पूर्वी तुर्किस्तान के निर्वासित नेताओं ने यूएन में चीन को 'औपनिवेशिक शक्ति' घोषित करने की माँग की

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पूर्वी तुर्किस्तान के निर्वासित नेताओं ने यूएन में चीन को 'औपनिवेशिक शक्ति' घोषित करने की माँग की

सारांश

पहली बार किसी निर्वासित सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की विउपनिवेशीकरण समिति में चीन को 'औपनिवेशिक शक्ति' घोषित करने की औपचारिक माँग रखी है। ETGE और ETNM की यह 25 पृष्ठीय याचिका शिनजियांग को 'गैर-स्वशासी क्षेत्र' दर्ज कराने और पूर्वी तुर्किस्तान को आत्मनिर्णय का अधिकार दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

मुख्य बातें

ETGE और ETNM ने 6 मई 2026 को यूएन की C-24 समिति में 25 पृष्ठीय याचिका दाखिल की।
माँग की गई है कि पूर्वी तुर्किस्तान को 'गैर-स्वशासी क्षेत्र' और चीन को 'औपनिवेशिक शक्ति' घोषित किया जाए।
निर्वासित अधिकारियों के अनुसार यह पहली बार है जब किसी इकाई ने यूएन में चीन को इस रूप में औपचारिक चुनौती दी है।
याचिका में बड़े पैमाने पर कथित नजरबंदी, ऑर्गन हार्वेस्टिंग, नसबंदी और लगभग 10 लाख बच्चों को परिवारों से अलग करने के आरोप लगाए गए हैं।
चीन के अपने पाँच साल के प्लान में 2021-2025 के बीच 1.375 करोड़ जबरन श्रम स्थानांतरण का उल्लेख बताया गया है।
ETGE के अनुसार उइगर, कजाख, किर्गिज और अन्य तुर्क लोगों के कथित 'नरसंहार' को इस महीने 13 साल पूरे होंगे।

ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट-इन-एक्साइल (ETGE) ने 6 मई 2026 को संयुक्त राष्ट्र की विशेष विउपनिवेशीकरण समिति (C-24) के समक्ष एक 25 पृष्ठीय याचिका प्रस्तुत की, जिसमें यूएन महासभा से अपील की गई है कि वह पूर्वी तुर्किस्तान पर चीन को आधिकारिक रूप से 'औपनिवेशिक शक्ति' घोषित करे। यह कथित तौर पर पहली बार है जब किसी इकाई ने किसी संयुक्त राष्ट्र निकाय के सामने चीन को इस रूप में औपचारिक चुनौती दी है।

याचिका में क्या माँगा गया है

ETGE और ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल मूवमेंट (ETNM) ने संयुक्त रूप से यह याचिका दाखिल की है। इसमें पूर्वी तुर्किस्तान — जिसे चीन शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र कहता है — को 'गैर-स्वशासी क्षेत्र' के रूप में दर्ज करने की माँग की गई है। याचिका में कहा गया है,

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु इसके व्यावहारिक परिणाम सीमित हो सकते हैं — C-24 समिति की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं और चीन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। फिर भी, यह कदम उइगर मुद्दे को मानवाधिकार की परिधि से निकालकर औपनिवेशिक विमर्श में स्थापित करने की रणनीतिक कोशिश है, जो पश्चिमी देशों में राजनीतिक दबाव बढ़ा सकती है। आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि जब वैश्विक शक्तियाँ आर्थिक हितों के कारण चीन के विरुद्ध निर्णायक कदम उठाने से बचती रही हैं, तो एक निर्वासित सरकार की याचिका कितना बदल पाएगी। तथापि, अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इस विमर्श का निरंतर उठना चीन के लिए कूटनीतिक असुविधा का स्रोत बना रहेगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ETGE ने यूएन में क्या माँग की है?
ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट-इन-एक्साइल (ETGE) ने यूएन की C-24 समिति में 25 पृष्ठीय याचिका दाखिल कर माँग की है कि चीन को पूर्वी तुर्किस्तान पर 'औपनिवेशिक शक्ति' घोषित किया जाए और इस क्षेत्र को 'गैर-स्वशासी क्षेत्र' के रूप में दर्ज किया जाए। इसका उद्देश्य पूर्वी तुर्किस्तान को आत्मनिर्णय का अंतर्राष्ट्रीय अधिकार दिलाना है।
यूएन की C-24 समिति क्या है?
C-24 यानी संयुक्त राष्ट्र की विशेष विउपनिवेशीकरण समिति (Special Committee on Decolonization) वह निकाय है जो गैर-स्वशासी क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा करती है और महासभा को सिफारिशें देती है। इस समिति की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाने में सहायक होती हैं।
पूर्वी तुर्किस्तान में उइगरों पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नजरबंदी, ऑर्गन हार्वेस्टिंग, नसबंदी और लगभग 10 लाख बच्चों को उनके परिवारों से अलग करने के आरोप लगाए गए हैं। निर्वासित अधिकारियों के अनुसार उइगर, कजाख और किर्गिज लोगों के कथित नरसंहार को इस महीने 13 साल पूरे होंगे।
चीन के पाँच साल के प्लान में जबरन श्रम स्थानांतरण का क्या उल्लेख है?
याचिका के अनुसार, चीन के अपने पाँच साल के प्लान में 2021 से 2025 के बीच शिनजियांग से 1.375 करोड़ जबरन श्रम स्थानांतरण का अनुमान लगाया गया है। यह आँकड़ा ETGE ने चीन के आधिकारिक दस्तावेजों के हवाले से प्रस्तुत किया है।
क्या यूएन में यह माँग पहले भी उठाई गई है?
निर्वासित अधिकारियों के अनुसार यह पहली बार है जब किसी देश या इकाई ने किसी यूएन निकाय के सामने चीन को 'औपनिवेशिक शक्ति' के रूप में आधिकारिक तौर पर चुनौती दी है। इससे पहले उइगर मुद्दे को मुख्यतः मानवाधिकार उल्लंघन के संदर्भ में उठाया जाता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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