीआई को 5 सीटें दी गई हैं, जो 2021 के चुनाव में लड़ी गई 6 सीटों से एक कम है।
समझौते का मुख्य उद्देश्य भाजपा को हराना है।
गठबंधन में कांग्रेस को लगभग 28 सीटें मिल सकती हैं।
सीपीआई (एम) के साथ बातचीत अभी भी जारी है।

चेन्नई, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। इसी संदर्भ में, डीएमके ने बुधवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के साथ सीटों के बंटवारे के लिए एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत सीपीआई को 5 विधानसभा सीटें आवंटित की गई हैं, जो कि 2021 के चुनाव में प्राप्त 6 सीटों से एक कम है।

यह समझौता मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और सीपीआई के राज्य सचिव वीरापांडियन की उपस्थिति में औपचारिक रूप से किया गया। इसे आगामी चुनावों में डीएमके के गठबंधन को मजबूत समझा जा रहा है।

चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद से राज्य में राजनीतिक गतिविधियाँ काफी बढ़ गई हैं। सभी प्रमुख दल अपने-अपने गठबंधन को ठोस रूप देने में लगे हुए हैं। डीएमके ने अपने सहयोगियों के साथ कई दौर की बातचीत की है ताकि सीटों का संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।

सूत्रों के अनुसार, सीपीआई ने शुरुआत में पिछली बार से ज्यादा सीटों की मांग की थी। लेकिन, तीन दौर की बातचीत के बाद पार्टी ने गठबंधन की मजबूती और अन्य सहयोगियों को स्थान देने की आवश्यकता को देखते हुए कम सीटों पर सहमति जताई।

समझौते के बाद सीपीआई के नेताओं ने कहा कि इस गठबंधन का मुख्य लक्ष्य भाजपा और उसके सहयोगियों को हराना है। उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या कम होने से कुछ कार्यकर्ताओं को निराशा हो सकती है, लेकिन एकजुट धर्मनिरपेक्ष मोर्चा बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

एक वरिष्ठ सीपीआई नेता ने कहा, "हमारा ध्यान भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को पराजित करना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है। सीपीआई हमेशा से आम लोगों, श्रमिकों और वंचित वर्गों की आवाज उठाती रही है और आगे भी उठाती रहेगी।"

डीएमके नेतृत्व ने अपने सहयोगियों से गठबंधन के विस्तार के कारण कम सीटों पर सहमत होने का आग्रह किया था। सीपीआई द्वारा 5 सीटों पर समझौता करना एक रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है, ताकि गठबंधन एकजुट बना रहे।

हालांकि, सीपीआई (एम) के साथ बातचीत अभी भी जारी है। ऐसा बताया जा रहा है कि सीपीआई (एम) ने भी 2021 के मुकाबले अधिक सीटों की मांग की है और इस पर चर्चा आगे भी जारी रहेगी।

गठबंधन के तहत, कांग्रेस को लगभग 28 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि अन्य सहयोगी दलों जैसे एमडीएमके, आईयूएमएल और मनिथनेया मक्कल कच्ची (एमएमके) को कम सीटें मिल सकती हैं।

सीपीआई के साथ समझौता होने के बाद, डीएमके अब अपने सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच गई है, जिससे 23 अप्रैल को एक चरण में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए संयुक्त और संगठित अभियान का रास्ता स्पष्ट हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आगामी चुनावों में भाजपा के खिलाफ एकजुटता को भी मजबूत करेगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएमके और सीपीआई के बीच समझौता किस पर आधारित है?
समझौता सीटों के बंटवारे पर आधारित है, जिसमें सीपीआई को 5 सीटें दी गई हैं।
सीपीआई ने कितनी सीटों की मांग की थी?
सीपीआई ने शुरू में पिछली बार की तुलना में अधिक सीटों की मांग की थी।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भाजपा और उसके सहयोगियों को हराना है।
क्या समझौते के बाद सीपीआई की स्थिति प्रभावित होगी?
सीटों की संख्या कम होने से कुछ कार्यकर्ताओं को निराशा हो सकती है, लेकिन एकजुट धर्मनिरपेक्ष मोर्चा बनाना प्राथमिकता है।
कौन से अन्य दल इस गठबंधन में शामिल हैं?
गठबंधन में कांग्रेस, एमडीएमके, आईयूएमएल और मनिथनेया मक्कल कच्ची (एमएमके) जैसे अन्य दल शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले