चीन-कनाडा वार्ता: उइगर संगठन ने कनाडा से माँगा जवाब, वांग यी की यात्रा पर उठे मानवाधिकार सवाल
सारांश
मुख्य बातें
चीनी विदेश मंत्री वांग यी की 28 से 30 मई तक की कनाडा यात्रा के बीच, कनाडा स्थित प्रमुख उइगर अधिकार संगठन उइगर राइट्स एडवोकेसी प्रोजेक्ट (यूआरएपी) ने कनाडा सरकार से माँग की है कि वह चीन के साथ संबंध सामान्य करने से पहले मानवाधिकार उल्लंघनों पर स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करे। करीब दस वर्षों में किसी चीनी विदेश मंत्री की यह पहली कनाडा यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग की नई कोशिशों के बीच हो रही है।
यूआरएपी की माँगें
यूआरएपी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और विदेश मंत्री अनीता आनंद से अपील की है कि वे वांग यी के साथ बैठक में पूर्वी तुर्किस्तान — जिसे चीन शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र कहता है — में उइगरों की बड़े पैमाने पर हिरासत और निगरानी का मुद्दा उठाएँ। संगठन ने जबरन मज़दूरी, सप्लाई चेन में शोषण और कनाडा में उइगर कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने वाली चीन की कथित 'ट्रांसनेशनल रिप्रेशन' नीति पर भी बात करने की माँग की है।
यूआरएपी का कहना है कि यदि कनाडा उइगरों के खिलाफ कथित 'नरसंहार' और 'सीमा पार दमन' के जारी रहते हुए चीन के साथ नए समझौते करता है, तो इससे कनाडा की अपनी मानवाधिकार प्रतिबद्धताएँ कमज़ोर पड़ेंगी।
गोपनीय सहयोग समझौतों पर चिंता
संगठन ने कनाडा और चीन के कानून प्रवर्तन विभागों के बीच कथित 'गोपनीय' सहयोग समझौतों पर भी सवाल उठाए हैं, जिनमें रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के उन करारों का उल्लेख है जो जानकारी साझा करने, जाँच में सहायता और चीनी सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय से संबंधित हैं। आलोचकों के अनुसार, इन समझौतों में संसदीय निगरानी और पारदर्शिता का अभाव है, जिससे कमज़ोर समुदायों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
हुसैन सेलिल का मामला
यूआरएपी ने 2006 से चीन में कैद कनाडाई नागरिक हुसैन सेलिल के मामले पर भी तत्काल ध्यान देने की माँग की। उइगर मूल के इस कनाडाई नागरिक को उज़्बेकिस्तान यात्रा के दौरान हिरासत में लिया गया था और बाद में चीन को सौंप दिया गया। उनके परिवार और समर्थकों का आरोप है कि चीन उनकी कनाडाई नागरिकता को मान्यता नहीं देता और उन्हें उचित काउंसलर सहायता भी नहीं मिल रही।
यूआरएपी के कार्यकारी निदेशक मेहमत तोहती ने कहा, 'जब तक उइगर लोग जेलों में बंद हैं, परिवार बिछड़े हुए हैं और दमन के पीड़ित न्याय की तलाश में हैं, तब तक हम चीन सरकार के साथ रिश्तों को सामान्य नहीं बना सकते। आर्थिक सहयोग कभी भी मानवाधिकारों की कीमत पर नहीं होना चाहिए।'
तोहती ने सेलिल के मामले पर आगे कहा, 'हुसैन सेलिल की लगातार कैद इस बात की याद दिलाती है कि जब सरकार मानवाधिकारों से ज़्यादा कूटनीतिक सुविधा को महत्व देती है, तब कनाडाई नागरिक भी सुरक्षित नहीं रहते।'
वीज़ा-फ्री व्यवस्था पर आपत्ति
संगठन ने चीन के साथ बढ़ रही वीज़ा-फ्री यात्रा व्यवस्था पर भी चिंता जताई है। यूआरएपी का तर्क है कि जब तक चीन उइगरों पर अत्याचार, असंतुष्टों की आवाज़ दबाने और विदेशों में रहने वाले समुदायों को डराने-धमकाने की नीति जारी रखता है, तब तक इस तरह की कूटनीतिक नज़दीकी उचित नहीं होगी। यह ऐसे समय में आया है जब कनाडा अपनी विदेश नीति में अमेरिकी दबाव के बीच चीन के साथ संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।
आगे की राह
वांग यी की यह यात्रा चीन-कनाडा संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों के दबाव के बीच कनाडाई नेताओं के सामने यह परीक्षा है कि वे आर्थिक हितों और मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं के बीच किस तरह संतुलन बनाते हैं। यूआरएपी ने स्पष्ट किया है कि वह इस यात्रा के परिणामों पर कड़ी नज़र रखेगा।