तमिलनाडु चुनाव: सीपीआई ने डीएमके के दबाव संबंधी आरोपों को किया खारिज

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तमिलनाडु चुनाव: सीपीआई ने डीएमके के दबाव संबंधी आरोपों को किया खारिज

सारांश

कोयंबटूर में सीपीआई के नेता आर. मुथारसन ने आरोपों का खंडन किया है कि उनकी पार्टी ने डीएमके के दबाव में सीटों की मांग कम की है। उन्होंने गठबंधन की एकता और वैचारिक समर्पण पर बल दिया।

Key Takeaways

  • सीपीआई ने डीएमके के दबाव के आरोपों का खंडन किया।
  • गठबंधन की एकता वैचारिक समर्पण पर आधारित है।
  • सीटों का बंटवारा प्राथमिक मुद्दा नहीं है।
  • आरएसएस के प्रभाव का बढ़ना चिंता का विषय है।
  • केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप।

कोयंबटूर, २२ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के नेता आर. मुथारसन ने रविवार को उन आरोपों का मजबूत खंडन किया कि उनकी पार्टी ने आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सहयोगी दल डीएमके के दबाव में सीटों की मांग को कम कर दिया है।

कोयंबटूर में पत्रकारों से बात करते हुए, सीपीआई के पूर्व प्रदेश सचिव ने गठबंधन की एकता पर जोर दिया और कहा कि यह दबाव के बजाय वैचारिक समर्पण से प्रेरित है।

डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए मुथारसन ने स्पष्ट किया कि सीपीआई सीट बंटवारे की वार्ता में किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगी।

उन्होंने पार्टी के स्वतंत्र राजनीतिक दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि डीएमके भाजपा नहीं है, जो दबाव डाल सके, और सीपीआई एआईएडीएमके नहीं है, जो उसके सामने झुक जाए।

मुथारसन ने बताया कि तमिलनाडु में धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) एक दशक से अधिक समय से इस कारण कायम है क्योंकि यह अल्पकालिक चुनावी समीकरणों के बजाय साझा वैचारिक प्रतिबद्धताओं पर आधारित है। उनके अनुसार, सीटों के बंटवारे पर चर्चाएं गठबंधन के भीतर कोई मतभेद नहीं पैदा करतीं, क्योंकि सभी सहयोगी व्यापक राजनीतिक उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सीटों का बंटवारा उनके लिए मुद्दा नहीं है। मुख्य बात यह है कि असली खतरे की पहचान की जाए। उन्होंने संकेत दिया कि गठबंधन की प्राथमिकता वैचारिक विरोधियों का सामना करना है, न कि निर्वाचन क्षेत्रों के लिए सौदेबाजी करना।

मुथारसन ने दोहराया कि सीपीआई को इस बात की चिंता नहीं है कि वह कम या अधिक सीटों पर चुनाव लड़ती है।

सीपीआई नेता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि इसका विस्तार न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे देश के लिए एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के भीतर कुछ ताकतें इस विस्तार में मदद कर रही हैं, इसलिए समान विचारधारा वाली पार्टियों का एकजुट रहना अनिवार्य है।

भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मुथारसन ने आरोप लगाया कि यह भाजपा शासित राज्यों को तरजीह देती है, जबकि तमिलनाडु की अनदेखी करती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की भेदभावपूर्ण प्रथाएं संघवाद और राष्ट्रीय एकता की भावना को कमजोर करती हैं।

Point of View

NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या सीपीआई ने डीएमके के दबाव में सीटों की मांग कम की है?
सीपीआई के नेता आर. मुथारसन ने इस आरोप का खंडन किया है और कहा है कि उनकी पार्टी किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगी।
गठबंधन की एकता के बारे में मुथारसन का क्या कहना है?
उन्होंने कहा कि गठबंधन की एकता दबाव के बजाय वैचारिक समर्पण पर आधारित है।
क्या सीपीआई को सीटों की संख्या की चिंता है?
मुथारसन ने कहा कि सीपीआई को सीटों की संख्या की चिंता नहीं है, बल्कि असली खतरे की पहचान करना महत्वपूर्ण है।
आरएसएस के बढ़ते प्रभाव पर मुथारसन ने क्या कहा?
उन्होंने आरएसएस के बढ़ते प्रभाव को गंभीर चुनौती बताया और समान विचारधारा वाली पार्टियों के एकजुट रहने की आवश्यकता पर जोर दिया।
केंद्र सरकार पर मुथारसन का क्या आरोप है?
उन्होंने केंद्र सरकार पर भाजपा शासित राज्यों को तरजीह देने और तमिलनाडु की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
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