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चीन के राजदूत फू थ्सोंग ने UN सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व शांति के लिए रखे चार सूत्रीय प्रस्ताव

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चीन के राजदूत फू थ्सोंग ने UN सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व शांति के लिए रखे चार सूत्रीय प्रस्ताव

सारांश

चीन ने UN सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व शांति के लिए चार सूत्रीय एजेंडा पेश किया — राजनीतिक समाधान, अंतरराष्ट्रीय कानून, क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता और मूल कारणों के निदान पर केंद्रित। यह कदम वैश्विक मध्यस्थ के रूप में चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है।

मुख्य बातें

फू थ्सोंग ने 11 जून 2025 को UN सुरक्षा परिषद की खुली बहस में चीन का पक्ष रखा।
चीन ने मध्य पूर्व शांति के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत किए — राजनीतिक समाधान, अंतरराष्ट्रीय कानून, क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता और मूल कारणों का निदान।
फू थ्सोंग ने कहा कि मध्य पूर्व का तनाव विश्व अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को प्रभावित करता है।
चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से न्यायसंगत रुख और एकजुट प्रयास का आह्वान किया।
यह प्रस्ताव 2023 में सऊदी-ईरान सुलह के बाद मध्य पूर्व में चीन की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका की कड़ी है।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने 11 जून 2025 को UN सुरक्षा परिषद की खुली बहस में मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत किए। यह बहस 'मध्य पूर्व में शांति को बढ़ावा देना: स्थायी शांति के लिए मध्यस्थता और संवाद' विषय पर आयोजित की गई थी। फू थ्सोंग ने कहा कि मध्य पूर्व की मौजूदा अस्थिरता केवल क्षेत्रीय मामला नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।

मध्य पूर्व संकट और वैश्विक प्रभाव

फू थ्सोंग ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि मध्य पूर्व में जारी तनाव न केवल वहाँ के नागरिकों की पीड़ा का कारण है, बल्कि यह विश्व अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी सीधा असर डालता है। उन्होंने कहा कि इससे सभी देशों के साझा हितों को नुकसान पहुँचता है। यह ऐसे समय में आया है जब गाजा संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।

चीन के चार सूत्रीय प्रस्ताव

पहला प्रस्ताव: राजनीतिक समाधानों को प्राथमिकता दी जाए और विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाए। फू थ्सोंग के अनुसार, सैन्य कार्रवाई स्थायी शांति की गारंटी नहीं दे सकती।

दूसरा प्रस्ताव: निष्पक्षता और न्याय को बनाए रखा जाए तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष के साथ दोहरे मानदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए।

तीसरा प्रस्ताव: स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को कायम रखा जाए और एकता एवं सहयोग के माध्यम से साझा सुरक्षा का निर्माण किया जाए। इसका आशय है कि बाहरी हस्तक्षेप नहीं, बल्कि क्षेत्रीय देशों की अपनी भागीदारी से समाधान निकाला जाए।

चौथा प्रस्ताव: एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जाए जो संकट के लक्षणों के साथ-साथ उसके मूल कारणों को भी संबोधित करे, और विकास एवं पुनर्निर्माण के माध्यम से दीर्घकालिक शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा दिया जाए।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान

फू थ्सोंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह न्यायसंगत रुख अपनाए और शांति बहाली के लिए एकजुट प्रयास करे। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व के लोगों को शांति का अधिकार है और इसे जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि चीन पिछले कुछ वर्षों से मध्य पूर्व में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है — जिसमें 2023 में सऊदी अरब और ईरान के बीच कराई गई ऐतिहासिक सुलह भी शामिल है।

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन के इन प्रस्तावों को उसकी व्यापक कूटनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसमें वह पश्चिमी देशों के विकल्प के रूप में खुद को वैश्विक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना चाहता है। UN सुरक्षा परिषद में इन प्रस्तावों पर आगे की बातचीत और सदस्य देशों की प्रतिक्रिया आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें उसकी उस व्यापक रणनीति से अलग नहीं देखा जा सकता जिसमें वह पश्चिम-नेतृत्व वाले वैश्विक व्यवस्था के विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करना चाहता है। 'आत्मनिर्भरता' और 'बाहरी हस्तक्षेप से मुक्ति' जैसे शब्द अमेरिकी भूमिका पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी हैं। असली सवाल यह है कि क्या चीन इन सिद्धांतों को गाजा जैसे सक्रिय संघर्षों पर लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति रखता है, या ये प्रस्ताव केवल वैश्विक मंच पर छवि-निर्माण का हिस्सा हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन ने UN सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व शांति के लिए कौन-से चार प्रस्ताव रखे?
चीनी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने चार प्रस्ताव रखे: राजनीतिक समाधानों को बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय कानून के जरिए निष्पक्षता बनाए रखना, क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता और सहयोग से साझा सुरक्षा बनाना, तथा संकट के मूल कारणों और लक्षणों दोनों को संबोधित करना।
फू थ्सोंग कौन हैं और उन्होंने यह बयान कब दिया?
फू थ्सोंग संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि हैं। उन्होंने 11 जून 2025 को UN सुरक्षा परिषद की 'मध्य पूर्व में शांति को बढ़ावा देना' विषय पर आयोजित खुली बहस में यह प्रस्ताव रखे।
चीन के अनुसार मध्य पूर्व का संकट विश्व को कैसे प्रभावित करता है?
चीनी प्रतिनिधि के अनुसार, मध्य पूर्व की अस्थिरता केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं है — यह विश्व अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डालती है और सभी देशों के साझा हितों को नुकसान पहुँचाती है।
मध्य पूर्व में चीन की कूटनीतिक भूमिका क्या रही है?
चीन ने 2023 में सऊदी अरब और ईरान के बीच ऐतिहासिक सुलह कराई थी। तब से वह मध्य पूर्व में सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है और खुद को पश्चिमी विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
UN सुरक्षा परिषद की इस बहस का महत्व क्या है?
यह बहस ऐसे समय हुई जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थायी समाधान की तलाश में है। चीन के प्रस्ताव वैश्विक कूटनीति में उसकी बढ़ती सक्रियता को दर्शाते हैं और आने वाले हफ्तों में सदस्य देशों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
राष्ट्र प्रेस
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