यूएन सुरक्षा परिषद में चीन का आह्वान: एकजुटता और संवाद हो सर्वोच्च प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कार्य पद्धति पर आयोजित खुली बहस के दौरान चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने बुधवार, 20 अगस्त को स्पष्ट रूप से कहा कि एकजुटता और सहयोग ही सुरक्षा परिषद की सबसे प्रभावी और आवश्यक कार्य पद्धति होनी चाहिए। उन्होंने सदस्य देशों से परिषद के अधिकार की रक्षा करने और एकतरफा कार्रवाइयों का विरोध करने का आग्रह किया।
सुरक्षा परिषद की कार्य पद्धति पर चीन का रुख
फू त्सोंग ने कहा कि सुरक्षा परिषद की कार्य पद्धति को केवल एक तकनीकी विषय नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, इसे अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए निरंतर बेहतर और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिषद के सभी सदस्यों को परस्पर सम्मान के आधार पर पूर्ण विचार-विमर्श करना चाहिए, मतभेदों का उचित समाधान निकालना चाहिए और सर्वसम्मति बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करने चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय 6 की भावना का पालन
फू त्सोंग ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय 6 की भावना का अनुपालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके अंतर्गत संवाद और वार्ता के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जाना चाहिए, क्षेत्रीय देशों और संगठनों की मध्यस्थता का समर्थन किया जाना चाहिए और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हरसंभव कदम उठाए जाने चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्रीय संघर्ष बातचीत की बजाय बल-प्रयोग की दिशा में बढ़ रहे हैं।
प्रतिबंधों के उपयोग पर सावधानी का आग्रह
चीनी प्रतिनिधि ने कहा कि प्रतिबंधों और बल प्रयोग जैसे अनिवार्य उपायों का इस्तेमाल अत्यंत सावधानी से किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो प्रतिबंध अपने निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रहे हैं, उनकी समीक्षा की जानी चाहिए और आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए। गौरतलब है कि यह टिप्पणी उस संदर्भ में आई है जब पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों की प्रभावशीलता पर वैश्विक बहस तेज हो रही है।
एकतरफा कार्रवाइयों का विरोध
फू त्सोंग ने उन अवैध एकतरफा कार्रवाइयों का खुलकर विरोध किया जो सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र को दरकिनार करती हैं। उन्होंने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से न्यायपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया। साथ ही, सभी देशों से परिषद के प्रस्तावों का सख्ती से पालन करने और उसके संस्थागत अधिकार की रक्षा करने की अपील की।
चीन की प्रतिबद्धता और आगे की राह
फू त्सोंग ने स्पष्ट किया कि चीन बहुपक्षवाद के सिद्धांत का पालन करते हुए एकजुटता और सहयोग को सुदृढ़ करने तथा सुरक्षा परिषद की कार्य पद्धति को बेहतर बनाने के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इसका अंतिम उद्देश्य स्थायी शांति और साझा सुरक्षा की दिशा में ठोस योगदान देना है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन का यह रुख वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों को किस दिशा में प्रभावित करता है।