तमिलनाडु चुनाव: डीएमके वामपंथी दलों के साथ सीट साझा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की योजना बना रही है

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तमिलनाडु चुनाव: डीएमके वामपंथी दलों के साथ सीट साझा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की योजना बना रही है

सारांश

डीएमके और उसके वामपंथी सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे की बातचीत अपने अंतिम चरण में है। क्या 2021 का फॉर्मूला फिर से लागू होगा? जानें इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में।

Key Takeaways

  • डीएमके सीपीआई और सीपीआई (एम) के साथ सीट बंटवारे की प्रक्रिया में है।
  • दोनों दलों ने सीटों की संख्या बढ़ाने की माँग की है।
  • मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से बातचीत के बाद निर्णय लिया जाएगा।
  • गठबंधन की स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
  • वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है।

चेन्नई, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सत्तारूढ़ डीएमके ने अपने वामपंथी सहयोगियों सीपीआई और सीपीआई (एम) के साथ सीट बंटवारे की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की योजना बनाई है, क्योंकि वार्ता अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। संकेत मिलते हैं कि 2021 के फॉर्मूले को बनाए रखा जाएगा।

डीएमके के सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व सीपीआई और सीपीआई (एम) दोनों को छह-छह सीटें आवंटित करने का पक्षधर है, जो कि पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें दिए गए सीटों की संख्या के बराबर है।

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से परामर्श के बाद ही इस निर्णय की घोषणा होने की संभावना है।

यह स्थिति तब सामने आई है जब दोनों वामपंथी दल सीटों की संख्या में थोड़ा इजाफा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। सीपीआई और सीपीआई (एम) के नेताओं ने कम से कम एक-एक अतिरिक्त सीट की माँग की है।

उनका तर्क है कि उनकी संगठनात्मक ताकत और चुनावी योगदान के आधार पर उन्हें डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

मंगलवार को सीपीआई (एम) के नेताओं ने चेन्नई के अन्ना अरिवलयम में डीएमके की सीट बंटवारे समिति से मुलाकात की और अपनी माँग को दोहराया। बैठक के बाद, सीपीआई (एम) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने कहा कि बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, "समिति ने हमें आश्वासन दिया है कि वे मुख्यमंत्री से हमारे अनुरोध पर चर्चा करेंगे और हमें जवाब देंगे।"

उन्होंने उम्मीद जताई कि आपसी सहमति से कोई समाधान निकलेगा। डीएमके के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि पार्टी के भीतर वामपंथी दलों की सीटों को घटाकर पाँच-पाँच करने पर प्रारंभिक चर्चा हुई थी।

हालांकि, गठबंधन की स्थिरता बनाए रखने और चुनावों से पूर्व टकराव से बचने के लिए नेतृत्व ने इस विचार से पीछे हटते हुए अपना इरादा बदल दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डीएमके गठबंधन वार्ता को जल्द से जल्द खत्म करके चुनाव प्रचार रणनीति और उम्मीदवार चयन पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है।

वर्तमान सीट बंटवारे की व्यवस्था को बनाए रखने से गठबंधन में एकता बनी रह सकती है और प्रतिस्पर्धी माँगों को भी पूरा किया जा सकता है।

Point of View

डीएमके वामपंथी दलों के साथ सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जो उनके चुनावी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यह गठबंधन स्थिरता के साथ-साथ चुनावी रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
NationPress
22/03/2026

Frequently Asked Questions

डीएमके और वामपंथी दलों के बीच सीट बंटवारा कैसे होगा?
डीएमके वामपंथी दलों को छह-छह सीटें आवंटित करने का प्रस्ताव रख रही है, जो पिछले चुनावों के अनुसार है।
क्या वामपंथी दलों को और सीटें मिलेंगी?
वामपंथी दलों ने एक-एक अतिरिक्त सीट की माँग की है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था बनाए रखने का भी विचार किया जा रहा है।
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