चीन 26 मई को यूएन सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेगा, वांग यी न्यूयॉर्क रवाना
सारांश
मुख्य बातें
चीन इस महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष देश होने के नाते 26 मई 2025 को न्यूयॉर्क में एक उच्च स्तरीय बैठक की मेजबानी करेगा। बैठक का केंद्रीय विषय है — 'संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को बनाए रखना और संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना।' इस बैठक की अध्यक्षता चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य एवं चीनी विदेश मंत्री वांग यी करेंगे।
मुख्य घटनाक्रम
22 मई 2025 को चीनी विदेश मंत्रालय के नियमित संवाददाता सम्मेलन में प्रवक्ता क्वो च्याखुन ने इस यात्रा की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि वांग यी न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान 28 मई को 'वैश्विक शासन मित्र समूह' की बैठक में भी शामिल होंगे। इसके अलावा वे संयुक्त राष्ट्र महासचिव तथा संबंधित देशों के विदेश मंत्रियों से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
कनाडा यात्रा और द्विपक्षीय संबंध
न्यूयॉर्क के बाद वांग यी 28 से 30 मई तक कनाडा की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के निमंत्रण पर हो रही है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, हाल के वर्षों में चीन-कनाडा संबंधों में सुधार आया है और दोनों देश एक नए प्रकार की रणनीतिक साझेदारी की दिशा में काम कर रहे हैं।
चीन की ओर से उम्मीद जताई गई है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनीतिक आपसी विश्वास को गहरा करेगी, पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग का विस्तार करेगी और मतभेदों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करेगी। लक्ष्य है कि चीन-कनाडा संबंध एक स्वस्थ, स्थिर और दीर्घकालिक पथ पर आगे बढ़ें।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका को लेकर बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि चीन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और वह बार-बार संयुक्त राष्ट्र-केंद्रित वैश्विक व्यवस्था का पक्षधर रहा है। इस बैठक के ज़रिये बीजिंग अपनी बहुपक्षीय कूटनीति को और मज़बूती देने की कोशिश कर रहा है।
आगे क्या
26 मई की सुरक्षा परिषद बैठक के बाद वांग यी की कनाडा यात्रा दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, यह यात्रा चीन की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह पश्चिमी देशों के साथ संवाद के रास्ते खुले रखना चाहता है।