तमिलनाडु में चुनावी भूचाल: डीएमके ने केएमडीके को दी दो सीटें, कांग्रेस के साथ बढ़ता मतभेद
सारांश
Key Takeaways
- डीएमके ने केएमडीके को दो सीटें दी हैं।
- कांग्रेस के साथ विवाद बढ़ रहा है।
- डीएमके का लक्ष्य 180 सीटों पर चुनाव लड़ना है।
- कांग्रेस ने 35 सीटों की मांग की है।
- 2021 चुनाव में डीएमके ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया था।
चेन्नई, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने शुक्रवार को आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपने क्षेत्रीय सहयोगी कोंगुनाडु मक्कल देसिया काची (केएमडीके) के साथ सीट बंटवारे के समझौते को औपचारिक रूप दे दिया। इस समझौते के तहत केएमडीके को दो विधानसभा सीटें दी गई हैं।
यह समझौता चेन्नई स्थित डीएमके मुख्यालय अन्ना अरिवालयम में एम.के. स्टालिन और केएमडीके के महासचिव ई.आर. ईश्वरन की उपस्थिति में हुआ।
समझौते के अनुसार, केएमडीके के उम्मीदवार डीएमके के प्रतिष्ठित ‘राइजिंग सन’ चुनाव चिह्न पर दोनों सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। सीट बंटवारे की बातचीत पूरी होने और गठबंधन की पुष्टि के बाद स्टालिन अन्ना अरिवालयम से रवाना हो गए।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब डीएमके और उसके प्रमुख सहयोगी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। कांग्रेस ने हालिया स्थानीय और राष्ट्रीय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन का हवाला देते हुए कम से कम 35 सीटों की मांग की है।
हालांकि, डीएमके नेतृत्व 234 सदस्यीय विधानसभा में स्पष्ट बहुमत सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 180 सीटों पर खुद चुनाव लड़ने के पक्ष में है। इसी कारण दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। डीएमके के वार्ताकारों का संकेत है कि कांग्रेस को 2021 विधानसभा चुनाव की तरह 25 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने राज्य मंत्रिमंडल में भी हिस्सेदारी की मांग उठाई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने हाल ही में कहा था कि “सत्ता में साझेदारी समय की जरूरत है” और गठबंधन सरकार सहयोगी दलों की आकांक्षाओं को बेहतर तरीके से दर्शा सकती है।
वहीं, डीएमके अपनी पारंपरिक “एक-दलीय शासन” की नीति पर कायम है और सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में शामिल करने के पक्ष में नहीं है। पार्टी का कहना है कि द्रविड़ मॉडल की राजनीति में नेतृत्व का मुख्य चेहरा डीएमके ही रहेगा।
गौरतलब है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2021 में डीएमके ने एक दशक बाद सत्ता में वापसी की थी। पार्टी ने 234 में से 133 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि कांग्रेस ने 25 सीटों पर चुनाव लड़कर 18 सीटें जीती थीं।