वांग यी ने UNSC उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता, 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल
सारांश
मुख्य बातें
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 27 मई 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जो चीन की मई माह की घूर्णनशील अध्यक्षता के तहत आयोजित की गई। बैठक का विषय था — 'संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को कायम रखना और संयुक्त राष्ट्र केंद्रित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना'। इसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 20 से अधिक देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
बैठक का संदर्भ और महत्त्व
यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और बहुपक्षीय व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बैठक में मौजूदा वैश्विक स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी। गौरतलब है कि चीन इस वर्ष UNSC में अपनी वैध सीट की बहाली की 55वीं वर्षगांठ मना रहा है।
वांग यी के मुख्य बयान
अपने संबोधन में वांग यी ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे जटिल और गहरे बदलावों के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि 'मानव सभ्यता का जहाज अब खतरनाक जलक्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और विश्व शांति तथा विकास का मार्ग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है।' उनके अनुसार, मौजूदा चुनौतियाँ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के शांति बनाए रखने के संकल्प, न्याय की रक्षा करने की क्षमता और नवाचार के साहस की परीक्षा ले रही हैं।
चीन की प्राथमिकताएँ और आह्वान
वांग यी ने पाँच सूत्री एजेंडा रेखांकित किया — संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना को पुनर्जीवित करना, सुरक्षा परिषद के अधिकार और कार्रवाई क्षमता को मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग को गहरा करना, वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार लाना और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की कार्यक्षमता बढ़ाना। उन्होंने सभी देशों से एकजुट होकर संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावशाली बनाने का आह्वान किया।
चीन की भूमिका पर जोर
वांग यी ने कहा कि पिछले 55 वर्षों में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में चीन ने संयुक्त राष्ट्र के कार्यों में सक्रिय और रचनात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने भरोसा जताया कि चीन आगे भी बहुपक्षवाद को मजबूत करेगा, अधिक न्यायपूर्ण और समान वैश्विक शासन व्यवस्था को बढ़ावा देगा तथा 'मानव जाति के साझा भविष्य वाले समुदाय' के निर्माण की दिशा में अन्य देशों के साथ मिलकर काम करेगा।
आगे की दिशा
इस बैठक को चीन की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें वह खुद को वैश्विक बहुपक्षवाद के पैरोकार के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। आलोचकों का कहना है कि बयानबाजी और व्यावहारिक कदमों के बीच की खाई को पाटना ही असली परीक्षा होगी।