चीन के राजदूत फू थ्सोंग ने UN सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व शांति के लिए रखे चार सूत्रीय प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने 11 जून 2025 को UN सुरक्षा परिषद की खुली बहस में मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत किए। यह बहस 'मध्य पूर्व में शांति को बढ़ावा देना: स्थायी शांति के लिए मध्यस्थता और संवाद' विषय पर आयोजित की गई थी। फू थ्सोंग ने कहा कि मध्य पूर्व की मौजूदा अस्थिरता केवल क्षेत्रीय मामला नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।
मध्य पूर्व संकट और वैश्विक प्रभाव
फू थ्सोंग ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि मध्य पूर्व में जारी तनाव न केवल वहाँ के नागरिकों की पीड़ा का कारण है, बल्कि यह विश्व अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी सीधा असर डालता है। उन्होंने कहा कि इससे सभी देशों के साझा हितों को नुकसान पहुँचता है। यह ऐसे समय में आया है जब गाजा संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।
चीन के चार सूत्रीय प्रस्ताव
पहला प्रस्ताव: राजनीतिक समाधानों को प्राथमिकता दी जाए और विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाए। फू थ्सोंग के अनुसार, सैन्य कार्रवाई स्थायी शांति की गारंटी नहीं दे सकती।
दूसरा प्रस्ताव: निष्पक्षता और न्याय को बनाए रखा जाए तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष के साथ दोहरे मानदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए।
तीसरा प्रस्ताव: स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को कायम रखा जाए और एकता एवं सहयोग के माध्यम से साझा सुरक्षा का निर्माण किया जाए। इसका आशय है कि बाहरी हस्तक्षेप नहीं, बल्कि क्षेत्रीय देशों की अपनी भागीदारी से समाधान निकाला जाए।
चौथा प्रस्ताव: एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जाए जो संकट के लक्षणों के साथ-साथ उसके मूल कारणों को भी संबोधित करे, और विकास एवं पुनर्निर्माण के माध्यम से दीर्घकालिक शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा दिया जाए।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान
फू थ्सोंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह न्यायसंगत रुख अपनाए और शांति बहाली के लिए एकजुट प्रयास करे। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व के लोगों को शांति का अधिकार है और इसे जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि चीन पिछले कुछ वर्षों से मध्य पूर्व में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है — जिसमें 2023 में सऊदी अरब और ईरान के बीच कराई गई ऐतिहासिक सुलह भी शामिल है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन के इन प्रस्तावों को उसकी व्यापक कूटनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसमें वह पश्चिमी देशों के विकल्प के रूप में खुद को वैश्विक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना चाहता है। UN सुरक्षा परिषद में इन प्रस्तावों पर आगे की बातचीत और सदस्य देशों की प्रतिक्रिया आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगी।