चीन बना यूएन सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष, मई में तीन बड़े मुद्दों पर रहेगा फोकस
सारांश
Key Takeaways
चीन ने 1 मई 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता का कार्यभार संभाल लिया। यूएन में चीन के स्थाई प्रतिनिधि फू छोंग ने उसी दिन आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद मई महीने में तीन प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी।
मई में सुरक्षा परिषद की तीन प्राथमिकताएँ
फू छोंग के अनुसार, पहली प्राथमिकता संयुक्त राष्ट्र चार्टर की प्रतिष्ठा और यूएन की वैश्विक भूमिका का पुनरोत्थान करना है। दूसरी प्राथमिकता मध्य-पूर्व संकट का राजनीतिक समाधान आगे बढ़ाना है। तीसरी प्राथमिकता अफ्रीकी देशों की स्थिरता और विकास को समर्थन देना है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुपक्षीय व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है और प्रमुख शक्तियों के बीच टकराव की स्थिति गहरा रही है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर और बहुपक्षवाद पर उच्च स्तरीय बहस
फू छोंग ने कहा कि हाल के वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में उथल-पुथल तेज हुई है, मुठभेड़ व मुकाबला बढ़े हैं और बहुपक्षीय व्यवस्था तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून को गंभीर नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यूएन चार्टर की प्रतिष्ठा और यूएन की भूमिका बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
सुरक्षा परिषद मई में इस विषय पर एक उच्च स्तरीय खुली बहस आयोजित करेगी, जिसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध की उपलब्धियों की रक्षा करना और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में यूएन की केंद्रीय भूमिका को पुनर्स्थापित करना है।
मध्य-पूर्व और अफ्रीका पर विशेष ध्यान
फू छोंग ने बताया कि मई में सुरक्षा परिषद इज़राइल-फिलिस्तीन, लेबनान और सीरिया सहित मध्य-पूर्व के विभिन्न मुद्दों की नियमित समीक्षा करेगी। इसके अलावा, चीन सुरक्षा परिषद में अफ्रीकी देशों की स्थिरता और विकास पर ध्यान केंद्रित रखने का आग्रह करेगा।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब गाज़ा संघर्ष और सूडान जैसे अफ्रीकी देशों में मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
यूएन महासचिव की भूमिका पर चीन का रुख
फू छोंग ने यह भी रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र इस समय एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को एक ऐसे सशक्त महासचिव की ज़रूरत है जो बहुपक्षवाद के प्रति और यूएन की भूमिका बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हों।
आने वाले हफ्तों में सुरक्षा परिषद की बैठकों और उच्च स्तरीय बहस के नतीजे यह तय करेंगे कि चीन की अध्यक्षता में वैश्विक मुद्दों पर कितनी ठोस प्रगति हो पाती है।
(साभार: चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)