6 जुलाई 2026
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उरुमची हिंसा की 17वीं बरसी: वॉशिंगटन-ओटावा में उइगर समुदाय का प्रदर्शन, चीन के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई की माँग

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उरुमची हिंसा की 17वीं बरसी: वॉशिंगटन-ओटावा में उइगर समुदाय का प्रदर्शन, चीन के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई की माँग

सारांश

उरुमची हिंसा की 17वीं बरसी पर उइगर समुदाय ने वॉशिंगटन से एडमॉन्टन तक और जापान से ब्रिटेन तक एकजुट होकर चीन के खिलाफ आवाज उठाई। ईटीजीई ने ईस्ट तुर्किस्तान को कब्जे वाले देश के रूप में मान्यता और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही की माँग की — यह वैश्विक उइगर एकजुटता का बढ़ता हुआ दबाव है।

मुख्य बातें

6 जुलाई 2026 को वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस और एडमॉन्टन के अल्बर्टा विधानमंडल के बाहर उइगर समुदाय ने प्रदर्शन किए।
प्रदर्शन 5 जुलाई 2009 की उरुमची हिंसा की 17वीं बरसी के अवसर पर आयोजित हुए।
ईटीजीई के अनुसार, 2009 की हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों उइगर लापता किए गए — चीन इन आरोपों को अस्वीकार करता है।
ईटीजीई के विदेश मंत्री सालिह हुदायर ने व्हाइट हाउस के बाहर और प्रधानमंत्री अब्दुलाहत नूर ने एडमॉन्टन में प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया।
संगठन ने जापान, तुर्किए, नॉर्वे, ब्रिटेन सहित वैश्विक स्तर पर स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन किया।
ईटीजीई ने चीन के 'एथनिक यूनिटी लॉ' को अस्वीकार करने और ईस्ट तुर्किस्तान को कब्जे वाले देश के रूप में मान्यता देने की माँग की।

ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एग्जाइल (ईटीजीई) के अधिकारियों और उइगर समुदाय के सदस्यों ने 6 जुलाई 2026 को वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस और कनाडा के एडमॉन्टन में अल्बर्टा विधानमंडल के बाहर प्रदर्शन किए। ये प्रदर्शन 5 जुलाई 2009 की उरुमची हिंसा की 17वीं बरसी के अवसर पर आयोजित किए गए, जिसमें चीन को कथित तौर पर जारी दमन और नरसंहार के लिए जवाबदेह ठहराने तथा अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की माँग की गई। चीन इस क्षेत्र को शिनजियांग उइगर स्वायत्तशासी क्षेत्र के नाम से संबोधित करता है।

मुख्य घटनाक्रम

ईटीजीई के अनुसार, 5 जुलाई 2009 को हजारों उइगरों ने उरुमची में शांतिपूर्ण मार्च निकाला था — चीन के शाओगुआन स्थित एक खिलौना फैक्ट्री में मारे गए उइगर मजदूरों के लिए न्याय की माँग को लेकर। संगठन का आरोप है कि इसके जवाब में चीनी अधिकारियों ने गोलीबारी, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ और जबरन लोगों को गायब करने जैसी कार्रवाइयाँ कीं। ईटीजीई का दावा है कि इस दौरान सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों उइगर पुरुषों तथा युवाओं को उनके घरों से हिरासत में लेकर लापता कर दिया गया। चीन सरकार ने इन आरोपों को लेकर अपना अलग पक्ष रखा है।

वैश्विक स्मृति कार्यक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, उइगर समुदायों ने इस दिन को राष्ट्रीय शोक और विरोध दिवस के रूप में मनाते हुए जापान, तुर्किए, नॉर्वे और ब्रिटेन सहित दुनिया भर में स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए। इन आयोजनों में विभिन्न सरकारों से शिनजियांग में चीन की नीतियों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की अपील की गई। गौरतलब है कि यह वैश्विक समन्वय पिछले कुछ वर्षों में तेज हुआ है, जो उइगर प्रवासी समुदाय के संगठित होने का संकेत देता है।

नेताओं के बयान

व्हाइट हाउस के बाहर आयोजित सभा में ईटीजीई के विदेश मंत्री सालिह हुदायर ने कहा, 'दुनिया के सभी देशों में अमेरिका सबसे बेहतर समझ सकता है कि उस साम्राज्य के खिलाफ स्वतंत्रता के लिए लड़ने का क्या मतलब होता है, जो कहता है कि आपको अस्तित्व में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यदि चीन को नरसंहार जैसे अपराधों के बावजूद बिना जवाबदेही के छोड़ दिया गया, तो वह हमारी सीमाओं तक ही नहीं रुकेगा।' उन्होंने आगे कहा, 'हमारी आजादी और आपकी सुरक्षा एक ही उद्देश्य से जुड़ी हुई हैं।'

एडमॉन्टन में समानांतर प्रदर्शन का नेतृत्व ईटीजीई के प्रधानमंत्री अब्दुलाहत नूर ने किया, जो अल्बर्टा उइगर सांस्कृतिक सोसायटी के अध्यक्ष भी हैं। नूर ने कहा, 'कनाडा को केवल औपचारिक बयानों से आगे बढ़ते हुए ईस्ट तुर्किस्तान को एक कब्जे वाले देश के रूप में मान्यता देनी चाहिए। हम ओटावा से अपील करते हैं कि वह हमारे लोगों के आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता के अधिकार का समर्थन करे।'

ईटीजीई के आरोप और माँगें

ईटीजीई ने आरोप लगाया है कि उरुमची हिंसा के बाद से 'लाखों उइगर, कजाख, किर्गिज और दूसरे तुर्क लोगों को कॉन्सेंट्रेशन कैंप और जेलों में कैद कर दिया गया है, उनसे जबरदस्ती काम करवाया गया और उनकी बुनियादी आजादी छीन ली गई है।' संगठन का यह भी दावा है कि '10 लाख से ज्यादा पूर्वी तुर्किस्तानी बच्चों को उनके परिवारों से अलग करके चीनी सरकारी संस्थानों में रखा गया है।' ये आरोप ईटीजीई के हैं; चीन सरकार इन्हें अस्वीकार करती है।

संगठन ने वैश्विक समुदाय से चीन के हाल में लागू किए गए 'एथनिक यूनिटी लॉ' को अस्वीकार करने, चीनी अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराने तथा ईस्ट तुर्किस्तान के संदर्भ में उपनिवेशित देशों और लोगों को स्वतंत्रता प्रदान करने संबंधी संयुक्त राष्ट्र घोषणा के समर्थन की भी अपील की।

आगे क्या होगा

यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भाषण दिया था। ईटीजीई अब अमेरिका, कनाडा और अन्य पश्चिमी देशों से शिनजियांग के लोगों की समस्याओं के मूल कारणों का समाधान करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस क्षेत्र को कब्जे वाला देश घोषित करने की माँग कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि जब तक प्रमुख शक्तियाँ चीन के साथ आर्थिक संबंधों को प्राथमिकता देती रहेंगी, ये माँगें कूटनीतिक दबाव में तब्दील होना मुश्किल होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे 'जवाबदेही' की माँग अक्सर बयानबाजी तक सिमट जाती है। ईटीजीई की माँगें — अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मान्यता, संयुक्त राष्ट्र घोषणा का समर्थन — कागज पर ठोस हैं, लेकिन इन्हें लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति अभी तक किसी प्रमुख शक्ति ने नहीं दिखाई है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि इन प्रदर्शनों का असली पैमाना — जापान से ब्रिटेन तक एक साथ — उइगर प्रवासी नेटवर्क की बढ़ती संगठन-क्षमता को दर्शाता है, जो भविष्य में नीति-निर्माताओं पर दबाव बनाने में निर्णायक हो सकती है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

5 जुलाई 2009 की उरुमची हिंसा क्या थी?
ईटीजीई के अनुसार, 5 जुलाई 2009 को हजारों उइगरों ने उरुमची में शांतिपूर्ण मार्च निकाला था, जिसके बाद चीनी अधिकारियों ने कथित तौर पर गोलीबारी और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ कीं। संगठन का दावा है कि सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों लापता हुए; चीन इन आरोपों को अस्वीकार करता है।
ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एग्जाइल (ईटीजीई) क्या है?
ईटीजीई एक निर्वासित संगठन है जो खुद को शिनजियांग (जिसे वे ईस्ट तुर्किस्तान कहते हैं) के उइगर और अन्य तुर्क लोगों का प्रतिनिधि बताता है। यह संगठन चीनी शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उइगर अधिकारों की वकालत करता है।
2026 के इन प्रदर्शनों में क्या माँगें रखी गईं?
ईटीजीई ने अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों से ईस्ट तुर्किस्तान को कब्जे वाले देश के रूप में मान्यता देने, चीन के 'एथनिक यूनिटी लॉ' को अस्वीकार करने और चीनी अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराने की माँग की। संयुक्त राष्ट्र की उपनिवेश-मुक्ति घोषणा के समर्थन की भी अपील की गई।
इन प्रदर्शनों में कौन से देश शामिल हुए?
अमेरिका और कनाडा के अलावा जापान, तुर्किए, नॉर्वे और ब्रिटेन में भी उइगर समुदायों ने स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए। यह वैश्विक समन्वय इस बात का संकेत है कि उइगर प्रवासी नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक संगठित हो रहा है।
चीन शिनजियांग पर उइगर आरोपों के बारे में क्या कहता है?
चीन शिनजियांग को अपना अभिन्न अंग मानता है और नरसंहार या बड़े पैमाने पर दमन के आरोपों को अस्वीकार करता है। चीन सरकार का कहना है कि शिनजियांग में चलाए गए कार्यक्रम आतंकवाद-रोधी और व्यावसायिक प्रशिक्षण से जुड़े हैं, न कि उत्पीड़न से।
राष्ट्र प्रेस
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