20 अगस्त 2026
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यूएन सुरक्षा परिषद में चीन का आह्वान: एकजुटता और संवाद हो सर्वोच्च प्राथमिकता

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यूएन सुरक्षा परिषद में चीन का आह्वान: एकजुटता और संवाद हो सर्वोच्च प्राथमिकता

सारांश

चीन ने यूएन सुरक्षा परिषद की खुली बहस में साफ संदेश दिया — एकजुटता और संवाद, न कि एकतरफा दबाव। फू त्सोंग का यह बयान बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने की चीन की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने 20 अगस्त को यूएन सुरक्षा परिषद की खुली बहस में एकजुटता और सहयोग को सर्वोच्च कार्य पद्धति बताया।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय 6 की भावना के अनुरूप संवाद, वार्ता और शांतिपूर्ण विवाद-समाधान पर जोर दिया।
फू त्सोंग ने प्रतिबंधों और बल प्रयोग के सावधानीपूर्ण उपयोग की वकालत की और विफल प्रतिबंधों की समीक्षा का आग्रह किया।
अवैध एकतरफा कार्रवाइयों का विरोध करते हुए उन्होंने सभी देशों से परिषद के प्रस्तावों का पालन करने की अपील की।
चीन ने बहुपक्षवाद के सिद्धांत पर चलते हुए सुरक्षा परिषद की कार्य पद्धति सुधारने की प्रतिबद्धता दोहराई।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कार्य पद्धति पर आयोजित खुली बहस के दौरान चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने बुधवार, 20 अगस्त को स्पष्ट रूप से कहा कि एकजुटता और सहयोग ही सुरक्षा परिषद की सबसे प्रभावी और आवश्यक कार्य पद्धति होनी चाहिए। उन्होंने सदस्य देशों से परिषद के अधिकार की रक्षा करने और एकतरफा कार्रवाइयों का विरोध करने का आग्रह किया।

सुरक्षा परिषद की कार्य पद्धति पर चीन का रुख

फू त्सोंग ने कहा कि सुरक्षा परिषद की कार्य पद्धति को केवल एक तकनीकी विषय नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, इसे अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए निरंतर बेहतर और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिषद के सभी सदस्यों को परस्पर सम्मान के आधार पर पूर्ण विचार-विमर्श करना चाहिए, मतभेदों का उचित समाधान निकालना चाहिए और सर्वसम्मति बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करने चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय 6 की भावना का पालन

फू त्सोंग ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय 6 की भावना का अनुपालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके अंतर्गत संवाद और वार्ता के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जाना चाहिए, क्षेत्रीय देशों और संगठनों की मध्यस्थता का समर्थन किया जाना चाहिए और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हरसंभव कदम उठाए जाने चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्रीय संघर्ष बातचीत की बजाय बल-प्रयोग की दिशा में बढ़ रहे हैं।

प्रतिबंधों के उपयोग पर सावधानी का आग्रह

चीनी प्रतिनिधि ने कहा कि प्रतिबंधों और बल प्रयोग जैसे अनिवार्य उपायों का इस्तेमाल अत्यंत सावधानी से किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो प्रतिबंध अपने निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रहे हैं, उनकी समीक्षा की जानी चाहिए और आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए। गौरतलब है कि यह टिप्पणी उस संदर्भ में आई है जब पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों की प्रभावशीलता पर वैश्विक बहस तेज हो रही है।

एकतरफा कार्रवाइयों का विरोध

फू त्सोंग ने उन अवैध एकतरफा कार्रवाइयों का खुलकर विरोध किया जो सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र को दरकिनार करती हैं। उन्होंने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से न्यायपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया। साथ ही, सभी देशों से परिषद के प्रस्तावों का सख्ती से पालन करने और उसके संस्थागत अधिकार की रक्षा करने की अपील की।

चीन की प्रतिबद्धता और आगे की राह

फू त्सोंग ने स्पष्ट किया कि चीन बहुपक्षवाद के सिद्धांत का पालन करते हुए एकजुटता और सहयोग को सुदृढ़ करने तथा सुरक्षा परिषद की कार्य पद्धति को बेहतर बनाने के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इसका अंतिम उद्देश्य स्थायी शांति और साझा सुरक्षा की दिशा में ठोस योगदान देना है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन का यह रुख वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों को किस दिशा में प्रभावित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका निशाना स्पष्ट है — पश्चिमी देशों की वह प्रवृत्ति जो संयुक्त राष्ट्र की सहमति के बिना एकतरफा प्रतिबंध और सैन्य हस्तक्षेप को वैधता देती है। चीन का 'बहुपक्षवाद' का आग्रह वास्तव में वीटो-शक्ति संपन्न देशों की सामूहिक जवाबदेही की माँग है, जो उसे रूस जैसे साझेदारों के साथ एक साझा मंच देती है। आलोचकों का कहना है कि चीन स्वयं दक्षिण चीन सागर और ताइवान मुद्दों पर बहुपक्षीय निर्णयों को नकारता रहा है, जिससे उसके इस आह्वान की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन सुरक्षा परिषद की खुली बहस में चीन ने क्या कहा?
चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने 20 अगस्त को कहा कि एकजुटता और सहयोग ही सुरक्षा परिषद की सबसे महत्वपूर्ण कार्य पद्धति होनी चाहिए। उन्होंने संवाद, वार्ता और शांतिपूर्ण विवाद-समाधान को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
फू त्सोंग ने प्रतिबंधों के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों और बल प्रयोग जैसे अनिवार्य उपायों का इस्तेमाल अत्यंत सावधानी से किया जाना चाहिए। जो प्रतिबंध अपने लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रहे हैं, उनकी समीक्षा कर आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।
चीन ने एकतरफा कार्रवाइयों पर क्या रुख अपनाया?
फू त्सोंग ने उन अवैध एकतरफा कार्रवाइयों का विरोध किया जो सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र को दरकिनार करती हैं। उन्होंने सभी देशों से परिषद के प्रस्तावों का सख्ती से पालन करने और उसके संस्थागत अधिकार की रक्षा करने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय 6 का इस संदर्भ में क्या महत्व है?
संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अध्याय 6 विवादों के शांतिपूर्ण समाधान से संबंधित है। फू त्सोंग ने इसी भावना के अनुरूप संवाद और मध्यस्थता को बढ़ावा देने की बात कही, जो सैन्य हस्तक्षेप की बजाय कूटनीतिक रास्तों को प्राथमिकता देता है।
इस बयान से वैश्विक कूटनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
चीन का यह रुख बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। आलोचकों का कहना है कि यह बयान पश्चिमी देशों की एकतरफा नीतियों के विरुद्ध चीन और उसके साझेदार देशों की साझा स्थिति को रेखांकित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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